Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

गेहूं की हाई यील्ड किस्म DBW 327 गर्मी और सूखे में भी देगी बंपर उपज, जानिए इसकी खासियत

12 नवंबर 2025, नई दिल्ली: गेहूं की हाई यील्ड किस्म DBW 327 गर्मी और सूखे में भी देगी बंपर उपज, जानिए इसकी खासियत – ICAR-IIWBR, करनाल ने गेहूं की नई किस्म DBW 327 (करण शिवानी) विकसित की है, जो किसानों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। यह किस्म खास तौर पर गर्मी और सूखे के मौसम में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम है। DBW 327 न केवल उच्च उपज देती है, बल्कि इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है। इसके दानों में जिंक और लौह जैसे पोषक तत्व भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो पोषण में इसे बेहतर बनाते हैं। यह किस्म मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त मानी जा रही है और किसानों के लिए भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है।

उपज और क्षमता:

DBW 327 की औसत उपज 79.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो अन्य लोकप्रिय किस्मों HD 2967 और HD 3086 से क्रमशः 35.3% और 13.6% अधिक है। इसकी अधिकतम पैदावार क्षमता 87.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है, जिससे यह कठिन मौसम में भी भरोसेमंद विकल्प बनती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता:

यह किस्म स्ट्राइप रस्ट और लीफ रस्ट सहित प्रमुख रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इसके अलावा, इसमें करनाल बंट रोग के खिलाफ भी बेहतर प्रतिरोध पाया गया है, जिससे फसल अधिक सुरक्षित रहती है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

पोषण और दानों की गुणवत्ता:

DBW 327 के दानों में जिंक की मात्रा 40.6 ppm और लौह की मात्रा 39.4 ppm है। इसके दानों की गुणवत्ता भी बेहतरीन है – दानों का रूप स्कोर 6.4, चपाती स्कोर 7.67, और ब्रेड क्वालिटी स्कोर 6.58/10 है। इसका उच्च ग्लूटन कंटेंट इसे चपाती, बिस्कुट और ब्रेड जैसे उत्पादों के लिए उपयुक्त बनाता है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

कहाँ उगाई जा सकती है:

यह किस्म मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी क्षेत्रों में उगाई जा सकती है – पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान (कोटा और उदयपुर डिवीजन को छोड़कर), पश्चिमी उत्तर प्रदेश (झांसी डिवीजन को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर (जम्मू और कठुआ), हिमाचल प्रदेश (ऊना और पांवटा घाटी), और उत्तराखंड (तराई क्षेत्र)।

बुआई और कृषि प्रबंधन:

1. सिंचित क्षेत्रों में बुआई: 20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक।
2. बीज दर: 100 किग्रा/हेक्टेयर, पंक्तियों के बीच 20 सेमी।
3. खाद: उच्च उर्वरता वाली भूमि के लिए एन:150, पी:60, के:40 किग्रा/हेक्टेयर।
4. सिंचाई: 5-6 बार, पहली सिंचाई बुआई के 20-25 दिन बाद।
5. रोग और कीट प्रबंधन: माहू या चेपा के लिए इमिडाक्लोपरिड, दीमक के लिए फिप्रोनिल का प्रयोग।

DBW 327 किसान को न केवल बंपर पैदावार देती है, बल्कि गुणवत्ता और पोषण में भी उत्कृष्ट है। गर्मी, सूखा और रोगों के प्रति सहनशीलता इसे मजबूत और भरोसेमंद फसल विकल्प बनाती है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture