फसल की खेती (Crop Cultivation)

आलू की फसल को बर्बाद कर सकते हैं ये 8 रोग, पत्तों पर धब्बे दिखें तो तुरंत करें ये काम; जानें नियंत्रण के तरीके  

17 अगस्त 2026, नई दिल्ली: आलू की फसल को बर्बाद कर सकते हैं ये 8 रोग, पत्तों पर धब्बे दिखें तो तुरंत करें ये काम; जानें नियंत्रण के तरीके  – आलू की फसल में कई तरह के रोग उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। अगेता और पछेता झुलसा, फोमा झुलसा, कॉमन स्कैब, ब्लैक स्कर्फ, पाऊडरी स्कैब, बैक्टीरियल विल्ट और विषाणु रोग जैसे रोग फसल और कंदों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय रहते इनके शुरुआती लक्षणों की पहचान कर उचित नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके। हिमाचल प्रदेश कृषि विभाग ने इन रोगों के लक्षण और नियंत्रण के लिए किसानों को जरूरी सलाह दी है।

अगेता झुलसा

अगेता झुलसा रोग में आलू की पत्तियों पर गोल चक्र के रूप में भूरे धब्बे बनने लगते हैं। बीमारी का प्रकोप अधिक होने पर पत्ते जल्दी गिर सकते हैं। रोग के लक्षण दिखाई देते ही जिनेव/मेन्कोजेब (डाईथेन जैड-78/इंडोफिल जैड-78) 0.2 प्रतिशत, डाईथेन एम-45/इंडोफिल एम-45 0.2 प्रतिशत या मैटामिल 0.25 प्रतिशत (मैटालैक्सिल 8% + मैन्कोजेब 64%) का 15 दिन के अंतर पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

अगेता झुलसा और सरकोस्पोरा पत्ता धब्बा रोग के लक्षण दिखाई देने पर या बिजाई के 40 दिन बाद प्रोपिनेब (एन्ट्राकोल 75 डब्ल्यू.पी.) 0.25 प्रतिशत का छिड़काव करें। इसके बाद 15 दिन के अंतर पर एक और छिड़काव किया जा सकता है।

पछेता झुलसा

पछेता झुलसा में पत्तियों पर छोटे काले धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं। कुछ दिनों में पूरा पौधा प्रभावित होकर मर सकता है। लगातार बारिश होने की स्थिति में इससे उपज में काफी कमी आ सकती है। इससे बचाव के लिए स्वस्थ बीज का इस्तेमाल करें और खेत में ऊंची मेढ़ें बनाएं, ताकि मिट्टी में मौजूद आलू बीमारी की चपेट में न आएं। रोग दिखाई देने पर रिडोमिल एम. जैड. 72 डब्ल्यू.पी. या मैटामिल 0.25 प्रतिशत (मैटालैक्सिल 8% + मैन्कोजेब 64%) का 15 दिन के अंतर पर दो बार छिड़काव करें। इसके बाद इंडोफिल एम-45 0.25 प्रतिशत का 7 दिन के अंतर पर चार छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

फोमा झुलसा

फोमा झुलसा का शुरुआती लक्षण पत्तियों पर छोटे और गोल बिंदुओं जैसे धब्बे बनना है। रोगग्रस्त हिस्से के चारों ओर पीलापन दिखाई देता है। इसके बाद भूरे से गहरे भूरे रंग की धारियों वाले गोल धब्बे बनने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए अगेता और पछेता झुलसा रोगों की तरह ही नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

कॉमन स्कैब

कॉमन स्कैब रोग में आलू का छिलका खराब हो जाता है और उस पर गहरे छेद बनने लगते हैं। कंदों पर भूरे से काले रंग के कार्क जैसे धब्बे दिखाई देते हैं। इससे बचाव के लिए स्वस्थ और रोग रहित बीज का इस्तेमाल करें। बिजाई के समय बीज वाले आलुओं को थीरम के 0.25 प्रतिशत घोल में 30 मिनट तक उपचारित करें। इसके लिए 25 ग्राम थीरम को 10 लीटर पानी में मिलाने की सलाह दी गई है। किसान खाद के स्थान पर अमोनियम सल्फेट खाद का प्रयोग कर सकते हैं।

ब्लैक स्कर्फ

आलू की फसल को बर्बाद कर सकते हैं ये 8 रोग, पत्तों पर धब्बे दिखें तो तुरंत करें ये काम; जानें नियंत्रण के तरीके  

पाऊडरी स्कैब

पाऊडरी स्कैब के शुरुआती चरण में आलुओं पर उभरी हुई कील जैसी संरचनाएं दिखाई देती हैं। बाद में इनमें गड्ढे या छेद बन जाते हैं और इनके अंदर फफूंद भर जाती है, जो पतले छिलके से घिरी रहती है। रोग से बचाव के लिए स्वस्थ बीज का प्रयोग करें और रोगग्रस्त खेत में आलू की फसल न लगाएं। बिजाई से पहले बीज को थीरम के 0.25 प्रतिशत घोल में 30 मिनट तक उपचारित करने की सलाह दी गई है।

बैक्टीरियल विल्ट

इस रोग में पौधे और पत्तियां मुरझाकर नीचे की ओर झुकने लगती हैं। बाद में पूरा पौधा मुरझा जाता है और आलू के अंदर भूरापन दिखाई देने लगता है। बचाव के लिए मक्का और अन्य फसलों के साथ फसल चक्र अपनाएं। बिजाई के समय मेढ़ों पर मिट्टी अच्छी तरह चढ़ाएं और रोग रहित बीज का इस्तेमाल करें।

विषाणु रोग (PVY)

विषाणु रोग में पत्तियों के हरे रंग के बीच हल्के भूरे धब्बे बनने लगते हैं। पत्तियों पर हल्के निर्जीव धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं और पौधों की बढ़वार प्रभावित होकर वे छोटे रह जाते हैं। इससे बचाव के लिए प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करें। फसल में 750 मिलीलीटर मिथाइल डेमिटान (मैटासिस्टाक्स 25 ई.सी.) को 750 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जहां तक संभव हो, मध्य अगस्त तक फसल के ऊपर के भागों को काट देने की भी सलाह दी गई है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture