फसल की खेती (Crop Cultivation)

मिर्च में रसचूसक कीट थ्रिप्स, माहू और सफेद मक्खी का प्रबंधन

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29 अप्रैल 2023, भोपाल: मिर्च में रसचूसक कीट थ्रिप्स, माहू और सफेद मक्खी का प्रबंधन – मिर्च के पौधों में प्रमुख तीन रस चूसक कीट थ्रिप्स, माहू और सफेद मक्खी लगते हैं। यह रसचूसक कीट मिर्च के पौधों की पत्तियों व अन्य मुलायम क्षेत्रों के रस को चूसते हैं। इन कीटों के प्रकोप के कारण पत्तियां ऊपर की ओर मुड़कर नाव का आकार धारण कर लेती है।

मिर्च में सबसे अधिक हानि पत्तियों के मुड़ने से होती हैं जिसे विभिन्न स्थानों में कुकड़ा या चुरड़ा-मुरड़ा रोग के नाम से जाना जाता है।

थ्रिप्स कीट के प्रकोप से मिर्च की पत्तियां ऊपर की ओर मुड़ कर नाव का आकार धारण कर लेती है। वहीं माइट कीट के प्रकोप से भी पत्तियां मुड़ जाती है परन्तु ये नीचे की ओर मुड़ती हैं। मिर्च में लगने वाली माइट बहुत ही छोटी होती है जिन्हें साधारणत: आंखों से देखना सम्भव नहीं हो पाता है। 

यदि मिर्च की फसल में थ्रिप्स व माइट का आक्रमण एक साथ हो जाये तो पत्तियां विचित्र रूप से मुड़ जाती हैं। इसके प्रकोप से फसल के उत्पादन में बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

यदि दोनों थ्रिप्स व माइट का प्रकोप एक साथ हुआ है तो कीटनाशक तथा माइटीसाइड का उपयोग एक साथ करना होगा। दोनों के प्रकोप की स्थिति में थ्रिप्स के लिए ट्राइजोफॉस 40 ई.सी. के 30 मि.ली. तथा माइट के लिए प्रोपरजाईट 57 प्रतिशत ईसी के 40 मि.ली. प्रति 5 लीटर पानी के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।


मिर्च में लगने वाले प्रमुख रसचूसक कीट

1. थ्रिप्स – इस कीट का वैज्ञानिक नाम (सिट्ररोथ्रिटस डोरसेलिस हुड़) है। यह छोटे-छोटे कीड़े, पत्तियों एवं अन्य मुलायम भागों से रस चूसते हैं। इसका आक्रमण प्राय: रोपाई के 2-3 सप्ताह बाद शुरु हो जाता है। फूल लगने के समय प्रकोप बहुत भयंकर हो जाता हैं पत्तियां सिकुड़ जाती है तथा मुरझा कर ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं और नाव का आकार ले लेती है। थ्रिप्स द्वारा क्षतिग्रस्त पौधों को देखने से मोजेक रोग का भ्रम होता है। पौधे की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उपज बहुत कम हो जाती है।

2. माहू – (एफिस गोसीपाई ग्लोवर)

यह कीट पत्तियों एवं पौधों के अन्य कोमल भागों से रस चूसकर पत्तियों एवं कोमल भागों पर मधुरस स्त्राव करते हैं, जिससे सूटी मोल्ड विकसित हो जाती है। परिणाम स्वरूप फल काले पड़ जाते हैं। यह कीट मोजेक रोग का प्रसार करता है।

3. सफेद मक्खी – (बेमेसिया टेबेकाई)

इस कीट के शिशु एवं वयस्क पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते हैं। कीट पर्ण कुंचन रोग को एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलाते हैं।

नियंत्रण-

1. कीट की प्रारम्भिक अवस्था में नीमतेल 5 मिली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
2.  डायमिथिएट 30 ईसी की 30 मि.ली. मात्रा तो 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
3. कीट के अत्यधिक प्रकोप की अवस्था में 15 ग्राम एसीफेट या इमीडाक्लोप्रिड 18.5 एस.एल. की 5 मिली मात्रा 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
4. फेनप्रोपाथ्रिन 0.5 मिली मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

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