Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

हरे चारे एवं घास का ‘ हे ’ बनाकर पशुओं को खिलायें

  • डॉ. राम निवास, विशेषज्ञ पशुपालन
  • डॉ. चारू शर्मा, विशेषज्ञ गृह विज्ञान
  • डॉ. कृष्ण गोपाल व्यास, विशेषज्ञ शस्य विज्ञान
    कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण, जैसलमेर, (राज.)

25 अक्टूबर 2021, हरे चारे एवं घास का ‘ हे ’ बनाकर पशुओं को खिलायें – प्रदेश में मानसून देरी से विदा होने की वजह अंतिम माह में अधिक वर्षा हुई है । इस ऋतु में पशुओं के लिए हरा चारा आवश्यकता से अधिक उपलब्ध होता है, जबकि अधिकतर माहीनों में इसका बिल्कुल अभाव रहता है। किसान अधिक पैदावार के समय इस चारे की अतिरिक्त मात्रा को संरक्षित करके अभाव के समय इसे खिलाकर पशुओं की शारीरिक वृद्धि एवं दुग्ध उत्पादन बरकरार रख सकता है। चारा सरक्षण की प्रचलित विधियों में से ‘हे’ बनाना अधिक सरल एवं कम मेहनत वाला है। इसमें हरे चारे कि फसल को उपर्युक्त पौष्टिक अवस्था में काटकर उस समय तक सुखाया जाता है जब तक कि उसमें आद्र्रता 15 प्रतिशत या इससे कम न हो जाये। ‘हे’ बनाते समय चारे का हरा रंग, पत्तियाँ एवं पोषक तत्व क्षीतग्रस्त न हों, इसकी जानकारी अति आवश्यक है ।

‘हे’ बनाने की उपयुक्त विधि

‘हे’ बनाने के लिए उपयुक्त चारा फसलों जैसे बरसीम, रिजका, लोबिया इत्यादि एवं घास जैसे सेवन, धामन, दूब, नेपियर एवं समस्त खरपतवार जिनको हरी अवस्था में जानवर खा लेता हो कि उचित अवस्था में कटाई करें। चारा फसल की कटाई जमीन की सतह से 6 इंच ऊपर से करें, ताकि इसे पुन: बढऩे में आसानी हो। चारा फसल की कटाई सुबह के समय करें, ताकि इसे दिन के समय धूप में सूखने का समय मिल सके। काटी गई चारा फसल एव घासों को 2 दिनों तक धूप में सुखायें। दिन के समय इसे 4 घंटे के अंतराल से पलटें, ताकि पूरी घास समान रूप से सूख सके। तत्पश्चात् इसे 2 दिनों तक छाया में सुखायें। इस समय नमी 15 प्रतिशत के लगभग हो जाती है एवं हरापन बरकरार रहता है। अब इसे शंकुवाकार या खड़ी स्थिति में इक_ा कर के रखें। पशुओं को खिलाने से पहले इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर कुट्टी बना लें। इसे प्रतिदिन प्रति पशु 2-5 किग्रा. प्रति 100 किग्रा. भार की दर से खिलायें।

भण्डारण हेतु करें उचित स्थान का चुनाव

’हे’ का भण्डारण ऐसे स्थान पर करें जहाँ दीमक एवं चूहों का प्रकोप नहीं होने के साथ ही जमीन से उच्चतम जगह हो ताकि बरसात का पानी इक_ा नहीं होने के कारण ‘हे’ अधिक मात्रा में खराब न हो। ’हे’ के भण्डारण के लिए नमी रहित स्थान का होना आवश्यक है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile
उच्च गुणवत्ता वाले ‘हे’ की विशेषताएं

उच्च गुणवत्ता वाले ‘हे’ का निर्माण करने के लिए हरे चारे, घास या चारा फसल को उसकी पुष्प अवस्था में काटा जाता है जब उसमे अधिकतम पोषक तत्व उपस्थित होते है। उच्च गुणवत्ता वाले ‘हे’ में पत्तियों की मात्रा अधिक होती है क्योंकि पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन और खनिज लवण अधिक मात्रा में होते है। ‘हे’ का रंग हरा तथा ये मुलायम स्वादिष्ट पौष्टिक और सुपाच्चय होना चाहिए। अच्छी तरह से बना हुआ ‘हे’ दुधारु पशुओं को साल भर खिलाकर उनके आहार पर आने वाली लागत को कम किया जा सकता है। पशु का स्वास्थ्य अच्छा रहने के साथ साथ सभी तरह के पोषक तत्व मिलने से दुग्ध उत्पादन में गिरावट नहीं आती है ।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें
‘हे’ जिसके कई फायदे
  • हरे फसल अवशेषों अथवा खरपतवारों का समुचित उपयोग।
  • फसल उत्पादन में बढ़ोतरी।
  • फसल नुकसान की भरपाई ‘हे’ बनाकर चारे के तौर पर की जा सकती है।
  • धामण, सेवण इत्यादि पोषक तत्वों से भरपूर घासों को बचाने में योगदान।
  • अभाव के चारे की कमी को पूरा करता है।
  • दाने की आवश्यकता को 20 से 30 प्रतिशत तक कम करता है।
  • पशुओं का स्वास्थ्य अच्छा रखकर बीमारी से बचाता है।
  • आहार पर होने वाला खर्च घटाता है।
  • दूध का उत्पादन बढ़ता है।

चारा अभाव के समय पशुओं का आहार