फसल की खेती (Crop Cultivation)

फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।

फसल की खेती (Crop Cultivation)

मुक्‍तिनाथ गेहूँ 3170 (NIAW 3170) गेहूँ किस्म: महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: मुक्‍तिनाथ गेहूँ 3170 (NIAW 3170) गेहूँ किस्म: महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म – NIAW 3170 (Muktinath Wheat 3170) ICAR-NRRI, पुणे द्वारा विकसित की गई है और प्रायद्वीपीय भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। मुख्य

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जीडब्ल्यू 451 (GW 451) गेहूँ किस्म: गुजरात क्षेत्र के लिए उच्च कठोरता और बेहतर प्रोसेसिंग वाली गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: जीडब्ल्यू 451 (GW 451) गेहूँ किस्म: गुजरात क्षेत्र के लिए उच्च कठोरता और बेहतर प्रोसेसिंग वाली गेहूँ किस्म – GW 451 नवसारी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है और केंद्रीय एवं पश्चिमी भारत में प्रचलित है। मुख्य विशेषताएं: यह

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एचआई 1633 (HI 1633) (पुसा व्हीट 1633) गेहूँ किस्म: केंद्रीय क्षेत्र के लिए उच्च-उपज क्षमता वाली किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एचआई 1633 (HI 1633) (पुसा व्हीट 1633) गेहूँ किस्म: केंद्रीय क्षेत्र के लिए उच्च-उपज क्षमता वाली किस्म – HI 1633 ICAR-IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है और मध्य भारत में सिंचित खेती के लिए उपयुक्त

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करन नरेंद्र (Karan Narendra) (DBW 222) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी भारत के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूँ

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: करन नरेंद्र (Karan Narendra) (DBW 222) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी भारत के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूँ – DBW 222 (Karan Narendra) पूर्वी भू-भागों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में उपयुक्त है और रोग-प्रतिरोध क्षमता के लिए

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पीबीडब्ल्यू 826 (PBW 826) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: पीबीडब्ल्यू 826 (PBW 826) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म – PBW 826 पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है और पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश पूर्वी, बिहार और

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करन वंदना (Karan Vandana) (DBW 187) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: करन वंदना (Karan Vandana) (DBW 187) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त – DBW 187 जिसे Karan Vandana भी कहा जाता है, ICAR-IIWBR द्वारा विकसित की गई किस्म है, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सिंचित क्षेत्रों

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आरएयू 627 (RAU 627) गेहूँ किस्म: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक अनुकूल किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: आरएयू 627 (RAU 627) गेहूँ किस्म: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक अनुकूल किस्म – RAU 627 राष्ट्रीय बीज निगम और बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक किस्म है, जो पूर्वी उत्तर

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सीजी 1807 (CG 1807) गेहूँ किस्म: छत्तीसगढ़ के सीमांत जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: सीजी 1807 (CG 1807) गेहूँ किस्म: छत्तीसगढ़ के सीमांत जलवायु क्षेत्रों के लिए उपयुक्त गेहूँ किस्म – CG 1807 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा विकसित की गई है और गर्म जून-जुलाई के बाद बुवाई करने वाले किसानों

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सीजी 1801 (CG 1801) गेहूँ किस्म: छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लिए उपयुक्त सिंचित एवं वर्षा आधारित फसल

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: सीजी 1801 (CG 1801) गेहूँ किस्म: छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लिए उपयुक्त सिंचित एवं वर्षा आधारित फसल – CG 1801 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा विकसित एक बहुमुखी गेहूँ किस्म है, जो सिंचित और वर्षा आधारित दोनों परिस्थितियों में

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एमपी 3478 (MP 3478) गेहूँ किस्म: मध्य प्रदेश के लिए सर्वाधिक उपज वाली किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एमपी 3478 (MP 3478) गेहूँ किस्म: मध्य प्रदेश के लिए सर्वाधिक उपज वाली किस्म – एमपी 3478 जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर द्वारा विकसित की गई उच्च-उपज गेहूँ किस्म है, जो मध्य भारत के गर्म एवं सिंचित क्षेत्रों

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