किसान भाई प्याज की खेती कर अच्छा लाभ कमाएं

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– डॉ. एस. के. त्यागी
वैज्ञानिक (उद्यान विज्ञान)
कृषि विज्ञान केंद्र, खरगोन

18 जनवरी 2022, भोपाल : किसान भाई प्याज की खेती कर अच्छा लाभ कमाएं

मृदा

प्याज सभी प्रकार की मिट्टीयों में उगाई जा सकता है जैसे कि रेतीली, दोमट, गाद दोमट और भारी मिट्टी। सफल प्याज की खेती के लिए सबसे अच्छी मिट्टी दोमट और जलोढ़ हैं जिसमें समुचित जल निकासी के साथ अच्छी नमी धारण क्षमता और पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ हों। प्याज की फसल के लिए मृदा पीएच 6.0 – 7.5 हो।

खेत की तैयारी

प्याज की रोपाई के लिए दो-तीन जुताइयां कल्टीवेटर चलाकर करें, यदि खेत में ढेलें हो तो एक बार रोटावेटर चलाकर खेत को समतल कर ले। इसके बाद रोपाई के लिए क्यारियां बनायें।

बीज की बुवाई

प्याज के बीज की बुवाई खरीफ मौसम में मई के अन्तिम सप्ताह से लेकर जून के मध्य तक करते हैं। प्याज की रबी फसल हेतु नर्सरी में बीज की बुवाई नवम्बर माह में करें।

पौध रोपण

रोपाई के लिए पौध का चयन करते समय उचित ध्यान रखें। कम और अधिक आयु के पौध रोपाई के लिए नहीं लें। रोपाई के समय पौध के शीर्ष का एक तिहाई भाग काट दें जिससे उनकी अच्छी स्थापना हो सके। रोपाई के समय पंक्तियों के बीच 15 सेंमी और पौधों के बीच 10 सेंमी इष्टतम अंतर हो।

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एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन

प्याज की फसल से भरपूर उत्पादन प्राप्त करने हेतु खाद एवं उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण की अनुशंसा के अनुसार करें। सामान्तया अच्छी फसल लेने के लिये 100 क्विंटल प्रति एकड़ अच्छी सड़ी गोबर खाद खेत की अंतिम जुताई के समय मिला दें साथ में जैव उर्वरक ऐजोस्पाइरिलियम और पीएसबी जीवाणु की 2 किलोग्राम/एकड़ की दर से मिट्टी में मिलायें। प्याज को 50 किलोग्राम नत्रजन, 16 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश एवं 8 किलोग्राम सल्फर प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। इसके लिए लगभग 100 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट, 30 किलोग्राम यूरिया, 40 किलोग्राम मयूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ रोपाई के पूर्व दें। इसके बाद 35 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ रोपाई के 30 दिन बाद तथा 35 किलोग्राम यूरिया रोपाई के 45 दिन बाद छिड़ककर दें या 12:32:16 50 किलोग्राम प्रति एकड़, अमोनियम सल्फेट 35 किलोग्राम प्रति एकड़, मयूरेट ऑफ पोटाश 35 किलोग्राम प्रति एकड़ रोपाई के पूर्व देवें। इसके बाद 40 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ रोपाई के 30 दिन बाद तथा 40 किलोग्राम यूरिया रोपाई के 45 दिन बाद छिड़ककर दें या 18:46:00 35 किलोग्राम प्रति एकड़, अमोनियम सल्फेट 35 किलोग्राम प्रति एकड़, मयूरेट ऑफ पोटाश 35 किलोग्राम प्रति एकड़ रोपाई के पूर्व दें इसके बाद 35 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ रोपाई के 30 दिन बाद तथा 35 किलोग्राम यूरिया रोपाई के 45 दिन बाद छिड़ककर दें। यदि मृदा में जिंक की कमी हो तो 4 किलोग्राम जिंक सल्फेट 33 प्रतिशत प्रति एकड़ बुआई के पूर्व उपयोग करें।

