फसल की खेती (Crop Cultivation)

रबी ज्वार में देखा गया सड़न-गलन रोग का प्रकोप, जानिए रोगों की जानकारी एंव एकीकृत रोग प्रबंधन के उपाय

23 नवम्बर 2023, भोपाल: रबी ज्वार में देखा गया सड़न-गलन रोग का प्रकोप, जानिए रोगों की जानकारी एंव एकीकृत रोग प्रबंधन के उपाय – महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में उगाए जाने वाले रबी ज्वार में चारकोल सड़न रोग का प्रकोप देखने को मिला हैं। फसल को चारकोल सड़न के प्रकोप से बचाने के लिए किसान रबी ज्वार में एकीकृत रोग प्रबंधन करें।

चारकोल सड़न: रबी ज्वार की फसल में चारकोल सड़न के लक्षण अनाज की उपज और बीज के आकार में कमी,  समय से पहले सूखने और जमा होने के कारण होती है। संक्रमण के कारण पौधे का विकास रुक जाना और डंठल सामान्य से छोटे हो जाने से चारे की गुणवत्ता और मात्रा में कमी आ जाती है।

रबी ज्वार की फसल में रोग प्रबंधन के 4 अनुशंसित उपाय

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में उगाए जाने वाले रबी ज्वार में चारकोल सड़न रोग का प्रकोप देखने को मिला हैं। फसल को चारकोल सड़न के प्रकोप से बचाने के लिए किसान रबी ज्वार में रोग प्रबंधन के अनुशंसित उपायों का प्रयोग करें।

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1.     रबी ज्वार की फसल मेंनाइट्रोजन उर्वरक की न्यूनतम खुराक और कम पौधे घनत्व से चारकोल सड़न कम हो जाता है।

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2.     फसल चक्र से रोग भी कम हो जाता है। मिश्रित फसल के रूप में ज्वार को भी एकमात्र फसल की तुलना में चारकोल सड़न से कम नुकसान होता है।

3.     गेहूं के भूसे की गीली घास जैसी नमी संरक्षण पद्धतियों से रोग के लक्षणों को रोकने में मामूली लाभ मिलेगा।

4.     पूर्वगामी स्थितियों के प्रति प्रतिरोधी किस्मों और संकरों को उगाना अधिक किफायती है।

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