किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

मोहीपुरा की संत कृपा नर्सरी ने बनाई पहचान

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01 जून 2024, (दिलीप दसौंधी, मंडलेश्वर): मोहीपुरा की संत कृपा नर्सरी ने बनाई पहचान – किसी भी व्यवसाय को आरम्भ करने से पहले यदि उसकी चुनौतियों और समाधान की जानकारी ले ली जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है। नर्सरी के क्षेत्र में व्यावसायिक अनुभव लेने के बाद ग्राम मोहीपुरा (अंजड़ ) जिला बड़वानी के दो भाइयों श्री शिवम और श्री सत्यम विश्वकर्मा ने गांव में ही 2020 में नर्सरी शुरू की थी। पौधों की गुणवत्ता और अच्छे व्यवहार के कारण संत कृपा नर्सरी ने कम समय में न केवल क्षेत्र में पहचान स्थापित की है , बल्कि पौधों की अंतरप्रांतीय बिक्री की जा रही है।

सत्यम विश्वकर्मा

4 एकड़ में शेड नेट और 1 एकड़ में पॉली हाऊस – श्री सत्यम ने कृषक जगत को बताया कि 2016 में खंडवा जिले के डुलार फाटा की नर्सरी में नौकरी की , फिर 2019 में किराए से  ज़मीन लेकर वहीं नर्सरी शुरू की। जब अच्छा प्रतिसाद मिलने लगा तो अपने गृह गांव मोहीपुरा में 2020 में 4 एकड़ में शेड नेट और 1 एकड़ में पॉली हाऊस लगाया और नर्सरी में पौधे मिर्च, टमाटर ,तरबूज,खीरा ककड़ी,गिलकी ,करेला और गेंदा के पौधे तैयार कर जुलाई से बेचना शुरू किया। इसके अलावा उद्यानिकी विभाग के सहयोग से 2021  में 10X15 फीट आकार का 5  लाख की लागत का कोल्ड स्टोरेज भी लगाया गया है , जिस पर 50 % अनुदान मिला था। नर्सरी में  ट्रे में स्वचालित मशीन से पौधे तैयार किए जाते हैं। नर्मदा के पानी से सिंचित पौधों की गुणवत्ता अलग ही होती है। बैंगन का पौधा 1.30 रु, टमाटर का 1.70 रु और मिर्च का पौधा 1.90 रु प्रति नग की दर से बेचते हैं। एक एकड़ में साढ़े छः हज़ार पौधे लगते हैं। किसान अपनी ज़रूरत के हिसाब से पौधे खरीदते हैं।

एक सीजन में एक करोड़ पौधों की बिक्री – हमारी नर्सरी में 50 -70 स्थानीय /क्षेत्रीय लोगों को रोज़गार  मिल रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात में भी पौधे भेजे जा रहे हैं। एक सीजन में एक करोड़ पौधों की बिक्री हो जाती है। लागत खर्च निकालने के बाद भी अच्छा लाभ हो जाता है। यह सब संतों की कृपा है। इसलिए इसका नाम संतकृपा नर्सरी रखा गया है। हमारा परिवार धार्मिक और सेवाभावी है, जो ब्रम्हलीन संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के समय से जुड़े हुए हैं। श्री शिव हाई टेक सिटी,अंजड़ स्थित इस आश्रम के वर्तमान पीठाधीश श्री श्री योग चैतन्य स्वामी जी महाराज हैं। श्री सत्यम ने बताया कि पिताजी श्री ओमप्रकाश विश्वकर्मा विगत 17 वर्षों से नर्मदा परिक्रमा वालों की सेवा में लगे हुए हैं और उन्हें  तैयार भोजन उपलब्ध करवाते हैं। यात्रियों की आवास की व्यवस्था मंदिर और अन्य स्थान पर की जाती है।इस पुण्य लाभ को वह संतों की ही कृपा मानते हैं। संपर्क नंबर -9893637499  

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