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फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन में इल्ली और पीला मोजेक का प्रकोप, जानें कौन सी दवा कितनी मात्रा में डालें

07 सितंबर 2026, शिवपुरी: सोयाबीन में इल्ली और पीला मोजेक का प्रकोप, जानें कौन सी दवा कितनी मात्रा में डालें – सोयाबीन की फसल फिलहाल फली भरने की अवस्था में है, और ठीक इसी नाजुक समय में कई जिलों से पत्ती खाने वाली इल्ली और पीला मोजेक रोग की शिकायतें आने लगी हैं। जिला कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक ताजा सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि खेत में किस समस्या पर कौन सी दवा कारगर रहेगी।

गूगल पर भी इन दिनों “सोयाबीन में इल्ली की दवा” और “सोयाबीन पीला मोजेक का इलाज” जैसे सवाल खूब खोजे जा रहे हैं, जो बताता है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के सोयाबीन बेल्ट में यह समस्या इस समय आम है।

पत्ती खाने वाली इल्ली और रस चूसने वाले कीट का इलाज

जब खेत में पत्ती खाने वाली इल्लियां (सेमीलूपर, तंबाकू की इल्ली, चने की इल्ली), सफेद मक्खी और तना मक्खी एक साथ हमला करें, तो भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के वैज्ञानिकों की सलाह के मुताबिक पहले से मिश्रित कीटनाशकों का इस्तेमाल फायदेमंद रहता है।

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इनमें क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 9.30 प्रतिशत + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत (जेडसी) को 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत (जेडसी) को भी 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। जिन खेतों में सिर्फ रस चूसने वाले कीट यानी सफेद मक्खी और जैसिड ज्यादा दिखें, वहां बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड का 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव कारगर बताया गया है।

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पीला मोजेक और एरियल ब्लाइट रोग पर सलाह

पीला मोजेक रोग सफेद मक्खी के जरिए फैलता है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए भी सफेद मक्खी को नियंत्रित करना जरूरी है। शिवपुरी जिला कृषि विभाग ने इसके लिए थायमेथोक्सम + लैम्ब्डा-साइहैलोथ्रिन या एसिटामिप्रिड + बाइफेंथ्रिन के मिश्रित कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी है।

जिन खेतों में राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग की शिकायत है, वहां पाइराक्लोस्ट्रोबिन या पाइराक्लोस्ट्रोबिन + इपोक्सीकोनाज़ोल फफूंदनाशक का छिड़काव करने को कहा गया है। एन्थ्रेक्नोज रोग के लिए टेबुकोनाज़ोल 10 प्रतिशत + सल्फर 65 प्रतिशत डब्ल्यूजी अथवा कार्बेन्डाज़िम 12 प्रतिशत + मैंकोज़ेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि छिड़काव हमेशा फसल की शुरुआती अवस्था में प्रकोप दिखते ही करना चाहिए, देर होने पर नुकसान ज्यादा बढ़ जाता है। साथ ही किसी भी दवा का घोल बनाने से पहले पानी की सही मात्रा और छिड़काव यंत्र की नोजल जांच लेने की सलाह भी दी गई है, ताकि दवा बराबर मात्रा में पूरे पत्ते पर पहुंचे।

एक ही तरह के कीटनाशक का बार-बार इस्तेमाल करने से कीटों में उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है, इसलिए वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि दो अलग-अलग समूह के कीटनाशकों को बदल-बदल कर इस्तेमाल किया जाए। साथ ही खेत की मेड़ों पर उगी खरपतवार और झाड़ियों को समय-समय पर साफ करते रहना चाहिए, क्योंकि कई बार कीट पहले इन्हीं झाड़ियों में पनपते हैं और बाद में मुख्य फसल पर हमला करते हैं।

यह जानकारी सोयाबीन उगाने वाले किसानों के लिए इस समय सबसे जरूरी है, क्योंकि फली भरने की अवस्था में इल्ली और पीला मोजेक का हमला उपज को सीधे आधा तक घटा सकता है। कीटनाशक-फफूंदनाशक बेचने वाले कृषि-इनपुट कारोबारियों के लिए भी यह संकेत है कि आने वाले दिनों में इन मिश्रित कीटनाशकों और फफूंदनाशकों की मांग बढ़ सकती है, इसलिए सही सलाह के साथ स्टॉक तैयार रखना जरूरी होगा।


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