चना बोने का सही समय क्या है और अगेती बुवाई से क्यों बचें? जानें कृषि विभाग की सलाह
23 अगस्त 2026, नई दिल्ली: चना बोने का सही समय क्या है और अगेती बुवाई से क्यों बचें? जानें कृषि विभाग की सलाह – चना रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है। इसकी अच्छी पैदावार के लिए बुवाई का सही समय बेहद महत्वपूर्ण है। जल्दबाजी में अगेती बुवाई करने से फसल में उकठा रोग का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। ऐसे में किसानों को चना बोने से पहले सही समय और जरूरी सावधानियों की जानकारी जरूर रखनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग ने चने की खेती के लिए मध्य अक्टूबर में बुवाई करने की सलाह दी है।
अगेती बुवाई से क्यों बढ़ता है उकठा रोग का खतरा?
कृषि विभाग के अनुसार अगेती बुवाई के समय तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इससे चने के पौधों में असामान्य वृद्धि होती है और उकठा रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इस रोग के कारण फसल की उपज में काफी कमी आ सकती है। इसलिए किसानों के लिए बुवाई का उचित समय अपनाना जरूरी है। उकठा रोग से प्रभावित पौधे शुरुआत में पीले पड़ने लगते हैं और बाद में मुरझाकर सूख जाते हैं। इसकी रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने रोग प्रतिरोधी किस्मों को अपनाने, गहरी जुताई करने और समय पर या देरी से बुवाई करने की सलाह दी है।
सही समय पर बुवाई से फसल को मिलेगा फायदा
चना बोने के लिए अच्छी जल निकास वाली दोमट और रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी गई है। विभाग के अनुसार खेत को गेहूं की तरह बहुत ज्यादा तैयार करने की जरूरत नहीं होती और सामान्य तौर पर 1-2 जुताई पर्याप्त रहती हैं। किसानों को चने की बुवाई के दौरान बीज की उचित गहराई का भी ध्यान रखना चाहिए। विभाग ने विभिन्न किस्मों के लिए करीब 10 से 12.5 सेंटीमीटर गहराई पर बीज डालने की सलाह दी है। कम गहराई पर बुवाई करने से भी उकठा रोग का खतरा बढ़ सकता है।
सिंचाई का भी रखें ध्यान
यदि बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी हो और सर्दियों में एक-दो बारिश हो जाए तो चने की फसल को सामान्यतः सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो तो फूल आने और फलियां बनने के समय सिंचाई करने की सलाह दी गई है। इसलिए चने की खेती करने वाले किसानों के लिए सही समय पर बुवाई करना जरूरी है। मध्य अक्टूबर में बुवाई करने से अगेती बुवाई के कारण होने वाली समस्याओं से बचने और बेहतर फसल उत्पादन में मदद मिल सकती है।
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