फसल की खेती (Crop Cultivation)

कुफरी चंद्रमुखी से 250 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज, कुफरी ज्योति भी देती है 175 क्विंटल तक उत्पादन; जानें खासियत  

17 अगस्त 2026, नई दिल्ली: कुफरी चंद्रमुखी से 250 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज, कुफरी ज्योति भी देती है 175 क्विंटल तक उत्पादन; जानें खासियत – आलू की खेती से बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमाने के लिए सही किस्म का चयन बेहद जरूरी है। कुफरी चंद्रमुखी और कुफरी ज्योति आलू की अनुमोदित किस्मों में शामिल हैं। इनमें कुफरी चंद्रमुखी जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो शुष्क शीतोष्ण क्षेत्रों में 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है, जबकि कुफरी ज्योति से 175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिलता है। दोनों किस्मों की अपनी अलग विशेषताएं हैं, जिन्हें किसान अपने क्षेत्र और जरूरत के अनुसार चुन सकते हैं।

कुफरी चंद्रमुखी

कुफरी चंद्रमुखी जल्दी तैयार होने वाली किस्म है। इसे मैदानी क्षेत्रों से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक उगाया जा सकता है। यह किस्म 110 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके पौधे मध्यम लंबाई के, शीघ्र बढ़ने वाले होते हैं और इनमें हल्के गुलाबी रंग के फूल आते हैं। इसके कंद बड़े, अंडाकार, एक समान आकार के और उथली आंखों वाले होते हैं। कंद का गूदा मटमैला सफेद होता है।

इस किस्म के आलुओं के रंग-रूप में गिरावट बहुत धीरे होती है। इसी कारण इसे बीज के लिए दूर के क्षेत्रों में भेजने के लिए उपयुक्त माना जाता है। कुफरी चंद्रमुखी की उपज क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी उपज 90 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, जबकि शुष्क शीतोष्ण क्षेत्रों में करीब 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है।

कुफरी ज्योति

कुफरी ज्योति मध्य मौसमी किस्म है और इसे तैयार होने में करीब 130 से 150 दिन लगते हैं। इसके पौधे लंबे, सीधे और तेजी से बढ़ने वाले होते हैं। पौधों का आकार मध्यम होता है और फूल सफेद रंग के होते हैं। इस किस्म के पौधे और कंद पछेती झुलसा रोग के लिए थोड़े रोग प्रतिरोधी होते हैं। यह अधिक उपज देने वाली किस्म है और मैदानी क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश के लिए इसे विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है।

कुफरी ज्योति की औसत पैदावार 150 से 175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। इस किस्म की एक खास बात यह है कि फसल तैयार होने के बाद इसे खेत में अधिक समय तक नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने पर कंदों का आकार बहुत बड़ा हो सकता है और उनमें दरारें पड़ने की समस्या आ सकती है, जिसे इस किस्म का अच्छा गुण नहीं माना जाता।

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