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  • डॉ. माधुरी सलहामगे, डॉ. अंकिता ठाकरे
    अपोलेा कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसीन, जयपुर
    कॉलेज ऑफ वेटरनरी सायन्स एंड एनिमल हसबेंडरी अंजोरा, दुर्ग

20  मई 2021, जयपुर। पशुओं में हीटस्ट्रोक – तापघात हीटस्ट्रोक या उष्माघात अवस्था जिसमें पीडि़त पशु का तापमान अत्याधिक धूप या गर्मी की वजह से बढऩे लगता इस स्थिति में पशु के शरीर का प्राकृतिक कुलिंग सिस्टम सुचारू रूप से काम बंद कर देता है। जिसकी वजह से पशु का तापमान कम नहीं हो पाता। जिसके परिणाम स्वरूप तापमान बढ़ता जाता है और अगर इस तापमान को बाहरी मदद देकर या घरेलू उपचार या पशु चिकित्सक की सहायता से कम नहीं किया गया तो बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है और पीडि़त पशु की जान भी जान सकती है।

हीटस्ट्रोक के कारण
  • अत्याधिक गर्मी या तेज धूप के संपर्क में आने के कारण हीटस्ट्रोक होता है, जिसमें शरीर का तापमान बढऩे लगता है।
  • जल – अभाव के कारण से भी यह स्थिति उत्पन्न होती है।
  • हाइपोथेलमस का आघात।

हीटस्ट्रोक के लक्षण
  • पशु के शरीर का तापमान 106 डिग्री से 110 डिग्री फार्नहाइट तक बढ जाता है।
  • पशु सुस्त हो जाता है।
  • खाना-पीना बंद कर देना।
  • पसीना आना बंद हो जाता है।
  • पशु के हृदय की धड़कन तेज हो जाती है।
  • हीटस्ट्रोक से पीडि़त पशु हांफने लगता है।
  • श्वास गति तेज हो जाना और पशु मुँह खोलकर और जीभ बाहर निकालकर सांस लेने लगता है।
  • आँख की श्लेष्मा झिल्ली लाल हो जाती है।
  • दुधारू पशु का दूध उत्पादन घट जाता है।
  • अंत में पशु मूर्छित और शक्तिहीन-सा हो जाता है।
पशुओं में हीटस्ट्रोक का प्राथमिक उपचार
  • सर्वप्रथम पशुओं के शरीर का तापमान नियंत्रित करना चाहिए। इसलिए पशु को छायादार, हवादार व ठंडे स्थान पर रखना चाहिए।
  • शरीर के तापमान को कम करने के लिए शीतल जल से स्नान कराएं, माथे पर बर्फ रखें तथा सूती कपड़े की ठंडे पानी में भीगी हुई पट्टी लगाएं।
  • पशु को पानी से भरे गड्डे में रखना चाहिए अथवा पूरे शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करना चाहिए।
  • संभव हो तो बर्फ अल्कोहल पशुओं के शरीर पर रगडऩा चाहिए।
  • ठंडे पानी में तैयार किया हुआ चीनी, भुने हुए जौ का आटा व थोड़ा नमक का घोल पिलाना चाहिए।
  • पुदीना व प्याज का अर्क पशु को देना चाहिए।
  • शरीर के तापमान को कम करने वाली औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
  • शरीर में पानी एवं लवणों की कमी को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रो लाइट थैरेपी देनी चाहिए।
  • प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क कर पशु चिकित्सक को बुलाकर पूरा उपचार कराएं।

हीटस्ट्रोक से बचाव के तरीके
  • गर्मियों के मौसम में पशु को दिन में 3-4 बार ठंडा पानी पिलाएं।
  • डेरीे को इस प्रकार बनाए की सभी पशुओं के लिए उचित स्थान हो ताकि हवा को आने जाने के लिए जगह मिलिए ध्यान रहे की शेड खुला हवादार हो ।
  • पशुओं को गर्मियों से बचाने के लिए पशुपालक उनके आवास में पंखे कूलर और फव्वारा सिस्टम लगा सकते
  • आवास के आस-पास छायादार पेड़ होने चाहिए ताकि बाड़ा ठंडा
  • पशु को प्रतिदिन 1 से 2 बार ठंडे पानी से नहलाना
  • पशु के लिए पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

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