फसल की खेती (Crop Cultivation)

बीज उत्पादक ही बीज गुणवत्ता के जिम्मेदार हों

बीज कानून पाठशाला

  • आर.बी. सिंह, एरिया मैनेजर
    (सेवा निवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि. जवाहरनगर, हिसार-125001 (हरियाणा),
    सम्पर्क -79883-04770,
    rbsinghiffdc@gmail.com

2 फरवरी 2022, बीज उत्पादक ही बीज गुणवत्ता के जिम्मेदार हों – बीज धरा का अमूल्य गहना है और इस गहने को धरा को अर्पण करने के लिए बीज उत्पादक, भरसक प्रयास करते हैं कि उत्तम गुणवत्ता का बीज कृषक द्वार तक पहुंचे। शासकीय और निजी उत्पादकों के बीज को कृषकों तक पहुंचाने के लिए बेरोजगारी तथा कठिन प्रतिस्पर्धा के युग में कुछ लोगों ने जीविका का साधन बनाया है। कृषि विभाग द्वारा बीज कानून एनफोर्समैन्ट की कार्यवाही करते समय बीज विक्रेताओं से सैम्पल लेते हैं और सैम्पल मानक के अनुसार न होने पर न्यायालय में इस्तगासा/ शिकायत/ दावा दायर करता है जिसमें प्रथम पक्ष विक्रेता बनता है और द्वितीय पक्ष उत्पादक बनता है और दोष सिद्ध होने पर ज्यादातर दण्ड विक्रेता को दिया जाता है।

विक्रेता दोषी क्यों ?

बीज विक्रेता अपने परिवार के पालन करने हेतु बीज वितरण को अपना पेशा बनाता है। वह मामूली से कमीशन के लिए व्यापार करता है और बीज उत्पादक अधिक लाभ कमाता है। विक्रेता जिस रूप में बीज लेता है उसी रूप में बीज बेचता है तो उसे बीज की गुणवत्ता के लिये दोषी न ठहराया जाए। मध्य प्रदेश राज्य के बीज विक्रेताओं ने राष्ट्रीय बीज, उर्वरक, कीटनाशी विक्रेता संघ के माध्यम से यह आवाज उठाई है। यह मांग वाजिब है और कृषि मंत्री, भारत सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रख कर समाधान चाहा है, जो कि प्रशंसनिय प्रयास है।

प्रमाणीकरण संस्था को पक्ष बनाना:

प्रमाणित बीज विक्रय में बीज निरीक्षक का दायित्व है कि राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के अधिकारियों को वाद का पक्षकार बनाए क्योंकि प्रमाणीकरण की पूरी प्रक्रिया उनके पर्यवेक्षण में होती है। अत: प्रमाणित बीज में गुणवत्ता की कमी के लिये उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए। यदि बीज निरीक्षक ने प्रमाणीकरण संस्था को पक्ष नहीं बनाया तो आरोपी दुकानदार रिजोइन्डर द्वारा संस्था को पक्षकार बनाए। निम्न वादों में उच्च न्यायालयों द्वारा बीज प्रमाणीकरण संस्थाओं को गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी माना है और बीज विक्रेता को मुक्त किया है।
(1) हिन्दुस्तान लिवर लि. बनाम भास्कर तनांगी बडकल – औरंगाबाद, महाराष्ट्र  CA-878/2086 DOD |7.11.1989
(2) एसए जयानारायण बनाम कर्नाटक राज्य DOD 30.05.2003
(3) अजीत सीडस बनाम त्रियम्बक उर्फ बाला साहेब RP 524/1997

प्लान्ट से सैम्पल लेना निषेध

बीज नियम-1968 के नियम 17 (ii), 17(iii) और 23(A) के अनुसार बीज निरीक्षक DDA, SDAO, QCI या जो भी बीज निरीक्षक की शक्तियाँ रखते हैं वे प्रोसेसिंग प्लान्ट पर बीज प्रमाणीकरण संस्था की लिखित अनुमति के बिना सैम्पल लेने, दस्तावेज लेने या अन्य कार्यों के लिए नहीं जा सकते जब तक प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी न हो जाए। यहाँ यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का मतलब यहाँ केवल प्रमाणित बीजों तक ही सीमित नहीं है बल्कि लेबल बीज में भी टैस्टिग, प्रोसेसिंग, पैकिंग, सीलिंग आदि प्रक्रियाएं न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों के अनुसार होती है। ऐसी जानकारी जन सूचना के अधिकार के अंतर्गत भारत सरकार से भी प्राप्त है।

