उर्वरकों का उपयोग अभी भी असंतुलित क्यों ?

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

देश की राष्ट्रीय टिकाऊ खेती मिशन का प्रमुख घटक मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों की अनुशंसा कम लागत पर अधिक उत्पादन का आधार बन सकती है। संतुलित पोषक तत्व फसल को उपलब्ध कराने के लिए समय पर उर्वरकों की उपलब्धता भी आवश्यक है। इसके लिए एक दूरगामी क्रमबद्ध योजना की आवश्यकता होती है इसमें एक भी गलती फसल उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। किसानों को समय पर उत्प्रेरित कराना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। किसानों को यूरिया, डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश, सुपर फास्फेट तथा मिश्रित उर्वरकों की मुख्य रूप से आवश्यकता होती है।

देश के किसानों ने जहां वर्ष 2001-02 में 199.17 लाख टन यूरिया का उपयोग किया था और वर्ष प्रति वर्ष क्रमबद्ध बढ़कर वर्ष 2015-16 में 206.35 लाख टन तक पहुंच गया, परन्तु वर्ष 2016-17 में इसमें कुछ कमी देखी गई है और इसकी खपत घटकर 296.14 लाख टन रह गयी। जबकि इस वर्ष उत्पादन में कोई कमी नहीं देखी गई। खपत में यह कमी इसकी अनउपलब्धता के कारण हुई या इसका अन्य कारण था यह देखना होगा।

देश में डीएपी की खपत में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। डीएपी की सबसे कम खपत वर्ष 2002-03 में देखने को मिली जब इसकी खपत मात्र 54.73 लाख टन था। डीएपी की सबसे अधिक खपत वर्ष 2009-10, 2010-11 तथा 2011-12 में देखने को मिली जब इसकी खपत क्रमश: 104.92, 108.70 तथा 101.91 लाख टन थी। वर्ष 2016-17 में इसकी खपत 89.64 लाख टन तक ही पहुंच पाई।

म्यूरेट ऑफ पोटाश की इस शताब्दी में सबसे कम खपत वर्ष 2003-04 में थी जब इसका मात्र 18.41 लाख टन उपयोग किया गया। इसकी सबसे अधिक खपत 46.34 लाख टन वर्ष 2009-10 में हुई। वर्ष 2016-17 में इसके 28.63 लाख टन का उपयोग किसानों ने किया।

मिश्रण उर्वकों की खपत वर्ष 2003-04 में मात्र 47.57 लाख टन थी। यह वर्ष 2011-12 में बढ़कर 103.95 लाख टन तक पहुंच गई परन्तु इसकी खपत फिर इस स्तर को पार नहीं कर पाई। वर्ष 2016-17 में इसके 84.14 लाख टन का उपयोग फसल उत्पादन में किया गया।

देश में नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश के उपयोग का अनुपात जो वर्ष 2001-02 में क्रमश: 6.78 : 2.62 : 1.00 था वह वर्ष 2016-17 में भी 6.67 : 2.67: 1.00 रहा जो एक चिन्ता का विषय है।

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

nine − three =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।