उद्यानिकी (Horticulture)

हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन एक लाभदायी तकनीक

पशु उत्पाद जैसे दूध और मांस की उत्पादन लगत में डेन और चारे का योगदान 60 से 70 प्रतिशत तक है जिसमे 30-35 प्रतिशत योगदान हरे चारे का होता है। देश में हरे चारे की मांग (2010) 816.8 मिलियन टन है जबकि इसकी आपूर्ति मात्र 525.5 मिलियन टन है इस प्रकार हरे चारे की कुल कमी लगभग 291.3 मिलियन टन है। यह कमी आवश्यक हरे चारे की मात्रा की लगभग 35 प्रतिशत है। भारत में तेजी से शहरीकरण और खनन क्षेत्रों के कारण चराई क्षेत्र एवं हरा चारा उत्पादन वाले क्षेत्रों में कमी हुई है।
इस समस्या के कारण पशुपालकों को हरा चारा उत्पादन की वैकल्पिक और टिकाऊ विधि की आवश्यकता हुई है। यह बहुत ही स्पष्ट है कि लगत में वृद्धि एवं प्राकृतिक संसाधनों में ह्रास को काम करने की लिए टिकाऊ तकनीक जैसे – हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन, डेयरी व्यवसाय के भविष्य के लिए प्रमुख कारक है।
हाइड्रोपोनिक द्वारा उत्तम गुणवत्ता वाला हरा चारा उत्पादन करना, देश में हरे चारे की कमी को पूरा करने के लिए क्रान्तिकारी कदम साबित हो सकता है। ग्रीनहाऊस/पॉलीहाऊस में हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन करना सही विकल्प है। भारत में कई राज्य पॉलीहाऊस /ग्रीनहाऊस बनाने के लिए अनुदान प्रदान करते हंै जिसको कोई भी हाइड्रोपोनिक से हरा चारा उत्पादन करने के लिए ले सकता है। इस प्रकार उगाया गया हरा चारे को भेड़, बकरी तथा अन्य पशुओं को खिलाया जा सकता है।
हाइड्रोपोनिक क्या है?
केवल पानी में या बालू अथवा कंकड़ों में नियंत्रित जलवायु में बिना मिट्टी के पौधें उगने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहते हैं हाइड्रोपोनिक में चारे वाली फसलों को नियंत्रित परिस्थितियों में 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 80 से 85 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जाता है। सामान्यतया पेड़ -पौधे अपने आवश्यक पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक तकनीक में पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करने के लिए पौधों में एक विशेष प्रकार का घोल डाला जाता है इस घोल में पौधों के लिये आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिलाये जाते हैं। पानी, कंकड़ों या बालू में उगाये जाने वाले पौधों में इस घोल को महीने में एक -दो बार केवल कुछ मात्रा ही डाली जाती है। इस घोल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम , मैग्नीसियम, कैल्शियम , सल्फर, जिंक और आयरन आदि तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है, ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें।

हमारे देश में सर्वाधिक पशु संख्या होने के बावजूद प्रति पशु उत्पादकता को बढ़ाना एक बहुत बड़ी चुनौती है। भारतवर्ष में दुधारू पशुओं का औसत दूध उत्पादन 1172 किग्रा प्रति वर्ष प्रति पशु है जो कि विश्व के औसतन उत्पादन से काफी कम है इसका मुख्य कारण पर्याप्त मात्रा में हरे और सूखे चारे की कमी है। दुधारू पशुओं को यदि आवश्यकतानुसार संतुलित आहार देना है तो वर्षभर उत्तम गुणवत्ता वाले हरे चारे का उत्पादन करना होगा।

