पशुपालन (Animal Husbandry)

मत्स्य बीज संचयन के पूर्व प्रबंधन

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  • डॉ. प्रीति मिश्रा (सहायक प्राध्यापक)
    मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय, जबलपुर
  • डॉ. माधुरी शर्मा (सह-प्राध्यापक)
    नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान
    विश्वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.)
    ई-मेल- preetimishra_v@yahoo.co.in

 

4 अक्टूबर 2021, मत्स्य बीज संचयन के पूर्व प्रबंधन –

मत्स्य बीज संचयन के पूर्व तालाब का प्रबंधन

मत्स्य पालन की प्राथमिक आवश्यकता मछली तालाब के लिए भूमि की उपलब्धता और गुणवत्ता है। बारहमासी जल भरे तालाबों में वर्ष भर मछलियों का पालन किया जा सकता है।
स्पॉन से जीरा (फ्राई) अवस्था

तालाब निर्माण
  • मछली संचय के लिए तालाब का क्षेत्रीय आयतन कम से कम 1 हे. का होना चाहिए।
  • तालाब का चयन 0.2 हेक्टेयर से 5.0 हेक्टेयर एवं पानी की गहराई 1.0 से 1.5 मीटर किया जाना चाहिए।
  • नर्सरी तालाबों में पानी की गहराई 0.5-1.0 मीटर होना आवश्यक होता है इसके साथ ही तालाब में 8-9 माह तक पानी भरा रहे।
मछली पालन हेतु तालाब की तैयारी
  •  मछली संचय के लिए तालाब का क्षेत्रीय आयतन कम से कम 1 हेक्टे. का हो। 
  • तालाब को अप्रैल/मई माह में सुखाकर उसके तल की जुताई या गुड़ाई करें।
  • चिकनी मिट्टी में जल धारण क्षमता अधिक होती है।
  • तालाब के घास/पौधों की सफाई करें।
  • तालाब के बंधों में दोनों ओर के ढलानों में आधार और ऊंचाई का अनुपात सामान्यत: 2.1 अथवा 1.5:1 फ़ीट हो।
  • सदाबाहर तालाब में सफाई के लिए 1000 कि.ग्रा./एकड़/मी. की दर से महुआ की खली डालें।
मृदा (मिट्टी) और जल की उपयुक्तता
  • मत्स्य पालन के लिए तालाब की मिट्टी में रेत (सेंड) 40 प्रतिशत, सिल्ट 30 प्रतिशत तथा क्ले 30 प्रतिशत एवं पीएच 7.5 से 8.5, घुलित ऑक्सीजन 5 मिलीग्राम प्रति लीटर होना आवश्यक है।
  • तालाब का रंग हल्का भूरा होना चाहिए। जो अच्छे प्लैंकटन का द्योतक है।
    परभक्षी (मांसाहारी) एवं जंगली मछलियों का उन्मूलन
  • एक हेक्टयेर के तालाब में जिसकी गहराई एक मीटर या उससे अधिक हो उसमे 25 क्विंटल की दर से महुआ की खली का प्रयोग करने से (10-15 घंटे के बाद इसके रसायनिक तत्व (सैपोनीन) के प्रभाव से) अवांछनीय मछलियां मर जाती हैं और जल की सतह पर उतराने लगती हैं ।
  • इस विष के प्रभाव से मरी मछली खाने योग्य रहती है।
  • खली के रसायनिक तत्व का प्रभाव पंद्रह से बीस दिनों में समाप्त हो जाता है और महुआ की खली सडक़र खाद बन जाती है, जो मछली का भोजन अर्थात् प्लवक (प्लैंकटन) के उत्पादन को बढ़ा देता है।
अनावश्यक जलीय पौधों का उन्मूलन
  • तालाबों में पानी की सतह पर जलकुम्भी, पिस्टीया, एजोला तथा लेमना आदि वनस्पतियां उगी रहती हैं। जो मछलियों को तैरने तथा आहार लेने में व्यवधान उत्पन्न करती हैं। इसलिए उन्हें उखाडक़र अलग कर दें।
  • इन्हें नष्ट करने के लिये रसायनिक तत्वों में 2-4 डी सोडियम लवण, हेक्सामार, डिक्लोवेनिल 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा सिमाजिन 5 पीपीएम (50 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर) जल क्षेत्र में डालें।

