स्वीट कॉर्न (भुट्टा) और फील्ड कॉर्न में क्या अंतर है?
एक गलत कौर से शुरू हुई समझ
18 नवंबर 2025, नई दिल्ली: स्वीट कॉर्न (भुट्टा) और फील्ड कॉर्न में क्या अंतर है? – सुबह का समय था और मैं मध्य भारत के एक शांत मक्का खेत में चल रहा था। हवा ठंडी थी और खेत चारों ओर फैले हुए थे। जिज्ञासा में मैंने एक भुट्टा तोड़ा, उसका छिलका हटाया और यह सोचकर एक कौर ले लिया कि यह वही मीठा मक्का होगा जो हम अक्सर खाते हैं।
लेकिन जैसे ही दांत लगे, उम्मीद का वो कुरकुरापन नहीं मिला। दाने सख्त थे और बिल्कुल बेस्वाद। पास ही खड़े किसान ने मुस्कुराते हुए कहा, “वो खाने वाला भुट्टा नहीं है। ये जानवरों के लिए होता है। इसे फीड कॉर्न या लाइवस्टॉक कॉर्न कहते हैं।”
उसी पल से समझ की एक नई कहानी शुरू हुई कि दिखने में एक जैसे लगने वाले दो मक्के कितने अलग हो सकते हैं।
स्वीट कॉर्न, जिसे हम रोजमर्रा में खाते हैं
स्वीट कॉर्न वह किस्म है जिसे हम उबालकर, भूनकर, या सलाद और सूप में स्वाद के साथ खाते हैं। इसका असली कारण यह है कि इसे तब काटा जाता है जब दाने कच्चे, नरम और रसदार होते हैं। इस अवस्था में मक्के के दानों में मौजूद शर्करा स्टार्च में नहीं बदली होती, इसलिए इसका स्वाद मीठा लगता है।
स्वीट कॉर्न देखने में छोटा होता है, इसके दाने हल्के पीले और भरे हुए होते हैं, और इसकी खुशबू भी अलग होती है। ताज़गी जल्दी खत्म होने के कारण इसे सही समय पर ही तुड़वाना पड़ता है, तभी इसकी मिठास बनी रहती है।
बहुत से देशों की तरह भारत में भी स्वीट कॉर्न अब घरों, होटल-रेस्टोरेंटों, स्ट्रीट फूड और पैक्ड फूड्स का अहम हिस्सा बन चुका है। यह स्वाद के लिए उगाया जाता है, न कि बड़े पैमाने पर स्टोरेज या प्रोसेसिंग के लिए।
फील्ड कॉर्न, जो इंसानों से ज्यादा जानवरों के काम आता है
जिस भुट्टे को मैंने गलती से खा लिया था, वह असल में फील्ड कॉर्न था, जिसे डेंट कॉर्न, फीड कॉर्न या लाइवस्टॉक कॉर्न भी कहा जाता है। इस किस्म को पौधे पर पूरी तरह पकने दिया जाता है। दाने सख्त, सूखे और स्टार्च से भरे होते हैं। छिलका भूरा हो जाता है और भुट्टा हल्का और सूखा महसूस होने लगता है।
यह मक्का इंसानों के लिए सीधे खाने योग्य नहीं होता। इसका सबसे बड़ा इस्तेमाल गाय-भैंस, सूअर, मुर्गियों और मछलियों के चारे में होता है। इसके अलावा यह एथेनॉल बनाने, कॉर्न ऑयल तैयार करने, कॉर्न स्टARCH, बायोफ्यूल, चिपकने वाले पदार्थों, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग और हजारों औद्योगिक उत्पादों में उपयोग होता है।
इसका पौधा ऊंचा और मजबूत होता है। दाने कठोर होते हैं और पूरी तरह सूखने पर ऊपर से हल्की सी गड्ढानुमा आकृति बना लेते हैं। इसे कच्चा खाने की कोशिश करना पत्थर चबाने जैसा अनुभव देता है।
दोनों मक्के का उद्देश्य बिल्कुल अलग
दूर से ये फसलें एक जैसी दिख सकती हैं, लेकिन असल में दोनों की खेती का तरीका, उपयोग और बाजार पूरी तरह अलग होते हैं।
स्वीट कॉर्न स्वाद के लिए उगाया जाता है। फील्ड कॉर्न जरूरतों के लिए।
स्वीट कॉर्न सीधे लोगों की प्लेट तक आता है। फील्ड कॉर्न जानवरों का चारा बनता है, वाहनों में ईंधन बनकर जाता है, और कई उद्योगों का आधार बनता है। नाश्ते के सीरियल्स, बेकरी आइटम्स, स्नैक्स, थिकनर, कॉस्मेटिक्स—इन सबमें कहीं न कहीं फील्ड कॉर्न शामिल रहता है, बस दिखाई नहीं देता।
एक छोटी-सी गलती से मिली बड़ी सीख
खेत से निकलने से पहले किसान ने मुझे अपने घर के पास की छोटी ज़मीन से ताज़ा स्वीट कॉर्न तोड़कर दिया। पहला कौर लेते ही फर्क साफ समझ आ गया। मिठास, नरमी और स्वाद वही था जिसे हम रोज पहचानते हैं।
सुबह की मेरी उस एक गलती ने दो मक्कों के बीच का अंतर इतनी आसानी से समझा दिया—एक हमारी प्लेटों के लिए, दूसरा दुनिया की जरूरतों के लिए।
दोनों जरूरी हैं, लेकिन दोनों की दुनिया एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।
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