किसान इस प्रतिबंधित कीटनाशक का इस्तेमाल करने से बचें
कार्बोफ्यूरान पर दुनिया सख्त हो रही है, अब किसानों को भी सावधानी बरतने की जरूरत
18 जून 2026, नई दिल्ली: किसान इस प्रतिबंधित कीटनाशक का इस्तेमाल करने से बचें – भारत में खेती को सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कुछ ऐसे कीटनाशक आज भी चर्चा में हैं, जिनके उपयोग को लेकर दुनिया के कई देशों ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। ऐसा ही एक नाम है कार्बोफ्यूरान (Carbofuran), जिसे दुनिया के सबसे विषैले कीटनाशकों में गिना जाता है।
हाल ही में चीन ने कार्बोफ्यूरान सहित चार अत्यधिक विषैले कीटनाशकों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर 1 जून 2026 से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पहले अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा और कई अन्य देशों में भी इस रसायन पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। ऐसे में भारतीय किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर इस कीटनाशक को लेकर इतनी चिंता क्यों जताई जा रही है।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
कार्बोफ्यूरान एक कार्बामेट वर्ग का कीटनाशक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से मिट्टी में रहने वाले कीटों और कुछ रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए किया जाता रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल कीटों को ही नहीं मारता, बल्कि इसके संपर्क में आने वाले मनुष्यों, पशुओं, पक्षियों और अन्य जीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
यदि इसका उपयोग बिना उचित सुरक्षा उपायों के किया जाए तो यह त्वचा, आंखों और श्वसन तंत्र के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। अत्यधिक संपर्क की स्थिति में चक्कर आना, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई, तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव और गंभीर विषाक्तता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। खेत में दवा डालने वाले श्रमिकों और किसानों के लिए इसका जोखिम और भी अधिक माना जाता है।
भारत में क्या है स्थिति?
भारत में कार्बोफ्यूरान पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसके अधिकांश फॉर्मुलेशन को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा चुका है। वर्तमान नियमों के अनुसार केवल Carbofuran 3% Encapsulated Granule (CG) फॉर्मुलेशन को निर्धारित फसलों और स्वीकृत उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त है। अन्य फॉर्मुलेशन अब उपयोग के लिए अनुमत नहीं हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी रूप से अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। जब दुनिया के कई विकसित देश और अब चीन भी इस रसायन को कृषि से बाहर कर रहे हैं, तब भारत में भी इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आज बाजार में कई कम विषैले और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इसके साथ ही एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM), जैविक नियंत्रण एजेंट, ट्राइकोडर्मा, बायोपेस्टीसाइड, फेरोमोन ट्रैप और अन्य आधुनिक तकनीकें भी किसानों को बेहतर परिणाम दे सकती हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को किसी भी कीटनाशक का उपयोग केवल कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। इससे अनावश्यक रासायनिक उपयोग कम होगा और उत्पादन लागत पर भी नियंत्रण रहेगा।
किसानों के लिए क्या सलाह?
यदि आपके पास कार्बोफ्यूरान आधारित उत्पाद उपलब्ध हैं, तो उनका उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञों या कृषि विभाग की सलाह अवश्य लें। बिना आवश्यकता और बिना अनुशंसित सुरक्षा उपायों के इसका प्रयोग न करें। खेत में काम करते समय दस्ताने, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें तथा बच्चों और पशुओं को ऐसे रसायनों से दूर रखें।
दुनिया भर में कृषि अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित खाद्य उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में किसानों के लिए बेहतर होगा कि वे अत्यधिक विषैले कीटनाशकों से दूरी बनाकर सुरक्षित और टिकाऊ विकल्पों को अपनाएं।
कार्बोफ्यूरान भले ही अतीत में एक प्रभावी कीटनाशक माना गया हो, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में किसानों की सुरक्षा, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए इसके उपयोग से बचना ही समझदारी होगी। आने वाले समय में वैश्विक कृषि का रुझान भी कम विषैले और पर्यावरण-अनुकूल समाधान की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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