ठंड में क्या खाएं और क्यों खाएं

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सर्दी सेहत बनाने का मौसम है। खूब सारे फल आते हैं, पाचन-शक्ति अच्छी होती है और खूब भूख भी लगती है। कहा जाता है कि इस मौसम में पत्थर भी पचाए जा सकते हैं।
जो लोग जिम जाकर बॉडी बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी यह मौसम बड़े काम का है। इस मौसम में स्वस्थ रहने और सर्दी से बचने के लिए बाहरी उपायों के अतिरिक्त हमारे यहां खान-पान पर भी जोर दिया जाता है। इस मौसम में सर्दी-जुकाम होने की आशंका ज्यादा रहती है, ऐसे में अपने शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक्सपर्ट अपने खाने में नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स को शामिल करने का सुझाव देते हैं। ठंड के मौसम में अपने खाने में आंवले को शामिल करें। सीधे नहीं खा सकते हैं तो या तो मुरब्बे के तौर पर या फिर किसी और तरह से हर दिन के खान-पान में इस्तेमाल करें। यदि आप डाइट चार्ट का पालन कर रहे हैं तो फिर आंवला मुरब्बा लेने की बजाय किसी और रूप में लें।
इसके साथ ही अजवाइन भी शरीर को गर्मी देने का अच्छा स्रोत है। इससे भी आप कोल्ड एंड फ्लू से बचाव कर सकते हैं। गुड़ और शहद भी सर्दियों के दिनों में अच्छा माना जाता है।
तिल्ली और गुड़ के लड्डू सर्दी से बचाव के लिए बेहतरीन उपाय माना जाता है। ठंड के मौसम में सूखे मेवे, बादाम आदि का सेवन भी लाभदायक होता है। या तो इन्हें भिगोकर खाएं या दूध में मिलाकर या फिर सूखे मेवों का दरदरा पावडर-सा बना लें और इसे दूध में मिलाकर प्रोटीन शेक-सा बना लें।
पारंपरिक तौर पर सर्दियों के लिए मेवे के लड्डू बनाए जाते हैं। आटे, बेसन या फिर उड़द या मूंग की दाल के आटे से लड्डू बनाए जाते हैं। गुजरात में उड़द की दाल के आटे से बने लड्डुओं को अड़दिया कहा जाता है, जबकि पंजाब में इन्हें दाल की पिन्नियों के नाम से जाना जाता है।
डाइट एक्सपर्ट यह मानते हैं कि सर्दियों में देशी घी का उपयोग किया जाना चाहिए। यदि आप किसी डाइट चार्ट को फालो नहीं कर रहे हैं तो घी इस मौसम में अच्छा रोग प्रतिरोधक माना जाता है। यदि आप शक्कर और घी से परहेज करते हैं तो मौसमी फलों का सेवन करें।
ताजी सब्जियों और मौसम के फलों के साथ गर्म दूध भी सर्दियों के लिए अच्छा माना जाता है।

सर्दी की धूप, निखारे सेहत और रूप

गुनगुनी धूप भला किसे नहीं सुहाती, लेकिन ये धूप सर्दियों में ही भाती है अन्य मौसम में नहीं। अगर हर मौसम में कुछ देर धूप की सिंकाई ली जाए तो सेहत की दृष्टि से लाभदायक होता है। सुबह खुले बदन 20 मिनट तक सूर्य किरणों में बैठकर हर ऋतु में स्वास्थ्य लाभ उठाया जा सकता है, जाड़े की ऋतु में सूर्य किरणें कुछ ज्यादा ही तन-मन को आनंदित करती हैं अत: इस मौसम का लाभ लेने से न चूकें।
भारतीय धर्म-दर्शन अनगिनत सदियों से सूर्य को जीवनदाता मानता आया है, किंतु अब वैज्ञानिक भी सूर्य की विलक्षण रोग-निवारक शक्तियों का लोहा मानने लगे हैं। सूर्य की किरणों में जीवाणुओं को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति है।
सूर्य किरणों में विटामिन-डी पाया जाता है, जो मानव शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक है। सूर्य और मानव हृदय का अटूट संबंध है। उनके अनुसार सौर-मंडल में तूफानों के आने के पहले पडऩे वाले दिल के दौरों की संख्या में तूफानों के आने के बाद चार गुना ज्यादा इजाफा हो जाता है।
शरीर में लौहतत्व की कमी, चर्मरोग, स्नायविक दुर्बलता, कमजोरी, थकान, कैंसर, तपेदिक और मांसपेशियों की रुग्णता का इलाज सूर्य किरणों के समुचित प्रयोग से किया जा सकता है, सूर्य किरणें बाहरी त्वचा पर ही अपना प्रभाव नहीं डालतीं, बल्कि वे शरीर के अंदरूनी अंगों में जाकर उन्हें स्वस्थ बनाने में कारगर भूमिका निभाती हैं।

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