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लाख फसल

तो ऐसे करें लाख की खेती – भारत में कुसमी और रंगीनी दो प्रकार की लाख फसल होती है। कुसमी लाख कुसुम के पौधों पर होती है जबकि रंगीनी लाख मुख्यत: पलाश बेर के पौधे पर पाले जाते हैं। कुसमी तथा रंगीनी दोनों से एक वर्ष में दो दो फसल ली जाती है कुसमी लाख से ठंड और गर्मी समय की क्रमश: अगहनी और जेठवी फसल ली जाती है। अगहनी फसल के लिये शिशु कीट संचारण जून-जुलाई और जेठवी फसल के लिये जनवरी-फरवरी माह में करते हैं। यही फसल क्रमश: जनवरी-फरवरी तथा जून-जुलाई में काटते हंै। कुछ पेड़ों पर जिन पर लाख कीट पनप सकते हैं। पर भारत में जिन पेड़ों पर लाख उगाया जाता है। कुसुम खैर-बेर पलाश-घोट अरहर शीशम पोर शरीफा आदि। लाख की अच्छी फसल के लिए पेड़ों को खाद देकर उगाया जाता है और काट-छांट तैयार किया जाता है जब नए प्ररोह निकलकर पर्याप्त बड़े हो जाते तब उन पर लाख बीज बैठाया जाता है।

कीट पालन की अवस्थाएं
पेड़ों की कटाई-छंटाई

पोषक पेड़ों में कोमल तथा रसदार टहनियां पाने के लिए पेड़ों की हल्की कटाई छंटाई एक निश्चित समय में आवश्यक है जिससे इसके कीट का पालन आसानी से किया जा सके। कुसुम वृक्ष के लिए कटाई छंटाई जनवरी-फरवरी एवं जून-जुलाई में की जा सकती है। पलाश के वृ़क्ष की कटाई छंटाई हमेशा पतझड़ के बाद नई कोपलें आने के पहले की जानी चाहिए। बेर फसल की कटाई-छंटाई मई महीने में करें।

बीहन लाख से संचारण

यह कीट पोषण पौधों के डठंलों में रहते हैं जिनमे शिशु कीट निकलते हंै इन डंठलों को बीहन लाख कहते हैं। लाख कीट को पोषक पेड़ों पर संचारित करने के लिए बीहन लाख की 6 इंच से 9 इंच लम्बी 3 से 4 डंठलों का बंडल बना लिया जाता है जिसे लाख पोषक पेड़ों के कई स्थानों पर डालियों के समांतर ऊपर की ओर बांध देते हंै इन बीहन लाख से शिशु कीट बाहार आकार नई टहनियों पर रेंगने लगते हंै और बाद में कोमल एवं रसदार टहनियों पर हमेशा के लिए बैठ जाते हंै।

फुंकी उतारना

बीहन लाख से शिशु कीट निकल जाने के बाद बंधी लाख डंठलों को फुंकी कहते हैं। शिशु कीट के बीहन लाख से निकल जाने के बाद डंठलों को पेड़ से हटा लें अन्यथा इसमे मौजूद शत्रु कीट बीहन लाख से जन्मे शिशुओं पर आक्रमण करना शुरू कर देते हैं।

फसल कटाई

रंगीनी लाख की ग्रीष्मकालीन और वर्षा कालीन फसल संचारण क्रमश: 8 और 4 महीने बाद परिपक्व हो जाती है। इसी प्रकार कुसमी की ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन फसल को क्रमश: जून-जुलाई और जनवरी-फरवरी में तैयार हो जाती हैं परिपक्व फसल को फिर से बीहन लाख के लिए उपयोग करना हो तो पेड़ों पर सही समय पर अर्थात् कीटों से निकलने के समय से काटते हंै लेकिन यदि छिली लाख के रूप मेें उपयोग करना है तो समय से पहले भी काटा जा सकता है।

छिलाई

फसल परिपक्व होने के बाद लाख युक्त डंठलों तथा फुंकी लाख डंठलों में से इस को खुरचकर अलग किया जाता है इस विधि को लाख को छायादार स्थान में जमीन पर फैलाकर सुखाया जाता है तथा सुखाने के बीच-बीच में छिपी लाख को पलटाना पड़ता है।

लाख एक बहुपयोगी राल है जो एक सूक्ष्म कीट का दैहिक स्त्राव है लाख के उत्पादन करने के लिए पोषक वृक्षों जैसे कुसुम, पलास व बेर अथवा झाड़ीदार पौधों जैसे भालिया की आवश्यकता पड़ती है हमारे देश में पैदा होने वाली लाख का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा झारखण्ड राज्य से प्राप्त होता है। छत्तीसगढ़ व पश्चिम बंगाल अन्य प्रमुख लाख उत्पादन राज्य हैं महाराष्ट्र, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और असम के कुछ क्षेत्रों में भी लाख की खेती की जाती है। लाख उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश का सबसे बड़ा लाख उत्पादन राज्य है। यह देश के लाख उत्पादन का 42 फीसदी है। आंकड़ों के अनुसार भारत लाख उत्पादन की दृष्टि से विश्व में सर्वप्रथम देश है।

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