परसी थाली चूहों से बचाएं

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8 मार्च 2021, भोपाल । परसी थाली चूहों से बचाएं – वर्तमान में खेतों में रबी फसलें विशेषकर गेहूं कटाई के लिये तैयार हो रहा है और यही वक्त है कि चूहों की फौज जो कि खेतों में रात्रिकाल में सक्रिय होकर हमारी परसी थाली पर हाथ मारने के लिये तैयार है। एक अनुमान के अनुसार हमारे देश में औसतन 15 चूहे प्रति एकड़ पाये जाते हैं इनकी अनुमानित संख्या लगभग 48 करोड़ है जो कि 8 करोड़ लोगों के हिस्से का अन्न खा जाते हैं या नष्ट करते रहते हैं।

बुद्धि के देवता गणेश का वाहन मूषक या चूहा एक चतुर चालाक एवं अत्यंत शक्की स्वभाव का स्तनधारी प्राणी है। वैज्ञानिक जगत में यह कुतरने वाला प्राणी रोडेंशिया वर्ग के अंतर्गत वर्गीकृत है। अनेक क्षमताओं के कारण यह जीव इतना सफल है और मानव जाति का भयंकर शत्रु है। खेत-खलिहान, भंडार और घरों में नुकसान करने के साथ ही प्लेग जैसी भयानक बीमारी का वाहक होने के कारण मूषक को महत्वपूर्ण पीड़क माना जाता है। सन् 1966 में पांसे द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में भंडारित अनाज की लगभग 2.5 प्रतिशत मात्रा चूहों द्वारा नष्ट कर दी जाती है। देवरस (1967) के अनुमान के अनुसार एक चूहा एक दिन में लगभग 26 ग्राम भोजन करता है जो कि मनुष्य के एक दिन के भोजन का 1/6 से 1/8 भाग है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार हमारे देश में कटाई उपरांत 25-30 प्रतिशत अनाज चूहों की भेंट चढ़ जाता है। चूहे अनाज को खाकर ही नष्ट नहीं करते अपितु वे अपने मल-मूत्र, बालों तथा अपने मृत शरीर द्वारा भी अनाज को प्रदूषित करते हैं। देवरस (1967) के द्वारा किये गये प्रयोग में पाया गया कि औसतन एक वयस्क चूहा वर्ष भर में लगभग 52 किलोग्राम भोजन करता है तथा लगभग 25000 लेंडिया छोड़ता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार चूहों द्वारा वर्ष भर में जितना अनाज क्षतिग्रस्त किया जाता है उससे विश्व भर में एक करोड़ तीस लाख मनुष्यों की भोजन आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। एक अन्य अनुमान के अनुसार छह चूहे एक मनुष्य की खुराक के बराबर अन्न खा जाते हैं। मूषक समस्त विश्व में पाये जाते हैं। तिब्बत के पठार में 18000 फीट की ऊंचाई पर भी इनकी उपस्थिति इन्हें सर्वाधिक ऊंचाई पर पाये जाने वाले स्तनधारी जीव की संज्ञा प्रदान करती है। भारत वर्ष में मूषकों की 118 प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें चूहे, गिलहरी, सेही आदि प्रमुख हैं।

क्षति करने की क्षमता के आधार पर खेत और भंडार में पाये जाने वाली प्रजातियों में घरेलू चूहा, चुहिया, भूरा चूहा, खेत का चूहा तथा भारतीय चूहा या बड़ी घूस प्रमुख हैं। घरेलू चूहा तथा चुहिया घरों में, भूरा चूहा बंदरगाहों में, खेत का चूहा या छोटी घूस खेत-खलिहान तथा भंडार गृहों में तथा बड़ी घूस रेल्वे स्टेशनों पर विशेष रूप से सक्रिय पाये जाते हैं। चूहों को मारने के लिये प्रलोभन/प्रपंच करना अत्यंत आवश्यक है। सक्रिय बिलों को देखकर दो रात फूले चने तथा बिना विष की गोलियां रखकर चूहों को प्रलोभन देना चाहिये तीसरी रात जिंक सल्फेट की 2.5 ग्राम मात्रा 100 ग्राम आटे में मिलाकर उसमें खाने का तेल, गुड़ इत्यादि डालकर गोलियां तैयार करें और बिल के पास डालें इसके अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। इसके अलावा खेतों में जगह-जगह छींद के गत्ते ठोककर उल्लू को बैठने की व्यवस्था करें ताकि रात्रिचर उल्लू चूहों को निपटा सकें। समय पर चूहों से निपटने का प्रयास प्रत्येक कृषक की जिम्मेदारी होना चाहिये।

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