ईसबगोल की उन्नत खेती

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जलवायु एवं भूमि-

ईसबगोल की उन्नत खेती के लिए सर्द एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त रहती है। बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए 20-25 सेल्सियस के मध्य का तापमान व मिट्टी का पी.एच. मान 7-8 सर्वोत्तम होता है। इसकी खेती के लिए दोमट, बलुई मिट्टी जिसमें जल निकास का उचित प्रबन्ध हो, उपयुक्त होती है।

खेत की तैयारी एवं भूमि उपचार-

छिटक कर बुवाई करने से 4-5 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है। लेकिन तुलासिता रोग के प्रकोप से फसल को बचाने हेतु मेटालेक्सिल 35 एस.डी. 5 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित करके बुवाई करें। ईसबगोल की बुवाई के लिए नवम्बर का प्रथम पखवाड़ा उत्तम पाया गया।

उन्नत किस्में-

आर.आई 89 – इस किस्म के पौधो की ऊँचाई 30-40 सेमी. होती है तथा 110-115 दिन में पक जाती है। इसकी उपज 12-16 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है।

आर.आई 1- शुष्क तथा अद्र्धशुष्क क्षेत्रों के लिए विकसित अधिक उपज देने वाली यह किस्म है। इस किस्म के पौधों की ऊँचाई 29-47 सेमी. होती है तथा 110-120 दिन में पक जाती है। इसकी औसत उपज क्षमता 12 से 16 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है।

जी. आई 2 – यह किस्म 118-125 दिन में पक जाती है। इसकी औसत उपज क्षमता 14 से 15 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है। इसमें भूसी की मात्रा 28-30 प्रतिशत तक पाई जाती हैं।

खाद एवं उर्वरक –

ईसबगोल की फसल अधिक पैदावार लेने हेतु 15-20 गाड़ी सड़ी हुई गोबर की खाद अगर उपलब्ध हो तो आखिरी जुताई के समय खेत में मिलायें। इस फसल को 30 किग्रा. नत्रजन और 20 किग्रा. फॉस्फोरस की प्रति हेक्टेयर आवश्यकता होती है।
खरपतवार नियंत्रण एवं निराई गुड़ाई-ईसबगोल में दो निराइयों की आवश्यकता होती है, पहली निराई, बुवाई के करीब 20 दिन बाद एवं दूसरी 40-50 दिन बाद करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के बाद लेकिन पौधे उगने से पहले या 15-20 दिन की फसल अवस्था पर आइसोप्रोट्यूरॉन 600 ग्राम तत्व का 600 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

सिंचाई-

ईसबगोल में चार सिंचाई को बुवाई के समय, बुवाई के 8 दिन, 35 दिन व 65 दिन बाद सिंचाई देने से अच्छी उपज प्राप्त होती है। ईसबगोल में क्यारी विधि की अपेक्षा फव्वारा विधि द्वारा छह सिंचाईयां (बुवाई के समय, बुवाई के 8, 20, 40, 55 व 70 दिनों बाद) तीन घण्टे  फव्वारा चलाने से अधिक उपज प्राप्त होती है।

कटाई मंडाई-

ईसबगोल में 25-125 तक कल्ले निकलते है तथा पौधों में 60 दिन बाद बालियाँ निकलना शुरू होती हैं और करीब 115-130 दिन में फसल पक कर तैयार हो जाती है। कटी हुई फसल को 2-3 दिन खलिहान में सुखाकर झड़का लें या बैलों द्वारा मंडाई कर निकाल लें।

उपज एवं उपयोगी भाग-

ईसबगोल की औसत उपज 9 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इसकी भूसी जिसकी मात्रा बीज के भार में 30 प्रतिशत होती है जो सबसे कीमती एवं उपयोगी भाग है, बाकी 65  से 70 प्रतिशत गोली, 3 प्रतिशत खली और 2 प्रतिशत खारी होती है।

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