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फसल की खेती (Crop Cultivation)

VL-400 रागी वैरायटी: 100 दिन में तैयार होगी फसल, 35 क्विंटल तक मिलेगा उत्पादन

28 जून 2026, नई दिल्ली: VL-400 रागी वैरायटी: 100 दिन में तैयार होगी फसल, 35 क्विंटल तक मिलेगा उत्पादन – देशभर में मोटे अनाज (श्री अन्न) की बढ़ती मांग के बीच किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ रागी की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। रागी, जिसे फिंगर मिलेट या मडुआ के नाम से भी जाना जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि किसान इस खरीफ सीजन में रागी की खेती करना चाहते हैं, तो VL-400 वैरायटी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। यह किस्म कम समय में तैयार होने के साथ अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।

VL-400 वैरायटी क्यों है खास?

VL-400 रागी की एक उन्नत और बायो-फोर्टिफाइड किस्म है, जिसे आईसीएआर-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-VPKAS), अल्मोड़ा ने विकसित किया है।

यह किस्म अपनी अधिक उत्पादन क्षमता, जल्दी पकने और रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती है। इसकी फसल करीब 98 से 102 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में इससे 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

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ऑनलाइन खरीद सकते हैं बीज

किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) अपनी ऑनलाइन स्टोर के माध्यम से VL-400 रागी बीज उपलब्ध करा रहा है। किसान घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर कर बीज मंगवा सकते हैं और खरीफ सीजन की बुवाई समय पर शुरू कर सकते हैं।

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वर्तमान में 5 किलोग्राम का पैकेट 20 प्रतिशत छूट के साथ 400 रुपये में उपलब्ध है, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उचित कीमत पर मिल सकता है।

रागी की बढ़ रही है मांग

पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा श्री अन्न (मोटे अनाज) को बढ़ावा दिए जाने के बाद रागी की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। पोषण से भरपूर होने के कारण इसकी मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ खाद्य उद्योग में भी बढ़ रही है।

रागी में कैल्शियम, आयरन, फाइबर और अन्य आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

कैसे करें रागी की खेती?

रागी की खेती के लिए जून-जुलाई का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली भूमि बेहतर रहती है। खेत में पानी का ठहराव फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

बुवाई के लिए ड्रिल विधि सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इससे पौधों का समान विकास होता है और उत्पादन बेहतर मिलता है। हालांकि, किसान समतल खेत में छिड़काव विधि से भी बुवाई कर सकते हैं।

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