फसल की खेती (Crop Cultivation)

IARI की सोयाबीन की उन्नत किस्में किसानों को देंगी बेहतर उत्पादन, जानिए टॉप 3 वैरायटी

कम अवधि में अच्छी उपज, रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध और गुणवत्ता के कारण किसानों के लिए उपयोगी विकल्प

11 अगस्त 2026, नई दिल्ली: IARI की सोयाबीन की उन्नत किस्में किसानों को देंगी बेहतर उत्पादन, जानिए टॉप 3 वैरायटी – खरीफ सीजन में सोयाबीन देश के प्रमुख तिलहनी और नकदी फसलों में शामिल है। बेहतर उत्पादन और फसल को रोगों से बचाने के लिए किसानों के लिए उन्नत किस्म का चयन काफी महत्वपूर्ण होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित सोयाबीन की कुछ उन्नत किस्में कम अवधि में बेहतर उत्पादन देने के साथ प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोध के लिए जानी जाती हैं।

1. पूसा सोयाबीन 9712

पूसा सोयाबीन 9712 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) के किसानों के लिए अनुशंसित किस्म है। यह खरीफ मौसम में सिंचित परिस्थितियों में खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस किस्म की फसल करीब 115 दिनों में तैयार हो सकती है और अनुकूल परिस्थितियों में लगभग 22.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।

इस किस्म की प्रमुख विशेषता इसका मूंगबीन येलो मोजेक वायरस (MYMV) के प्रति प्रतिरोधी होना है। यह रोग पत्तियों में पीलापन पैदा करता है और पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्षमता को प्रभावित कर उत्पादन में कमी ला सकता है। ऐसे में रोग प्रतिरोधी किस्म किसानों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है।

2. पूसा सोयाबीन 6

पूसा सोयाबीन 6 को वर्ष 2021 में विकसित किया गया था और वर्ष 2025 में इसे व्यापक रूप से अनुशंसित किया गया। यह किस्म दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए उपयोगी मानी जाती है।

सिंचित परिस्थितियों में खरीफ मौसम के दौरान इसकी खेती से करीब 21.4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है। बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण यह किस्म उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो कम अवधि में अच्छी उपज हासिल करना चाहते हैं।

3. तीसरी किस्म का चयन क्षेत्र के अनुसार करें

सोयाबीन की तीसरी उन्नत किस्म का चयन करते समय किसान अपने राज्य, मिट्टी, सिंचाई सुविधा, स्थानीय जलवायु और कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसा को ध्यान में रखें। एक ही किस्म हर क्षेत्र में समान उत्पादन नहीं देती। इसलिए प्रमाणित बीज खरीदना और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किस्म का चयन करना अधिक लाभदायक रहेगा।

उन्नत किस्मों से बढ़ सकता है उत्पादन

सोयाबीन की उन्नत किस्मों में बेहतर उपज क्षमता, रोगों के प्रति प्रतिरोध और अनुकूल परिस्थितियों में अच्छी गुणवत्ता जैसे गुण पाए जाते हैं। हालांकि वास्तविक उत्पादन मिट्टी की उर्वरता, मौसम, सिंचाई, बीज की गुणवत्ता और खेती की वैज्ञानिक तकनीक पर निर्भर करता है।

किसानों के लिए जरूरी सलाह: बीज खरीदने से पहले अपने क्षेत्र के लिए किस्म की आधिकारिक अनुशंसा अवश्य जांचें और प्रमाणित स्रोत से ही बीज खरीदें।

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