उच्च न्यायालय का निर्णय

राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर खण्ड पीठ ने दिनेश चन्द शर्मा बनाम राजस्थान राज्य के वाद CMP 39/2015 DOD 03.08.2017 के निर्णय में बताया कि बीज के पात्र सीलबन्द होने और भंडारण की अवस्था अनुकूल थी इसलिए बीज की गुणवत्ता में दोष के लिए विक्रेता उत्तरदायी नहीं बल्कि उत्पादक जिम्मेदार है।

कीटनाशी अधिनियम

कीटनाशी अधिनियम-1968 की धारा 30(3)(ष्ट) में उल्लेख है कि उत्पादक या आयातक के अलावा अर्थात विक्रेता कीटनाशी गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, यदि कीटनाशी भली विधि भंडारित किया गया और उसी रूप में बेचा जिस रूप में प्राप्त किया था अर्थात सीलबन्द था और पात्र खोला नहीं गया।

बीज अधिनियम में संशोधन

राष्ट्रीय बीज उर्वरक कीटनाशी विक्रेता संघ का केन्द्र सरकार को इस बाबत दबाव बढ़ाना सगंत है परन्तु यह बीज अधिनियम में कीटनाशी अधिनियम-1968 की धारा 30(3)(ष्ट) जैसे प्रावधान के समावेश से सम्भव हो सकेगा। यहाँ पुन: मैं इन बीज विक्रेताओं को ही दोषी मानूंगा क्योंकि उपरोक्त समावेश होने पर भी इन्हें स्वत: कोई राहत नहीं मिलेगी बल्कि न्यायालय में यह सिद्ध करना होगा कि पात्र सीलबन्द था परन्तु न्यायालय में यह सिद्ध नहीं कर पायेंगे कि बीज पात्र पर सील लगी थी क्योंकि आजकल बीज पात्रों पर सील ही नहीं लगती है। हालांकि प्रमाणित बीज पर बीज उत्पादक एवं प्रमाणीकरण संस्था पहले तो सील लगाती ही नहीं और कभी-कभार थैलों/कटों पर रांग की सील सिलाई के धागे में झुमके की तरह कटका कर प्रमाणीकरण संस्था के लोगो लगे सीलिंग प्लायर (स्द्गड्डद्यद्बठ्ठद्द क्कद्यद्बह्म्) द्वारा नहीं दबाते बल्कि साधारण प्लास से दबा कर कत्र्तव्य की इति श्री कर देते हैं। किसी भी एक थैले पर प्रमाणीकरण की लोगो/छाप वाली सील नहीं मिलेगी। ये बीज विक्रेता व्यापार की प्रतिस्पर्धा के कारण बिना सील लगा बीज लेते हैं और धड़ल्ले से बेचते हैं और इसीलिए उत्पादक भी सील लगाने पर ध्यान नहीं देते और धन भी बचाते हैं।

लेबल बीज

सार्वजनिक क्षेत्र की बीज उत्पादक संस्थाएं एवं निजी बीज उत्पादक भी लेबल सीड तैयार करते हैं परन्तु केवल नन्दी सीड कम्पनी के अलावा कोई कम्पनी लेबल बीज पर सील नहीं लगाती। कई निजी बीज उत्पादक आश्चर्य प्रदर्शित करते हैं कि लेबल बीज के पात्रों पर भी सील लगाना जरूरी है? हरियाणा बीज विकास निगम, नेशनल सीड्स कारपोरेशन, एच.एल.आर.डी.सी., कृभको, इफको, हैफेड, इफाफोडका शासकीय सहकारी संस्थाओं ने भी आज तक सीलिंग प्लायर ही नहीं खरीदा होगा तो सील लगाना तो दिव्य स्वप्न है। हमाम में सब नंगे हैं निजी बीज उत्पादक भी लेबल और प्रमाणित दोनों वर्गों के थैलों पर सील नहीं लगाते हैं। न तो प्रमाणीकरण अधिकारी, न बीज उत्पादक, न विक्रेता न बीज निरीक्षक और अन्तत: कृषक सील के बिना बीज विक्रय में अवरोध नहीं करते तो सील लगना असम्भव है।

गेहूं में उर्वरकों की मात्रा एवं उनका प्रयोग

 

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