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मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में ई-कक्षाओं में पढ़ रहे हैं जनजातीय बच्चे

26 जुलाई 2024, भोपाल: मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में ई-कक्षाओं में पढ़ रहे हैं जनजातीय बच्चे – मध्यप्रदेश के जनजातीय बाहुल्य खरगोन जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे जनजातीय बच्चे स्मार्ट क्लासेस मतलब ई-कक्षाओं से ज्ञानार्जन कर अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। यहां ई-कक्षाओं के जरिये ऑनलाइन क्लासेस संचालित की जा रही है। इन ऑनलाइन क्लासेस में एक्सपर्ट टीचर्स बच्चों को सरल और सहज तरीके से पढ़ा रहे हैं और दुनिया में हो रहे नित नये नवाचारों की जानकारी भी दे रहे हैं। इन क्लासेस का लाभ जनजातीय कार्य विभाग द्वारा खरगोन जिले में चलाये जा रहे 64 हायर सेकेंडरी स्कूल्स में पढ़ रहे सभी विद्यार्थियों को मिल रहा है। विद्यार्थियों के प्रश्नों और जिज्ञासाओं के जवाब विषय विशेषज्ञों द्वारा बड़ी सटीकता से लेक्चर्स के दौरान दिये जा रहे हैं। खरगोन जिले के सुदूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को तो इन ऑनलाइन क्लासेस का सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है।

क्यूं चलाईं जा रही है ई-कक्षायें ?

ई-कक्षाओं के जरिये विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दी जा रही है। ई-कक्षाओं से शिक्षकविहीन शालाओं में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के अलावा सर्वश्रेष्ठ विषय विशेषज्ञों से लेक्चर्स दिलाकर परीक्षा के लिए उपयोगी प्रश्नों की तैयारी कराई जा रही है।

कैसे चलाईं जा रही हैं ई-कक्षायें ?

इस काम के लिए खरगोन जिले के एक्सपर्ट टीचर्स चुने गये हैं। निगरानी के लिए देवी अहिल्या उत्कृष्ट विद्यालय क्र. 01 खरगोन में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किये गये हैं। ई-कक्षाओ में कक्षा 10वीं के गणित, अंग्रेजी, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान तथा कक्षा 12वीं के लिए गणित, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान एवं अंग्रेजी की पढ़ाई कराई जा रही है। कठिन विषयों को सरल भाषा में पढ़ाया जा रहा है।

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ईं-कक्षाओं से विद्यार्थियों को लाभ

सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से पढ़कर विद्यार्थियों की विषयगत शंकाओं का त्वरित समाधान हो रहा है। इससे उन्हें प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी एवं उनमें चयन के अवसर भी मिलेंगे। जिन शालाओं में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं है, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को संबंधित विषय को समझने में बेहद आसानी होगी। बोर्ड परीक्षाओं में प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की भी बेहतर तरीके से तैयारी हो पायेगी। बच्चों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए स्किलफुल ट्रेनिंग दी जा रही है।

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