कम पानी और सूखे वाले इलाकों में किसान धान की ये किस्में आजमाएं , 90 से 110 दिन में तैयार होगी फसल; मिलेगा बेहतर उत्पादन
10 अगस्त 2026, नई दिल्ली: कम पानी और सूखे वाले इलाकों में किसान धान की ये किस्में आजमाएं , 90 से 110 दिन में तैयार होगी फसल; मिलेगा बेहतर उत्पादन – देश में धान की खेती अलग-अलग जलवायु, मिट्टी और जल उपलब्धता वाली परिस्थितियों में की जाती है। कहीं खेतों में पानी भरा रहता है तो कहीं सिंचाई की सुविधा सीमित होने के कारण किसान वर्षा आधारित या ऊपरी भूमि में धान की खेती करते हैं। ऐसे में धान की किस्म का सही चुनाव अच्छी पैदावार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (NRRI) ने अलग-अलग कृषि पारिस्थितिकी और जल परिस्थितियों के लिए कई किस्में विकसित की हैं। ऊपरी और कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए NRRI की कुछ किस्में कम अवधि में तैयार होती हैं और सूखे की स्थिति को भी सहन कर सकती हैं।
भारत में अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के लिए अब तक 946 धान की किस्में जारी की जा चुकी हैं, जबकि NRRI ने इनमें से 105 किस्में विकसित की हैं। संस्थान के अनुसार, किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी, पानी की उपलब्धता और मौसम की स्थिति के अनुसार उपयुक्त किस्म का चुनाव करें तो बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
वंदना (RR 167-982)
वंदना (RR 167-982) ऊपरी भूमि और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी शुरुआती अवधि की धान की किस्म है। यह फसल करीब 90 से 95 दिन में तैयार हो जाती है। इसे ओडिशा और छोटानागपुर पठार के ऊपरी क्षेत्रों के लिए जारी किया गया है।
यह किस्म करीब 95 से 110 सेंटीमीटर ऊंचाई वाली है और सूखे तथा अम्लीय मिट्टी को सहन करने की क्षमता रखती है। इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं। यह ब्लास्ट और ब्राउन स्पॉट रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। इसकी औसत उत्पादकता करीब 3.5 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
कामेश (CR Dhan 40)
कामेश (CR Dhan 40) भी शुरुआती अवधि की किस्म है, जो करीब 110 दिन में तैयार होती है। यह बंधे हुए ऊपरी खेतों और वर्षा आधारित ऊपरी भूमि में खेती के लिए उपयुक्त है। इसे वर्ष 2008 में झारखंड और महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती के लिए जारी और अधिसूचित किया गया था। इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं तथा इसकी औसत उत्पादकता 3 से 3.5 टन प्रति हेक्टेयर है। कामेश किस्म ब्राउन स्पॉट, ब्लास्ट, गॉल मिज, व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर, तना छेदक और लीफ फोल्डर जैसे प्रमुख कीट एवं रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी बताई गई है। यह ऊपरी भूमि में सीधी बुवाई के लिए भी उपयुक्त है।
सहभागीधान (IR 74371-70-1-1-CRR-1)
सहभागीधान (IR 74371-70-1-1-CRR-1) करीब 100 दिन में तैयार होने वाली बौनी किस्म है। यह सूखे के प्रति अधिक सहनशील मानी जाती है और ऊपरी भूमि, वर्षा आधारित सीधी बुवाई तथा रोपाई—तीनों परिस्थितियों में उगाई जा सकती है।
इसे झारखंड और ओडिशा में खेती के लिए जारी और अधिसूचित किया गया है। इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं तथा भूसी का रंग सुनहरा होता है। इसकी औसत उत्पादकता करीब 3.8 से 4.5 टन प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म लीफ ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी तथा ब्राउन स्पॉट, शीथ रॉट, तना छेदक और लीफ फोल्डर आदि के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।
सत्यभामा (CR 2340-11)
सत्यभामा (CR 2340-11) करीब 105 से 110 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। इसे ओडिशा के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए जारी किया गया है। इसके दाने मध्यम और पतले होते हैं तथा यह ग्लूम डिसकलरेशन के प्रति सहनशील है।
सूखे की स्थिति में इसकी औसत उत्पादकता करीब 2.8 टन प्रति हेक्टेयर, जबकि अनुकूल परिस्थितियों में 4.7 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। यह किस्म येलो स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर और व्हॉर्ल मैगट जैसे प्रमुख कीटों के प्रति प्रतिरोधी है। इसके अलावा लीफ ब्लास्ट, राइस टुंग्रो वायरस, व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर, ब्राउन प्लांट हॉपर, गॉल मिज, हिस्पा और थ्रिप्स के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।
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