सोयाबीन में फसल उगने के बाद (Post-Emergence–PoE) खरपतवारनाशक: सही समय पर सही छिड़काव से बचाएं उपज
07 जुलाई 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन में फसल उगने के बाद (Post-Emergence–PoE) खरपतवारनाशक: सही समय पर सही छिड़काव से बचाएं उपज – सोयाबीन की खेती में खरपतवार नियंत्रण केवल बुवाई पूर्व (PPI) या बुवाई के तुरंत बाद (PE) किए गए छिड़काव तक सीमित नहीं रहता। कई बार पर्याप्त वर्षा नहीं होने, मिट्टी में नमी की कमी, खरपतवारों के चरणबद्ध अंकुरण या विभिन्न प्रकार के खरपतवारों की मौजूदगी के कारण कुछ खरपतवार प्रारंभिक नियंत्रण से बच जाते हैं। यदि इन्हें समय रहते नियंत्रित नहीं किया जाए तो यही खरपतवार फसल की वृद्धि, शाखाओं के विकास तथा फलियों के निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में पोस्ट-इमर्जेंस (Post-Emergence–PoE) खरपतवारनाशक किसानों के लिए सबसे प्रभावी विकल्प बनकर सामने आते हैं। इनका उपयोग तब किया जाता है जब फसल तथा खरपतवार दोनों खेत में दिखाई देने लगते हैं। चूंकि ये खरपतवारों की बढ़ती हुई अवस्था पर सीधे कार्य करते हैं, इसलिए इनके छिड़काव का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। छोटे एवं सक्रिय रूप से बढ़ रहे खरपतवारों पर इनका प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है, जबकि बड़े हो चुके खरपतवारों पर नियंत्रण अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है।
आईसीएआर–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (NSRI), इंदौर ने केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड (CIB) के 31 मार्च 2026 तक के लेबल दावों के आधार पर सोयाबीन के लिए विस्तृत पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशक सूची जारी की है। इसमें प्रारंभिक अवस्था (10–12 दिन), सामान्य अवस्था (15–20 दिन) तथा प्री-मिक्स खरपतवारनाशकों के अनेक विकल्प शामिल किए गए हैं, जिससे किसान अपने खेत में मौजूद खरपतवारों के अनुसार उपयुक्त उत्पाद का चयन कर सकें।
फसल की अवस्था के अनुसार करें खरपतवारनाशकों का चयन
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान का कहना है कि पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशकों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनका उपयोग फसल एवं खरपतवार की सही अवस्था में किया जाए। यही कारण है कि संस्थान ने इन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित किया है।
तालिका 1 : बुवाई के 10–12 दिन बाद उपयोग होने वाले खरपतवारनाशक
| रासायनिक नाम / फॉर्मुलेशन | मात्रा प्रति हेक्टेयर |
|---|---|
| क्लोरीम्यूरॉन एथाइल 25 WP + सर्फेक्टेंट | 36 ग्राम |
| बेंटाजोन 48 SL | 2.00 लीटर |
स्रोत : आईसीएआर–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, CIB लेबल दावे (31 मार्च 2026)।
ये खरपतवारनाशक खरपतवारों की शुरुआती अवस्था में प्रभावी नियंत्रण प्रदान करते हैं। यदि खरपतवार छोटे हों और सक्रिय रूप से बढ़ रहे हों तो इनसे बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
बुवाई के 15–20 दिन बाद उपयोग होने वाले खरपतवारनाशक
| रासायनिक नाम / फॉर्मुलेशन | मात्रा प्रति हेक्टेयर |
|---|---|
| क्लेथोडिम 13% EC (12% w/v EC) | 1000 मि.ली. |
| इमेजेथापायर 10 SL | 1.00 लीटर |
| इमेजेथापायर 70 WG + सर्फेक्टेंट | 100 ग्राम |
| क्विज़ालोफॉप एथाइल 5 EC | 0.75–1.00 लीटर |
| क्विज़ालोफॉप-पी-एथाइल 10 EC | 375–450 मि.ली. |
| फेनॉक्सीप्रॉप-पी-एथाइल 9.3 EC | 1.11 लीटर |
| क्विज़ालोफॉप-पी-टेफ्यूरिल 4.41 EC | 0.75–1.00 लीटर |
| फ्लूएज़ीफॉप-पी-ब्यूटाइल 13.4 EC | 1.00–2.00 लीटर |
| हेलॉक्सीफॉप-आर-मेथाइल 10.5 EC | 1.00–1.25 लीटर |
| प्रोपाक्विज़ाफॉप 10 EC | 0.50–0.75 लीटर |
| क्लेथोडिम 25 EC | 0.50–0.70 लीटर |
| फ्लूथियासेट मिथाइल 10.3 EC | 125 मि.ली. |
स्रोत : आईसीएआर–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, CIB लेबल दावे (31 मार्च 2026)।
