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फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन: जिंक और बोरॉन की कमी ऐसे करें दूर

07 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन: जिंक और बोरॉन की कमी ऐसे करें दूर –

केवल एनपीके नहीं, सूक्ष्म पोषक तत्व भी हैं जरूरी

धान की अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के साथ-साथ जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी कमी होने पर पौधों की वृद्धि, जड़ों का विकास और दानों का भराव प्रभावित हो सकता है।

आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान ने किसानों को मिट्टी की स्थिति के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करने की सलाह दी है।

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जिंक की कमी होने पर क्या करें

संस्थान के अनुसार जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में अंतिम भूमि तैयारी के समय जिंक सल्फेट अथवा जिंक ईडीटीए का प्रयोग किया जाना चाहिए। जिंक ईडीटीए का उपयोग दो वर्ष में एक बार करना पर्याप्त माना गया है।

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बोरॉन की कमी भी करें पूरी

जहां मिट्टी में बोरॉन की कमी हो, वहां अंतिम भूमि तैयारी के समय बोरेक्स का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों की वृद्धि तथा पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

मिट्टी परीक्षण के आधार पर लें निर्णय

विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करने से लागत कम होती है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता भी बढ़ती है।

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