सोयाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह

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26 अगस्त 2021, इंदौर । सोयाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह – भाकृअनुप भारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान, इंदौर ने सोयाबीन कृषकों को फसल की देखरेख के लिए, पौध संरक्षण के लिए और रोगों पर निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। कृषक जगत के सुधी पाठकों के लिए बिंदुवार यह सलाह प्रकाशित की जा रही है, किसान भाई इन सलाह को ध्यानपूर्वक पढक़र इसे अपनाएं।

फलियां टूटने पर
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    सोयाबीन की शीघ्र पकने वाली किस्म जेएस 9560 95-60 की बोवनी जून के द्वितीय सप्ताह में हुई है, सबसे पहले परिपक्वता के लिए अग्रसर हैं। ऐसी स्थिति में सोयाबीन की फलियां टूटकर/कटकर गिरने के समाचार प्राप्त हुए हंै जो कि प्राथमिक तौर पर चूहे के आक्रमण से प्रतीत होता है। कृषकों को सलाह है कि चूहे के प्रबंधन हेतु बाजार में उपलब्ध विष प्रलोभक (पॉइजन बेट) जैसे बिस्कुट /केक आदि या जि़ंक फास्फाइड मिले आटे की गोलियों को खेत के मेड़/चूहे के बिल के पास रखें।
  • सोयाबीन की फसल में फूल लगने की अवस्था है। इल्लियों द्वारा फूलों को खाने से अफलन की स्थिति से बचाने हेतु सलाह है कि लेम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 4.90 सीएस (300 मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8 ईसी (333 मिली/हे.) या फ्लू बेन्डियामाइड 39.35 एससी (150 मिली/हे.) या स्पायनेटोरम 11.7 एससी 450 मिली या क्लोर एन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें।
  • कुछ क्षेत्रों में सफ़ेद सुंडी (व्हाइट ग्रब) का प्रकोप देखा गया है। उसके नियंत्रण हेतु सलाह है कि क्लोरोपायरीफॉस 2.5 प्रतिशत दानेदार) दवा को 16 किग्रा/हे. की दर से रेत के साथ मिलाकर कतारों के बीच में छिडक़ें।
    सोयाबीन की फसल में पक्षियों के बैठने हेतु ‘ञ्ज‘ आकार के बर्ड पर्चेस लगाएं। इससे कीट भक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है।
  • किसी भी प्रकार का कृषि आदान क्रय करते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल लें जिस पर बैच नम्बर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट लिखी हो।
चक्र भृंग का नियंत्रण
  • चक्र भृंग के नियंत्रण हेतु थायक्लोप्रिड 21.7 एससी 750 मिली/हे. या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी (1250 मिली/.हे ) या इमामेक्टिन बेंजोएट (425 मिली/हे.) का 500 लीटर पानी के साथ 1 हेक्टेयर में छिडक़ाव करें। यह भी सलाह दी जाती है कि इसके फैलाव की रोकथाम हेतु प्रारम्भिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित भाग को तोडक़र नष्ट कर दें।
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    चक्र भृंग या पत्ती खाने वाली इल्लियों के एक साथ नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक नोवाल्युरौन+ इंडोक्साकार्ब (850 मिली/हे. या बीटासाइफ्लूथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे.) या पूर्व मिश्रित थायमिथोक्सम़+ लैम्बडासायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें। इनके छिडक़ाव से तनामक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है।
चने की इल्ली
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    जहाँ पर केवल चने की इल्ली (हेलिकोवर्पा आर्मीजेरा) का प्रकोप है, इसके नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप (हेलील्युर) लगाएं तथा अनुशंसित कीटनाशक लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 4.90 सीएस (300 मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब15.8 ईसी (333 मिली/हे.) या फ्लूबेन्डियामाइड 39.35 एससी (150 मिली/हे.) या क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल18.5 एससी (150 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें।
 
तना मक्खी
  • जिन क्षेत्रों में तनामक्खी का प्रकोप है, इसके नियंत्रण हेतु बीटासायफ्लूथ्रिन+ इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे.) या पूर्व मिश्रित थायोमिथोक्सम़ + लैम्बडा-सायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे.) का छिडक़ाव करें।
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    कुछ क्षेत्र की सोयाबीन फसल में एन्थ्रेक्नोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे फफूंदजनित रोगों के लक्षण देखे गए हैं। इसके नियंत्रण हेतु सलाह है कि टेबूकोनाज़ोल (625 मिली /हे.) या टेबूकोज़ोल+सल्फर (1 किग्रा/हे.) या पायरोक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्लूजी (500 ग्राम/हे.) या पायरोक्लोस्ट्रोबीन+ इपोक्सिकोनाज़ोल (750 मिली/हे.) या फ्लूक्सापायरोक्साइड (300 मिली/हे.) या टेबूकोनाज़ोल+ ट्रायफ्लोक्सीस्ट्रोबीन 350 ग्रा / हे. का छिडक़ाव करें।
पीला मोजेक वायरस
  • कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर कहीं-कहीं पीला मोजेक वायरस या कहीं-कहीं सोयाबीन मोजेक वायरस के लक्षण देखे गए हैं। पीला मोजेक वायरस से ग्रसित पौधों में सोयाबीन की ऊपरी पत्तियों पर पीले रंग के चितकबरे पीले-हरे धब्बे बनते है। पत्तियों का यह पीलापन धीरे-धीरे बढक़र फैलने लगता है तथा पत्तियां सिकुडक़र कर टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं। इसको अन्य स्वस्थ पौधों पर फ़ैलाने के लिए सफ़ेद मक्खी वाहक का कार्य करती है। जबकि सोयाबीन मोजेक वायरस में सोयाबीन की ऊपरी पत्तियां चमड़े के जैसी होकर गहरे हरे रंग में परावर्तित होती हैं इस बीमारी को अन्य स्वस्थ पौधों पर फ़ैलाने के लिए माहू (एफिड) वाहक का कार्य करते हैं।

इन दोनों वायरस जनित रोगों के नियंत्रण हेतु सलाह है कि प्रारम्भिक अवस्था में ही ग्रसित पौधों को उखाडक़र तुरंत खेत से निष्कासित करें तथा सफ़ेद मक्खी व एफिड जैसे रस चूसने वाले इन वाहक कीटों के नियंत्रण हेतु अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं। यह भी सलाह है कि रोग- वाहकों की रोकथाम हेतु अनुशंसित पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथोक्सम+ लैम्ब्डासायहेलोथ्रिन (125 मिली/हे.) या बीटासायफ्लूथ्रिन+ इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/ हे.) का छिडक़ाव करें। (इन दवाओं के छिडक़ाव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया सकता है।

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