जैव उर्वरक का उपयोग

जैव उर्वरकों में सूक्ष्मजीव उपस्थित होते हैं। जैव उर्वरकों का उपयोग बीज उपचार या फिर मिट्टी में डालने के लिए किया जाता है। जब इन्हें बीज या मिट्टी में डालते हैं, तब इनमें उपस्थित सूक्ष्म जीव नत्रजन स्थिरीकरण, फॉस्फोरस घुलनशीलता और दूसरे विकास वर्धक पदार्थों द्वारा प्राथमिक पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि करते है जिससे पौधो का विकास होता है। प्याज एवं लहसुन अनुशंधान निदेशालय में किए गए प्रयोगों के आधार पर, जैविक उर्वरक ऐजोस्पाइरिलियम और फॉस्फोरस घोलने वाले जीवाणु की 2 किलोग्राम/ एकड़ की दर से प्याज फसल के लिए सिफारिश की गई है। ऐजोस्पाइरिलियम जैविक नत्रजन स्थिरीकरण द्वारा मिट्टी में नत्रजन की उपलब्धता को बढ़ाते हैं और फास्फोरस घोलनेवाले जीवाणु के इस्तेमाल से मृदा में मौजूद अनुपलब्ध फॉस्फोरस पौधों के लिए उपलब्ध होते हैं जिससे फास्फोरस उर्वरकों की क्षमता बढ़ती है।

घुलनशील उर्वरकों का पर्णीय छिड़काव
  • यदि वानस्पतिक वृद्धि कम हो तो 19:19:19 पानी में घुलनशील उर्वरक 1 किलोग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 15, 30 एवं 45 दिन बाद छिडकाव करें। इसके बाद 13:0:45 पानी में घुलनशील उर्वरक 1 किलोग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी मे घोलकर रोपाई के 60, 75 एवं 90 दिन बाद छिड़काव करें।
  • अच्छी उपज व गुणवत्ता के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण 200 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी मे घोलकर रोपाई के 45 और 60 दिन बाद छिडकाव करें।
खरपतवार प्रबंधन

प्याज की फसल को सकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नुकसान पहुंचाते हैं। प्याज में खरपतवारों से 40-80 प्रतिशत तक उपज में कमी दर्ज की गई है, उपज में कमी का प्रतिशत खरपतवारों की सघनता एवं फसल अवधि पर निर्भर करता है। रोपाई के 15 से 60 दिनों तक फसल से खरपतवारों की प्रतियोगिता सबसे अधिक होती है। फसल को खरपतवारों से मुक्त रखने के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को निकालते रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त खरपतवारनाशी जैसे पेंडिमेथेलिन 30 प्रतिशत ईसी 1.33 लीटर प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 3 दिन के अंदर छिड़काव करें या ऑक्सिफलौरफेन 23.5 प्रतिशत ईसी 250 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 3 दिन के अंदर छिड़काव करें। यदि खड़ी फसल में खरपतवारों की रोकथाम के लिए क्विज़लफॉप इथाइल 4 प्रतिशत+ ऑक्सिफलौरफेन 6 प्रतिशत ईसी 400 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 20 से 25 दिन बाद छिड़काव करें।

जल प्रबंधन

प्याज में मौसम, मिट्टी का प्रकार, सिंचाई की विधि और फसल की आयु के आधार पर सिंचाई की आवश्यकता निर्भर करती है। आमतौर पर रोपाई के समय, रोपाई से तीन दिनों बाद और मिट्टी की नमी के आधार पर 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जरूरत होती है। खरीफ फसल में 5-8 बार, पिछेती खरीफ फसल में 10-12 बार और रबी की फसल में 12-15 बार सिंचाई की जरूरत है। फसल परिपक्व होने के पश्चात (फसल कटाई से 10-15 दिन पहले) सिंचाई बंद करें। इससे भंडारण के दौरान सडऩ को कम करने में मदद मिलती है। अतिरिक्त सिंचाई प्याज की फसल के लिए हानिकारक होती है तथा शुष्क समय के बाद सिंचाई करने से दुफाड कंद बनते हैं।

प्याज में टपक सिंचाई का उपयोग

आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे टपक सिंचाई और फव्वारा सिंचाई से पानी की बचत और प्याज की विपणन योग्य उपज में बढ़ौतरी होती है। टपक सिंचाई में, पौध को 15 सें.मी. ऊंची, 120 सें.मी. चौड़ी क्यारियों में 10& 15 सें.मी. की दूरी पर लगायें। हर चौड़ी उठी हुई क्यारी में 60 सें.मी. की दूरी पर दो टपक लेटरल नलियां (16 मि.मी. आकार) अंतर्निहित उत्सर्जकों के साथ होनी चाहिए। दो अंतर्निहित उत्सर्जकों के बीच की दूरी 30-50 सें.मी. और प्रवाह की दर 4 ली./घंटा हो।

