फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की सीधी बुआई कैसे करते है ?

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13 मई 2024, नई दिल्ली: धान की सीधी बुआई कैसे करते है ? – धान की सीधी बिजाई के दो प्रमुख तरीके हैं। पहला तरबतर विधि जिसमें कि गेहूं की कटाई के बाद खेत की जुताई कर देते हैं। जुताई करने के बाद उसको लेजर लेवेलेर से लेवलिंग करते हैं। फिर खेत में पानी लगाए। पानी लगाने के बाद जब खेत मैं बत्तर आजाता है तोह उसकी फिर जुताई करे। २-३ बार जुताई करने के बाद लाज़र से फिर लेवेलिंग करे ताकि मिटटी अच्छी तरह से दब जाए और सॉलिड हो जाए। ऐसा करने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

लक्की ड्रिल से धान की बुआई

जीरी ड्रिल और लक्की ड्रिल के वक़्त कतार से कतार की दूरी करीब 8 से 9 इंच के आसपास होती है। और इस विधि में बीज की गहराई हम तकरीबन डेढ़ इंच के आसपास रखते हैं। बिजाई करने के बाद फिर हल्का पाटा चलाते हैं। इस विधि से सात से आठ दिन के अंदर अंकुरण हो जाता है। अजर लक्की ड्रिल से बुआई कर रहे है तोह उसमे वयस्था होती है की साथ मैं शाकनाशी पेंडिमेथालिन दवा आप दाल सकते है।

दूसरा तरीका बुवाई के लिए प्रयोग करते हैं उसमें गेहूं की कटाई के बाद खेत की जुताई करके लेजर लेवेलर चलाते हैं। लेजर लेवेलर चलाने के बाद ड्रिल से धान की बिजाई कर देते हैं। फिर पानी लगाते है। पानी लगाने के 4 से 5 दिन के अंदर अंकुरण हो जाता है। इसमें विधि में ध्यान रखना चाहिए कि बीज की गहराई थोड़ी कम रखे करीब आधा पौना इंच के आसपास रखें। काम गहराई रखना ज़रूरी है क्योकि जब पानी लगेगा तो ज्यादा गहराई वाले बीज के अंकुरण में दिक्कत होगी और बीज नीचे दब कर सड़ भी सकता है ।

तरबतर विधि से बुआई के तुरंत बाद जब खेत चलने लायक होजाए तोह खरपतवार नाशी पेंडिमेथालिन दवा का उपजोग करे। इसके लिए 1200 से लेकर के 1500 मिलीलीटर दवा आप 200 से 250 लीटर पानी में घोल कर बुआई के तुरंत बाद छिलकाव करते हैं।

समझिए दोनों विधियों में अंतर

दोनों विधियों में अंतर है। अगर तरबतर विधि से धान की सीधी बिजाई करते हैं तो इसमें खरपतवार का नियंत्रण बहुत अच्छी तरह से हो जाता है क्योंकि पहली बार पानी लगाते ही उसके तुरंत बाद चार से पांच दिन में अंकुरण हो जाता है। जुताई करने के साथ-साथ वो खरपतवार समाप्त हो जाते हैं। अगर धान की पिछले साल की फसल के बीज अगर खेत में अंदर रह जाते हैंतो व भी पहली बार पानी का छिड़काव के साथ ही बीज जम जाते हैं और जब जुताई करते हैं तो वो सब पौधे मर जाते हैं। अगर आप इस बात का ध्यान रखें कि पहले जिस किस्म का प्रयोग किया गया था उसी किस्म का प्रयोग करे तो कोई चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर किस्म आप बदल रहे हैं तो इस बात का जरूर ध्यान रखें पेंडिमेथालिन दवा का छिड़काव करे इससे काफी खरपतवार का शुरू की अवस्था में नियंत्रण हो जाता है।

कैसे करे खरपतवार नियंतरण

दोनों ही तरीकों में धान की बिजाई तरबतर विधि से हो या जीरी ड्रिल और लकी ड्रिल उसमें बुवाई के तुरंत बाद पेंडिमेथालिन नामक दवा प्रयोग करते है। अगर लकी ड्रिल प्रयोग कर रहे हैं तो उसमें व्यवस्था होती है कि तुरंत छिड़काव कर सकते है। इसके लिए 1200 से लेकर के 1500 मिलीलीटर दवा आप 200 से 250 लीटर पानी में घोल कर बुआई के तुरंत बाद छिलकाव करते हैं। यह प्री इमरजेंस हरबसाइड का काम करता है खरपतवार मर जाते हैं। इसी तरह से हम अगर पानी का छिड़काव बुवाई के बाद करते हैं तो एक दो दिन बाद खेत में चलने लायक हो जाये तो उस समय खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव कर लेना चाहिए ।

करीब 20 से 22 दिन बाद पहली बार खेत में पानी छिड़काव करते है। जब खेत चलने लायक हो जाता है तो उसमें नॉमिनी गोल्ड दवा का छिड़काव करते हैं। जिसमें करीब 80-100 मिलीलीटरी मात्रा को 200 से 250 लीटर पानी में घोल करके उसका छिड़काव करते हैं। तो इससे जो खरपतवार उगे होते हैं वो नष्ट हो जाते हैं। अगर आप इन बातों का ध्यान रखें तो हम धान की सीधी बिजाई से अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं।

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