करौंदा बागड़, फल दोंनो के लिये उपयोगी

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  • डॉ. सुनील कुमार जाटव वैज्ञानिक
  • डॉ. बी.एस.किरार,  डॉ.एस.के.सिंह, डॉ.आर.के. प्रजापति, डॉ.यू.एस. धाकड़
    जयपाल छिगाराह कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़

21 जुलाई 2022, करौंदा बागड़, फल दोंनो के लिये उपयोगी –

भूमि का चुनाव-  कांटेयुक्त होने के कारण करौंदा की झाडिय़ों गर्म जलवायु तथा सूखे के प्रति सहनशील है। इसलिए करौंदा सम्पूर्ण भारत के उष्ण, समशीतोष्ण, शुष्क एवं अद्र्धशुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में सफलता पूर्वक लगाया जाता है। करौंदा की खेती सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है, परन्तु उपयुक्त जल निकास एव 6-8 पीएच मान वाली बलुई दोमट भूमि करौंदे के लिए सर्वोत्तम होती है।

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सिंचाई

करौंदे के पौधों को प्रारम्भिक वर्षों में सिंचाई की आवश्यकता होती है पुष्पन एवं फलन के समय ही भूमि में नमी की आवश्यकता रहती हैं। कीट एवं व्याधि प्रबंध का प्रकोप कम देखा गया है।
कब और कैसे करें रोपाई- करौंदा के पौधों की रोपाई जुलाई-अगस्त तथा सिंचित क्षेत्र फरवरी-मार्च माह में की जा सकती है। करौंदा के पौधों बागड़ के रूप में लगाने के लिये कम दूरी रखें। करौंदा लगाने के लिए वर्गाकार अथवा आयताकार विधि 3 & 3 या 4&4 मीटर की दूरी पर लगायें। रोपण से लगभग एक माह पहले 30-40 से. मी. आकार के गड्ढे खोद कर उनमें 25-30 किलो सड़ी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाकर भर दें।

उपज- करौंदा के एक झाड़ी से लगभग 15-25 किलो फल प्राप्त हो जाते हैं।

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