जलीय उत्पादन क्षमता की वृद्धि के लिए चूने का प्रयोग
  • तालाब का पानी हल्का क्षारीय होना लाभदायक होता है। तालाब में चूने का प्रयोग मत्स्य बीज संचय के एक माह पूर्व करें।
  • तालाब की उत्पादकता में वृद्धि के लिए वर्ष भर में एक हेक्टेयर जल क्षेत्र में 250 ग्राम चूना डालें।
खाद का प्रयोग
  • मत्स्य बीज संचयन के 15 दिन पूर्व एवं चूना डालने के 7-8 दिन बाद ताजा गोबर को पानी में मिलकर 5000-6000 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से डालने से तालाब में प्लैंकटन का उत्पादन बहुत अच्छा होता है।
  • नर्सरी तालाब में अकार्बनिक खाद की आवश्यकता नहीं होती है। महुआ खली 75त्न+ गोबर 20त्न+ सिंगल सुपर फॉस्फेट 5त्न के साथ मिलकर डालना चाहिए। ये मिश्रण 1000 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से स्पान के संचयन के 2-3 दिन पूर्व डालें एवं बचा हुआ 50त्न पालन तालाब में 5-7 दिन के अंतराल से प्लैंकटन की मात्रा को देखकर डालें। स्पान संचयन से तीन दिन पहले तालाब में मूंगफली/सरसों की खली 100 किलोग्राम /एकड़/मी. की दर से प्रयोग करने पर काफी अच्छा परिणाम मिलता है।
जलीय कीटों का उन्मूलन
  • नर्सरी तालाब में स्पान संचयन से एक दिन पूर्व फ्राई कैचिंग नेट/जाल से मेंढक के बच्चे, केकड़ा या कीड़े-मकोड़ों को निकाल दिया जाता है।
  • तालाब में 25-30 ली. डीजल/एकड़/ मी. में 30 मि.ली. नुभान (कीटनाशक दवा) मिलकर छिडक़ाव किया जाता है।
  • जिससे पानी की सतह पर डीजल की एक फिल्म (परत) बन जाती है जिससे हवा से सांस लेने वाले जलीय कीट नष्ट हो जाते हैं।
स्पान का संचयन
  • नर्सरी में 16 से 20 लाख स्पान/ एकड़/मी. की दर से सुबह या शाम में संचयन किया जाना चाहिये।
  • संचयन के पूर्व मत्स्य स्पान को अनुकूलन के लिए पैकेट/कंटेनर सहित तालाब में दस से पंद्रह मिनट स्थिर रहने दें।
  • इसके बाद पैकेट का मुंह खोलकर धीरे से स्पान को पानी में छोड़ दें।
पूरक आहार
  • अच्छी बढ़त के लिए नर्सरी तालाब में उपलब्ध प्राकृतिक भोजन के अलावा मछलियों को ऊपर से भी आहार दें।
  • पूरक आहार के रूप में बारीक़ पिसा हुआ सरसों की खली और चावल का कोड़ा का मिश्रण बारीक कपड़े में छान कर, सूखा प्रयोग किया जाता है।
  • पीसी हुई खली उपलब्ध नहीं होने पर इस मिश्रण की आवश्यक मात्रा को रात भर फुला कर सुबह पानी में पतला घोल कर छिडक़ाव किया जा सकता है ।
  • पूरक आहार सुबह या शाम में किस्तों में प्रयोग करें।
  • सप्ताह में एक दिन भोजन का प्रयोग बंद रखें।
  • एक लाख स्पान के लिए संचयन की तिथि से सात दिनों तक 600 ग्रा. दूसरे सप्ताह में 1200 ग्रा. एवं तीसरे सप्ताह में 1800 ग्रा. पूरक आहार प्रतिदिन की दर से प्रयोग किया जाना चाहिये ।
  • पूरक आहार में कुल मात्रा का एक प्रतिशत खनिज लवण (एग्रिमीन, फीशमीन आदि) का प्रयोग फायदेमंद रहता है।
  • 20वें दिन मत्स्य बीज का आकार 1 इंच &1.5 इंच हो जाता है और यह बड़े तालाब (संचयन तालाब) में या अंगुलिकाओं को तैयार करने वाले तालाब में (रियारिंग तालाब) छोडऩे योग्य हो जाता है ।
  • यदि मत्स्य बीज निष्कासन में विलम्ब हो तो नर्सरी में उपलब्ध बीज की अनुमानित वजन का 2 प्रतिशत वजन के बराबर (2 से 2.5 किग्रा.) पूरक आहार का प्रयोग तब तक करते रहे जब तक मत्स्य बीज का उठाव न हो जाए ।
मत्स्य बीज का निष्कासन एवं परिवहन
  • मत्स्य बीज/ फ्राई के निष्कासन के लिए सुबह या शाम का समय जब मौसम ठंडा रहता है, उपयुक्त होता है ।
  • मत्स्य बीज निष्कासन से 1 दिन पूर्व ही पूरक आहार का प्रयोग बन्द कर दें।
  • मत्स्य बीज को निकालकर 2 से 4 घंटा तक 4&2&1मी. में हापा में रखा जाता है, जहां उनकी सघनता अधिक होती है, इस अवस्था में मत्स्य बीज के पेट से मल मूत्र निकल जाता है और परिवहन के दौरान उनकी मृत्यु दर कम हो जाती है ।
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