फसल की खेती (Crop Cultivation)

गर्मियों में लगाएँ कद्दू, करेला, तोरई

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01 मई 2023, भोपाल: गर्मियों में लगाएँ कद्दू, करेला, तोरई – कद्दूवर्गीय सब्जियों को मानव आहार का एक अभिन्न अंग माना गया है। इन्हें बेल वाली सब्जियों के नाम से भी जाना जाता है इनकी खेती गर्मी एवं वर्षा कालीन दोनों मौसम में की जा सकती है, जैसे लौकी, खीरा, गिल्की, कद्दू, तोरई, करेला की खेती गर्मी के मौसम में सफलतापूर्वक की जा सकती है। पोषण की दृष्टिकोण से यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कद्दूवर्गीय सब्जियों की उपलब्धता वर्ष में आठ से दस महीने तक रहती है, इनको सलाद, पककर, मीठे फल के रूप में मुख्य रूप से उपयोग किया जा सकता है। ज्यादातर बेल वाली सब्जियों हेतु 80 कि.ग्रा. नत्रजन, 50 कि.ग्रा. फास्फोरस तथा 50 कि.ग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर प्रयोग किया जाना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा, फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बोनी से पूर्व उपयोग की जाती है, नत्रजन की शेष आधी मात्रा को 20-25 दिन एवं 40 दिन की अवस्था में दें। कद्दूवर्गीय फसल ज्यादातर 90-100 दिन की फसल होती है, गर्मियों में सिंचाई 6-7 दिन के अंतराल पर करना चाहिए। फलों की तुड़ाई कच्चे व मुलायम अवस्था में करें। फलों को डंठल सहित तोड़ने के पश्चात् रंग व आकार के आधार पर श्रेणीकरण करें।

कीट एवं रोग नियंत्रण:- कद्दूवर्गीय फसल में लाल पंपकिन बिटल (कद्दू का लाल कीड़ा) का प्रकोप होता है, जो पत्तियों को प्रारंभिक अवस्था में नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण हेतु 4 ली. पानी में 250 ग्राम राख, 100 ग्राम चूना मिलाकर छिड़काव करें या इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली./ली. पानी की दर से छिडकाव करें।

फलमक्खी – फलमक्खी सुरंग बनाकर गूदे का खाना प्रारंभ कर देते हैं, जिसके  कारण फल सड़ने लगता है, इसके नियंत्रण हेतु बीटा-साइफलुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 80-100 मि.ली./एकड़ या 15 ली. पानी में 10-12 मि.ली. दवा की दर से छिड़काव करें।

चूर्णी फफूंद – इस रोग में पत्तियों एवं फलों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है, जिससे पौधा भोजन निर्माण नहीं कर पाता है इसके नियंत्रण हेतु सल्फर पाउडर का चूर्ण 25 कि.ग्रा./हे. की दर से छिड़काव करें।

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