रबी प्याज में पोषण प्रबंधन

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  • डॉ. निशिथ गुप्ता, नीरजा पटेल ,
  • डॉ. के.एस. भार्गव
    कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास (म.प्र.)

11 फरवरी 2022,  रबी प्याज में पोषण प्रबंधन –  प्याज एक महत्वपूर्ण कंदीय सब्जी एवं मसाला फसल है जिसका उपयोग मनुष्य के भोजन में किसी ना किसी रूप में अवश्य होता है। यह भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ उसकी पौेष्टिकता को भी बढ़ाता है। इसके कंद में आयरन, कैल्शियम तथा विटामीन ‘सी‘ मुख्य रुप से पाया जाता है। इसका उपयोग अनेक बीमारियों जैसे पित्तरोग, शरीर दर्द, खूनी बावासीर, रतौंधी, मलेरिया, कान दर्द आदि के उपचार में औषधि के रूप में भी किया जाता है। साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

प्याज में खाद एवं उर्वरक की मात्रा जलवायु, मिट्टी के प्रकार एवं लगाए जाने वाले मौसम (खरीफ, पिछेती खरीफ एवं रबी) पर निर्भर करती है। प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय, राजगुरुनगर में किये गए एक प्रयोग के अनुसार यह पाया गया कि प्याज की फसल 40 टन/हेक्टेयर उपज देने के बदले लगभग 90-95 किलो नत्रजन, 30-35 किलो स्फुर और 50-55 किलो पोटाश जमीन से लेती है। नत्रजन, स्फुर और पोटाश के अलावा प्याज को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है जिसकी कमी होने पर उत्पादन एवं उत्पादकता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसलिये यह आवश्यक है कि मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने और उचित उत्पादन प्राप्त करने के लिये मृदा परीक्षण आधारित समन्वित पोषण तत्व प्रबंधन को अपनाया जाए।

प्याज की अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिये हरी खाद अथवा 15-20 टन/हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद अथवा 7.5 टन/ हेक्टेयर की दर से केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) का प्रयोग खेत की तैयारी के समय अंतिम जुताई के पूर्व करें। प्याज में अनुशंसित रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग नीचे बताई गई तालिका के अनुसार सही मात्रा व सही समय पर करें।
प्याज में मुख्य पोषक तत्वों की कमी के लक्षण:

नत्रजन

लक्षण:

  • पत्तियां पीले हरे रंग के, सीधे एवं ऊपर की ओर घुमावदार, सूखे हुए एवं छोटे रह जाते हैं।
  • कंद के पकने की अवस्था में कंद के ऊपर की उत्तक मुलायम हो जाते हंै।

निदान:

  • यूरिया (1 प्रतिशत) या डी.ए.पी. (2 प्रतिशत) का एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

फास्फोरस

लक्षण:

  • फसल की वृद्धि धीमे तथा परिपक्वता में देरी हो जाती है।
  • पत्तियों का रंग हल्का हरा हो जाता है।
  • पत्तियों के ऊपरी शिरे जलने लगते हैं।
  • कंद के ऊपर के छिलके सूख जाते हैं।

निदान:

  • अनुशंसित मात्रा में फास्फोरस युक्त खाद का प्रयोग करें।
  • डी.ए.पी. (2 प्रतिशत) का 15 दिन के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

पोटाश

लक्षण:

  • अधिक मात्रा में पोटाश की कमी होने पर नए पत्तियों पर लक्षण दिखाई देते हैं।
  • पत्तियों के शिरे जलने लगते हैं।पत्तियां गहरी हरी एवं सीधी हो जाती है।
  • पुरानी पत्तियां पीली पडऩे लगती हैं तथा उनमें धब्बे दिखाई देते हैं।

निदान:

पोटेशियम सल्फेट (1 प्रतिशत) का एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग

  • नत्रजन, स्फुर और पोटाश के अलावा प्याज को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है।
  • प्याज में तीखापन एलाईल प्रोपाईल डाईसल्फाईड नामक तत्व के कारण होता है जिसको बढ़ाने व उत्पादन में वृद्धि के लिये प्याज को सल्फर नामक सूक्ष्म तत्व की आवश्यकता होती है।
  • सल्फर व जिंक को रोपण से पहले मिट्टी में मिला देना चाहिये।
  • यदि इन सूक्ष्म पोषक तत्वों के अलावा किसी और सूक्ष्म तत्व की भी पौधों को आवश्यकता हो मृदा परीक्षण के आधार पर उस पोषक तत्व का प्रयोग फसल पर करें।

प्याज में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के लक्षण

गंधक (सल्फर):

लक्षण:

  • पत्तियों का हरा रंग समाप्त हो जाता है।
  • सभी पत्तियां (पुरानी तथा नई) एक समान पीली दिखाई देती है।

निदान:

  • पोटेशियम सल्फेट या कैल्शियम सल्फेट (1 प्रतिशत) का 15 दिन के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

मैंगनीज

लक्षण:

  • पत्तियों के शिरे जलने लगते हैं।
  • पत्तियों का रंग हल्का हो जाता है और वे ऊपर की ओर घुमावदार हो जाते हैं।
  • फसल की वृिद्ध रुक जाती है।
  • कंद देर से बनते हैं और गर्दन मोटी हो जाती है।

निदान:

  • मैंगनीज सल्फेट (0.3 प्रतिशत) का 15 दिन के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

जिंक:

  • लक्षण:
  • पत्तियों पर हल्के पीले या सफेद रंग की लंबवत धारियां दिखाई देती है
  • पत्तियों का शीर्ष भाग घुमावदार हो जाता हैं।

निदान:

  • रोपण से पूर्व 25-30 कि.ग्रा./ हेक्टेयर की दर से जिंक सल्फेट का प्रयोग करें।
  • जिंक सल्फेट (0.5 प्रतिशत) का 15 दिन के अंतराल पर दो बार पर्णीय छिडक़ाव करें।

आयरन

लक्षण:

  • आयरन की कमी का लक्षण सर्वप्रथम नई पत्तियों पर दिखाई देता है और वे पूर्ण रुप से पीली हो जाते है।
  • नई पत्तियों की मध्य शिराएं पीली हो जाती हैं।

निदान:

  • फेरस सल्फेट (0.5 प्रतिशत) का 15 दिन के अंतराल पर पर्णीय छिडक़ाव करें।

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