मध्य भारत में गेहूं की खेती के गुर
प्रजातियों का विकास: अधिक उत्पादकता, शीघ्र पकने वाली तथा सूखारोधी प्रजातियों का विकास। – अनुमोदित तकनीकों के मूल्यांकन एवं पुनस्थापन द्वारा उत्पादन लागत कम करना। – खरीफ फसल कटाई के बाद खेत की सीमित जुताई। – अधिक जल-उपयोग क्षमता वाली
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