हाइड्रोपोनिक हरा चारा उत्पादन के लाभ:
परंपरागत तकनीक से चारा फसलें उगाने की अपेक्षा हाइड्रोपोनिक तकनीक के कई लाभ है। इस तकनीक से विपरीत जलवायु परिस्थितियों में उन क्षेत्रों में भी चारा उगाया जा सकता है जहां जमीन की कमी है अथवा वहां की मिट्टी उपजाऊ नहीं है।
हाइड्रोपोनिक के प्रमुख लाभ
पानी की बचत : हाइड्रोपोनिक तकनीक से 1 किग्रा हरा चारा उगाने के लिए 2 से 3 लीटर पानी की आवश्यकता होती है जबकि परंपरागत तकनीक से 55 से 75 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
न्यूनतम भूमि का उपयोग: हाइड्रोपोनिक तकनीक से रोजाना 1000 किग्रा हरा चारा केवल 480 स्क्वायर फ़ीट जमीन से मिल जाता है, जबकि परंपरागत तकनीक से इस चारे के लिए लगभग 25 एकड़ जमीन की आवश्यता होती है।
कम श्रमिकों की आवश्यकता : हाइड्रोपोनिक तकनीक में 2-3 घंटे/दिन श्रमिक की आवश्यकता होती है, जबकि परंपरागत तकनीक में बुवाई से कटाई तक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
कम समय की आवश्यकता : हाइड्रोपोनिक में गुणवत्ता वाला हरा चारा प्राप्त करने के लिए बीज अंकुरण के बाद 7-8 दिन लगते है, जबकि परंपरागत तकनीक में 45-65 दिन लगते हैं।
वर्ष पर्यन्त चारा उत्पादन : हाइड्रोपोनिक तकनीक के द्वारा मांग के अनुसार वर्ष पर्यन्त हरा चारा उत्पादन किया जा सकें।
चारे के पोषक मूल्य में वृद्धि : हाइड्रोपोनिक में अतिरिक्त पोषक तत्व आदि डालकर चारे के पोषक मूल्य में वृद्धि संभव है।
दूध उत्पादन में वृद्धि : दुधारू पशुओं में डेन की मात्रा की भरपाई हरे चारे से की जा सकती है जिससे दूध उत्पादन की लागत में कमी हो जाती है।
हरे चारे का कम नुकसान : हाइड्रोपोनिक में उगाये गये हरे चारे का पूर्ण उपयोग हो जाता है जिससे चारा व्यर्थ होने की संभावना कम से कम रहती है।
प्राकृतिक हरा चारा आपूर्ति : हाइड्रोपोनिक में किसी भी प्रकार के शाकनाशी का प्रयोग नहीं किया जाता है अत: हरा चारा पूर्णत: प्राकृतिक होता है।
अधिक उत्पादन : हाइड्रोपोनिक में चारे की वृद्धि दर अधिक होती है अत: परंपरागत तकनीक की अपेक्षा अधिक उत्पादन प्राप्त होता है।
दूध उत्पादन की लगत को कम करने में हरा चारा एक महत्वपूर्ण कारक है वर्तमान परिपक्ष्य में जहां भूमि का जोत छोटा, पानी की कमी, क्षारीय पानी,श्रमिक तथा भूमि की लागत अधिक है, वहाँ हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन तकनीक हरे चारे की कमी को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक साधन है।

        हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन की आवश्यकता:
निम्नलिखित कारणों से हरा चारा उत्पादन के लिए हाइड्रोपोनिक तकनीक की आवश्यकता है –

  • पशुपालकों के पास कम जोत का होना
  • हरा चारा उत्पादन के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध न होना
  • सिंचाई, भूमि की तैयारी के लिए सीमित संसाधन होना
  • खनन और तटीय क्षेत्रों में चारा उत्पादन के लिए सीमित भूमि
  • कृषि क्रियाओं हेतु अधिक मजदूरों की आवश्यकता
  • आवारा एवं जंगली पशुओं द्वारा चारा नष्ट कर देना
  • हरे चारे की मांग अधिक होना
  • बच्चू सिंह मीना
  • अजय कुमार मीना
    email : bsagrorca@gmail.com