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किसान की सफलता की कहानी

(प्रकाश दुबे)

3 जुलाई 2021, मंदसौर । काशीफल कम खर्च में अधिक मुनाफा – बागवानी फसलों में फसल परिवर्तन कर कम लागत में अधिक लाभ लिया जा सकता है। वैसे तो मंदसौर जिले में बागवानी में संतरा, मौसमी, नींबू, पपीता, अमरूद, फूलों के साथ ही लहसुन, औषधीय फसलों का भी कृषक उत्पादन करते हैं। जिले में कई कृषक बागवानी फसल लगाते हैं। उनमें से सबसे वरिष्ठ कृषक श्री सुभाष जैन हैं। इनका परिवार पिछले 70 वर्षों से बागवानी फसलों का उत्पादन कर रहा है। श्री जैन के पिता स्व. श्री मिश्रीलाल जी जैन (एलजी वाले) म.प्र. में कृषि पंडित के रूप में पहचाने जाते थे। इस कारण आधुनिक बागवानी फसल उत्पादन रग-रग में बसती है।

आज भी मन्दसौर के बाजार में बिकते अमरूद की गुणवत्ता के कारण एलजी वाले के बगीचे से पहचाने जाते हैं। इस वर्ष श्री सुभाष ने ढाई बीघा में मिर्ची का उत्पादन लेने के बाद मिर्च को दराते से काटकर उसके स्थान पर व्हीएनआर के कद्दू (काशीफल) के बीज के मार्च प्रथम सप्ताह में बो दिए। 250 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है अभी प्रतिदिन तुड़ाई प्रारंभ है। स्थानीय मंडी में 8/- रू. प्रति किलो तक विक्रय हो रहा है। एक कद्दू का वजन 8 से 12 किलोग्राम तक रहता है। ढाई बीघे में लगाई कद्दू फसल पर लगभग 30 हजार रु. लागत आई है। एक से डेढ़ लाख रू. की फसल होने की उम्मीद है। 62 वर्षीय एमकॉम शिक्षित श्री जैन क्रॉप रोटेशन (फसल परिवर्तन) अपनाते हैं एवं नई-नई तकनीकों का प्रयोग करते हैं अपनी 40 बीघा भूमि पर 5 बीघा में बागवानी फसलों का उत्पादन करते हैं।

वर्तमान में आपके बगीचे में 12 सौ अमरुद के पौधे, 5 बीघा में स्वीट कॉर्न मक्का शेष भूमि पर सोयाबीन चना, गेहूं आदि फसलों का उत्पादन लेते हैं। कृषि तकनीकों को समझने के लिए आपने विदेश में इजराइल एवं साउथ कोरिया के साथ देश के कई कृषि अनुसंधान-संस्थानों का भ्रमण किया है। इनके पुत्र श्री तनय जैन (बाली) ने भी कृषि व्यवसाय प्रारंभ कर अपनी पुश्तैनी कृषि परम्परा को आगे बढ़ाया है। अन्य जानकारी श्री सुभाष जैन के मो: 9425107451 पर ले सकते हैं।

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