किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

अश्विनी का अनुसरण कर धान से धनवान बनने की कोशिश

मालवा में धान की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा

 (विशेष प्रतिनिधि)।

31 अगस्त 2021, इंदौर । अश्विनी का अनुसरण कर धान से धनवान बनने की कोशिश – उज्जैन जिले की घटिया तहसील के ग्राम पिपलियाहमा के उन्नत कृषक श्री अश्विनी सिंह चौहान ने आमतौर पर पानी में पकने वाली धान की फसल के मिथक को तोड़ते हुए सीधे सीडड्रिल से बुवाई कर गत वर्ष भी अच्छा उत्पादन लिया था, जिससे प्रेरित होकर अब उज्जैन जिले के कई किसानों ने धान की खेती की तरफ रुख किया है। यही नहीं श्री चौहान ने मालवा में केला नहीं लगने की चुनौती को स्वीकारते हुए इस साल प्रयोग के तौर पर केले की जी-9 किस्म भी लगाई है।

राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के प्रमंडल सदस्य श्री अश्विनी सिंह चौहान ने कृषक जगत को बताया कि इस वर्ष 200 बीघा में धान की जवाहर 206 पूसा बासमती 1509 एवं पोहे की एक किस्म एमटीयू 1010 सीधे सीडड्रिल से लगाई है। इसके अलावा मक्का की शंकर कृष्ण पायनियर 3302 एवं अरहर की एक किस्म भीमा 154 जीआरजी भी लगाई है।

श्री चौहान दो वर्षों से धान की खेती कर अच्छी सफलता अर्जित कर रहे हैं। इनके गत वर्ष के उत्पादन को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मात्र 4 किसानों के लिए उज्जैन में उपार्जन केंद्र खोलकर समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। सोयाबीन में लगातार होते हुए घाटे को देखते हुए जिले की उज्जैन, तराना, बडऩगर, महिदपुर, घटिया तहसील के अलावा देवास जिले के कई गांवों के किसानों द्वारा इनके अनुभव को देखते हुए धान की करीब 6 से 7 हजार बीघा में इस वर्ष सीधे सीड ड्रिल से बुवाई की है।

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श्री चौहान ने बताया कि जवाहर 206 जो, जनेकृविवि की गत वर्ष जारी किस्म है, जिसकी सीधे सीडड्रिल से बुवाई की जाती है। यह 110 से 115 दिन में पकने वाली प्रजाति है, जो हार्वेस्टर से काटी जाती है। 8-10 क्विंटल/बीघा उत्पादन होता है। यदि इसका अच्छे से पोषण प्रबंधन किया जाए तो 10 से 15 क्विंटल प्रति बीघा तक का उत्पादन दे देती है। अभी 50 दिन की फसल हो गई है और बेहतर है। गर्मी प्रतिरोधी किस्म होने से कोई चिंता नहीं है। बारिश होने पर जिंक /नाइट्रोजन और फंजीसाइड का स्प्रे कर देंगे।

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धान की खेती फायदेमंद

श्री चौहान ने कहा कि सोयाबीन की तुलना में धान की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि इसके बीज का भाव 5200 से 6200 प्रति क्विंटल है। एक क्विंटल में 7 बीघा में बुआई हो जाती है। 750 रुपए प्रति बीघा बीज का खर्च आता है और ज्यादा तेज बारिश होने पर सडऩे का भी डर नहीं रहता। जबकि सोयाबीन बीज 30 किलो/बीघा लगता है। 100 रुपए किलो की दर से 3000/बीघा बीज और उपचार आदि का खर्चा डबल और नहीं उगने की जोखिम शत-प्रतिशत रहती है।

पोहा उद्योग के लिए तैयार माल

जेआर 206 और एमटीयू 1010 भी पोहा की प्रसिद्ध किस्म है। इसका पोहा और चिवड़ा बनवाया दोनो ही अच्छे बने हैं। इससे उज्जैन पोहा क्लस्टर को काफी समर्थन मिलेगा। पोहा फैक्ट्री वालों को जब यहीं कच्चा माल मिलेगा तो उन का ट्रांसपोर्ट का पैसा बचेगा और हमें अच्छा भाव मिलेगा।

श्री चौहान ने अलग-अलग किसानों के साथ 15 एकड़ में केले की खेती भी शुरू की है। स्वयं के यहां 2 एकड़ में केले की जी-9 किस्म लगाई है। अंतरवर्तीय फसल में खीरा लगाया है। जिसके अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है।

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