फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन में सूखा पड़ा तो क्या करें? ICAR-NSRI ने मल्चिंग से सिंचाई तक बताए जरूरी उपाय  

09 अगस्त 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन में सूखा पड़ा तो क्या करें? ICAR-NSRI ने मल्चिंग से सिंचाई तक बताए जरूरी उपाय  – सोयाबीन की फसल में लंबे समय तक बारिश नहीं होने या सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-NSRI), इंदौर ने किसानों के लिए जरूरी सप्ताहिक सलाह जारी की है। संस्थान ने किसानों को मिट्टी में नमी बनाए रखने, जरूरत के अनुसार सिंचाई करने और फसल को सूखे के असर से बचाने के लिए कई उपाय अपनाने की सलाह दी है। वहीं, लगातार भारी बारिश की स्थिति में खेत में जलभराव से फसल को बचाने के लिए जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

15-20 दिन की फसल में करें डोरा/कुलपा

ICAR-NSRI के अनुसार लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर 15 से 20 दिन की सोयाबीन फसल में डोरा या कुलपा चलाकर निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। इससे मिट्टी में नमी को संरक्षित रखने में मदद मिलती है और सूखे के दौरान फसल को राहत मिल सकती है। इसके बाद 15 से 25 दिन की फसल में डोरा/कुलपा चलाने के बाद 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से फसल अवशेषों की मल्चिंग करने की सलाह दी गई है। फसल अवशेषों की परत मिट्टी की नमी को बनाए रखने में मदद करती है।

मिट्टी में दरार पड़ने से पहले करें सिंचाई

सूखे की स्थिति में फसल की जरूरत के अनुसार मिट्टी में दरारें पड़ने से पहले सिंचाई करना जरूरी है। किसान उपलब्ध संसाधनों के अनुसार स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई या पारंपरिक सिंचाई विधियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि सिंचाई का निर्णय फसल और मिट्टी की स्थिति को देखकर जरूरत के आधार पर लिया जाए, ताकि नमी की कमी से फसल पर प्रतिकूल असर न पड़े।

20-25 दिन की फसल में थायोयूरिया का छिड़काव

सूखे की स्थिति में 20 से 25 दिन की सोयाबीन फसल पर थायोयूरिया (Thiourea) का 750 पीपीएम घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए 750 मिलीग्राम थायोयूरिया प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार कर पर्णीय छिड़काव किया जा सकता है।

सूखे में पत्तियां पीली पड़ें तो क्या करें?

लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर मिट्टी में लोह तत्व की उपलब्धता कम होने से सोयाबीन की ऊपरी पत्तियों में नसों के बीच पीलापन (Interveinal Chlorosis) दिखाई दे सकता है। पर्याप्त बारिश होने के बाद यह समस्या अपने आप कम हो सकती है। यदि पत्तियों का पीलापन अधिक दिखाई दे, तो किसानों को 1 प्रतिशत फेरस सल्फेट + 0.2 प्रतिशत चूना का पर्णीय छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए प्रति लीटर पानी में 10 ग्राम फेरस सल्फेट और 2 ग्राम चूना मिलाकर फसल पर छिड़काव किया जा सकता है।

ज्यादा बारिश में जल निकासी जरूरी

ICAR-NSRI ने किसानों को लगातार भारी बारिश और अतिवृष्टि की स्थिति में भी फसल की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने को कहा है। खेत में पानी जमा होने से सोयाबीन की फसल को नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

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