फसल की खेती (Crop Cultivation)

औषधीय फसल लगाने वाले प्रगतिशील किसान हुए पुरस्कृत

  • (इंदौर कार्यालय)

30 अगस्त 2022, इंदौर  औषधीय फसल लगाने वाले प्रगतिशील किसान हुए पुरस्कृत – कृषि के क्षेत्र में यदि नवाचार किए जाएं तो न केवल अच्छा उत्पादन मिलता है, बल्कि किसानों के ऐसे कार्यों का सरकार की ओर से मूल्यांकन भी किया जाता है,जो पुरस्कार और सम्मान के रूप में किसान को मिलता है। इससे प्रयोगकर्ता किसान का तो उत्साहवर्धन होता ही है, अन्य किसान भी प्रेरणा लेते हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर कई किसानों को सम्मानित किया गया। कृषक जगत ने ऐसे तीन चुनिंदा किसानों से चर्चा की, जिन्होंने औषधीय फसलों में नवाचार कर पुरस्कार और सम्मान अर्जित किया।Jitendra--Patidar

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ग्राम सिमरोल तहसील महू जिला इंदौर के उन्नत कृषक श्री जितेंद्र पिता लेखराज पाटीदार को हल्दी फसल में नवाचार के रूप में ढेंचा का प्रयोग करने के लिए 15 अगस्त को जिला प्रशासन द्वारा राज्य स्तरीय सर्वोत्तम कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। श्री पाटीदार ने बताया कि वे विगत 5 वर्षों से हल्दी की खेती कर रहे हैं। पिछले 3 वर्ष से संशोधन करके नवाचार के रूप में हल्दी की मुख्य फसल के साथ ढेंचा की सह फसल भी ले रहे हैं।

इस वर्ष लगभग 5 बीघे में हल्दी की 6 किस्में अपने खेत पर लगाई है, जो महाराष्ट्र, लखनऊ और असम से बुलाई गई है। श्री पाटीदार ने कहा कि हल्दी फसल को न्यूट्रीशन की बहुत आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति गोबर से निर्मित कंपोस्ट खाद से करना बहुत महंगा पड़ता है। इसलिए हल्दी की दो कतारों (24 इंच) के बीच में ढेंचा को लगाया। लगभग 42 दिन के भीतर इसे उखाड़ कर फसलों के बीच मल्च कर दिया। इसके जो परिणाम मिले वह संतुष्टि दायक थे। मल्चिंग की तरह बिछाया गया ढेंचा जब पानी के साथ सडऩे लगा तब भारी मात्रा में केंचुए व मित्र कीटों की बढ़ोतरी हुई। इससे हल्दी की फसल को सभी पोषक तत्व प्राकृतिक तरीके से बगैर कोई रसायन डाले मिलने लगे। इस विधि से ना तो खरपतवारनाशी दवाइयों का उपयोग करना पड़ा और ना ही कीटनाशक दवाई का। इस प्रयोग को कृषि वैज्ञानिकों व कृषि अधिकारियों द्वारा भी सराहा गया। अब वे हल्दी को प्रसंस्करित कर पाउडर के रूप में अपने ब्रांड शगुन नेचुरल के नाम से पैक कर उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रहे हैं।

Jivansingh-Parmar

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प्रगतिशील कृषक श्री जीवनसिंह परमार ग्राम भोंडवास तहसील सांवेर जिला इंदौर ने नवाचार के रूप में पहली बार अश्वगंधा की फसल लेने और लाभ अर्जित करने के उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। श्री परमार ने बताया कि उन्होंने पहली बार अश्वगंधा की फसल लेने के लिए नीमच से 5 किलो बीज बुलवाया था। अक्टूबर 2020 में बुवाई की गई। फसल के पकने तक आत्मा इंदौर की ओर से समय-समय पर सलाह और मार्गदर्शन मिलता रहा। जिससे 5 क्विंटल से अधिक अश्वगंधा का उत्पादन हुआ। अश्वगंधा का सर्वाधिक भाव 34800 रु क्विंटल मिला, जबकि भूसा 2001 रुपए क्विंटल बिका। अश्वगंधा की कुल बिक्री 1,82,745 रुपए की हुई जिसमें से कुल लागत खर्च के 38630 रुपए घटाने पर कुल 1,44,115 रुपए का शुद्ध लाभ हुआ।

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प्रगतिशील किसान श्री कमलाशंकर विश्वकर्मा नीमच जिले की मनासा तहसील के ग्राम भाटखेड़ी के निवासी हैं। श्री विश्वकर्मा औषधीय फसलों की खेती के साथ-साथ जैव विविधता के क्षेत्र में भी नवाचार कर रहे हैं। जिला प्रशासन नीमच द्वारा श्री विश्वकर्मा को जैव विविधता के क्षेत्र में औषधीय फसलों के साथ साथ राष्ट्रीय बांस मिशन में उत्कृष्ट उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। श्री विश्वकर्मा ने बताया कि करीब 30-40 प्रकार की औषधियों को प्राकृतिक रूप से संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है। खेत पर कौंच बीज (केमच), वराहीकंद (जटाशंकरी), गिलोय, नीली एवं सफेद अपराजिता, एलोवेरा, आंवला, बहेड़ा, अरंडी, ईमली, नीम, सीताफल आदि औषधियां वर्तमान में देखी जा सकती है। राष्ट्रीय बाँस मिशन के तहत 1100 पौधे बाँस के भी लगा रखे हैं।

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