फव्वारा सिंचाई

फव्वारा सिंचाई प्रणाली में दो लेटरल (20 मि.मी.) के बीच की दूरी 6 मी. और निर्वहन दर 135 लि./घंटा हो। शोध परिणामों से पता चलता है कि बाढ़ सिंचाई की तुलना में टपक सिंचाई से ए श्रेणी के कन्द की अधिकता, 35-40 प्रतिशत पानी की बचत और 20-30 प्रतिशत श्रम की बचत के साथ कन्द उपज में 15-25 प्रतिशत वृद्धि होती है।

फर्टीगेशन

उर्वरकों को टपक सिंचाई द्वारा इस्तेमाल करना एक प्रभावी और कारगर तरीका है। इसमें पानी को पोषक तत्वों के वाहक एवं वितरक के रुप में उपयोग किया जाता है। उच्च विपणन योग्य कन्द उपज और मुनाफा प्राप्त करने के लिए 15 किलोग्राम नत्रजन प्रति एकड़ रोपाई के समय आधारीय मात्रा के रूप में और शेष नत्रजन का उपयोग छह भागों में, रोपाई से 60 दिनों तक 10 दिनों के अंतराल पर टपक सिंचाई के माध्यम से किया जाना चाहिए। टपक सिंचाई प्रणाली न केवल पानी की बचत करने में मदद करता है बल्कि भूमिगत जल में नत्रजन के रिसाव को कम करता है क्योंकि इस में पोषक तत्व का इस्तेमाल केवल जड़ों में किया जाता है, जिससे यह पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पौधों को मिलते हैं।

खुदाई

प्याज की फसल 50 प्रतिशत गर्दन गिरने के बाद निकाली जाये जो कि फसल परिपक्वता का संकेतक है। हालांकि, खरीफ के मौसम में रोपाई के 90-110 दिनों में एवं रबी में रोपाई के 120 -125 दिनों बाद कन्द परिपक्व हो जाते हैं, लेकिन पौधे सक्रिय विकास के चरण में ही रहते है और गर्दन गिरने के लक्षण नहीं दिखाई देते। ऐसे समय में रंगद्रव्य और प्याज के आकार को भी खरीफ मौसम के दौरान परिपक्वता के लिए सूचकांक के रूप में लिया जाता है। कन्द के संपूर्ण विकास के बाद,कटाई से दो-तीन दिन पहले गर्दन गिरावट को प्रेरित करने के लिए खाली ड्रम घुमायें। कटे हुए कन्द को तीन दिनों के लिए खेतों में सूखने के लिए छोड़ दें, जिससे कन्द शुष्क हो जाते हैं। इससे उनकी जीवनावधि बढ़ जाती है। तीन दिनों के बाद 2.0-2.5 सें.मी. गर्दन को छोड़ सबसे ऊपर का भाग हटा दें तथा उसके बाद 10-12 दिनों के लिए कन्दों को छाया में रखें जिससे कि बेहतर भंडारण हो सके। समयपूर्व कटाई करने से कार्यिकीय भार क्षती, सडऩ और अंकुरण के कारण सस्योत्तर नुकसान बढ़ता है।

उपज

औसतन 100-125 क्विंटल/ एकड़ तक उपज प्राप्त हो जाती है। प्याज भारत में रबी तथा खरीफ दोनों ऋतुओं में उगाया जाता है। भारत में 1285 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती की जाती है, जिससे 23262.3 हजार मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है। भारत में प्याज की औसत उत्पादकता 18.10 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है (हॉर्टिकल्चर स्टेटिस्टिक्स एट ए ग्लांस 2018)। भारत में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, हरियाणा तथा गुजरात प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य हैं। मध्य प्रदेश में 150.87 हजार हेक्टेयर में प्याज की खेती की जाती है जिससे 3701.01 हजार मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है। मध्य प्रदेश में प्याज की औसत उत्पादकता 24.53 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है (हॉर्टिकल्चर स्टेटिस्टिक्स एट ए ग्लांस 2018)। किसान भाई प्याज की खेती कर अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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