इन अनुशंसाओं में कई ऐसे खरपतवारनाशक शामिल हैं जो विशेष रूप से घास कुल के खरपतवारों के नियंत्रण में प्रभावी माने जाते हैं। वहीं इमेजेथापायर, क्लोरीम्यूरॉन एथाइल तथा बेंटाजोन जैसे सक्रिय तत्व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे किसान अपने खेत में मौजूद खरपतवारों की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त उत्पाद का चयन कर सकते हैं।
प्री-मिक्स खरपतवारनाशकों ने बढ़ाए विकल्प
पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन खरपतवार प्रबंधन में सबसे बड़ा परिवर्तन प्री-मिक्स (Premix) खरपतवारनाशकों के रूप में देखने को मिला है। इन उत्पादों में दो या दो से अधिक सक्रिय तत्वों का संयोजन होता है, जिससे एक ही छिड़काव में विभिन्न प्रकार के खरपतवारों पर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है। इससे किसानों की लागत, समय और श्रम—तीनों की बचत होती है।
सोयाबीन के लिए अनुशंसित प्री-मिक्स पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशक
| रासायनिक नाम / फॉर्मुलेशन | मात्रा प्रति हेक्टेयर |
|---|---|
| फोमेसाफेन 17.5% + क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल 12.5% ME | 1000 मि.ली. |
| मेटामीफॉप 8% + इमेजेथापायर 4% + इमेजामॉक्स 3% ME | 1000 मि.ली. + 750 ग्राम अमोनियम सल्फेट |
| हेलॉक्सीफॉप-आर-मेथाइल एस्टर 16.5% + क्लोडिनाफॉप-प्रोपार्जिल 8% EC | 1000 मि.ली. |
| फ्लूएज़ीफॉप-पी-ब्यूटाइल + फोमेसाफेन | 1.00 लीटर |
| इमेजेथापायर + इमेजामॉक्स | 100 ग्राम |
| प्रोपाक्विज़ाफॉप + इमेजेथापायर | 2.00 लीटर |
| फोमेसाफेन + क्विज़ालोफॉप एथाइल | 1.50 लीटर |
| फोमेसाफेन 12.5% + क्विज़ालोफॉप एथाइल 4.68% EC | 1.00 लीटर |
| क्विज़ालोफॉप एथाइल + क्लोरीम्यूरॉन एथाइल + सर्फेक्टेंट | 375 मि.ली. + 36 ग्राम + 0.2% |
| फोमेसाफेन + फेनॉक्सीप्रॉप-पी-एथाइल + क्लोरीम्यूरॉन एथाइल | 1.00 लीटर |
| फ्लूथियासेट मिथाइल + क्विज़ालोफॉप एथाइल (2.5% + 10% EC) | 0.50 लीटर |
| क्विज़ालोफॉप एथाइल 7.5% + इमेजेथापायर 15% EC | 0.50 लीटर |
| फेनॉक्सीप्रॉप-पी-एथाइल 6% + क्लोरीम्यूरॉन एथाइल 0.9% + इमेजेथापायर 10% SC | 1.00 लीटर |
स्रोत : आईसीएआर–राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, CIB लेबल दावे (31 मार्च 2026)।
इन प्री-मिक्स उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें अलग-अलग मोड ऑफ एक्शन वाले सक्रिय तत्व शामिल होते हैं। इससे घास कुल तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर एक साथ प्रभावी नियंत्रण मिलता है। साथ ही एक ही प्रकार के खरपतवारनाशक के लगातार उपयोग से विकसित होने वाली हर्बीसाइड रेजिस्टेंस (Herbicide Resistance) की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान किसानों को सलाह देता है कि पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशकों का छिड़काव पर्याप्त पानी के साथ किया जाए। नैपसैक स्प्रेयर से 450–500 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा पावर स्प्रेयर से 120–150 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी का उपयोग किया जाना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए फ्लड जेट या फ्लैट फैन नोजल का उपयोग करने की भी सिफारिश की गई है। इसके साथ ही आवश्यकता अनुसार डोरा, कुल्पा या हाथ से निराई जैसे यांत्रिक उपायों को भी अपनाना चाहिए।
आज जब भारतीय किसान अधिक वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं, तब पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशक उन्हें पूरे मौसम में खरपतवार नियंत्रण की आवश्यक लचीलापन प्रदान करते हैं। सही समय पर, अनुशंसित मात्रा में और खेत में मौजूद खरपतवारों की प्रकृति को ध्यान में रखकर किया गया छिड़काव न केवल उत्पादन क्षमता को सुरक्षित रखता है, बल्कि खरपतवार प्रबंधन को अधिक टिकाऊ और आर्थिक भी बनाता है। इस दृष्टि से पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशक आधुनिक समेकित खरपतवार प्रबंधन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं।
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