बछड़ा-बछिया का पोषण

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‘आज की बछिया कल की दुधारू पशु है ‘

24 अप्रैल 2022,  बछड़ा-बछिया का पोषण – नवजात बछड़े-बछियों का पालन-पोषण और उचित प्रबंधन किसी भी डेयरी विकास कार्यक्रम की सफलता का आधार होता है। जीवन के आरम्भिक दिनों में पोषण का अनुकूल स्तर शीघ्र विकास और जल्द से जल्द यौवन अवस्था प्राप्त करने में मदद करता है। बछड़े-बछियों के शरीर के वजन को अनुकूल रखने के लिए उनकी ध्यान पूर्वक देख-रेख करनी चाहिए, ताकि वे यौवन अवस्था में ही लगभग 70-75 प्रतिशत परिपक्व शरीर का वजन प्राप्त कर लें। छोटे बछड़े-बछियों को अपर्याप्त आहार देने से प्रथम ब्यात की उम्र बढ़ जाती है और कुल मिलाकर जीवन भर उनकी उत्पादकता में हानि होती है। अत: दुग्ध उत्पादकों को छोटे बछड़े-बछियों को अपर्याप्त आहार देने के दुष्प्रभाव को पहचानने की आवश्यकता है।

नवजात बछड़े-बछियों को खीस/नव दुग्ध पिलाने का महत्व

खीस (कालोस्ट्रम) गाय/भैंसों के ब्याने/बच्चे को जन्म देने के बाद उनकी स्तनीय ग्रन्थी के द्वारा उत्पादित पहला दूध होता है, जिसमें प्रोटीन, वसा, खनिज और रोग निरोधक प्रचूर मात्रा में होते हैं।

बछड़े/बछियों को जन्म के 1-2 घंटे के अन्दर ही खीस/नव दुग्ध मिल जाना चाहिए। नवजात बछड़े/ बछिया की आहार नली खीस में उपलब्ध इम्युनोग्लोबुलिन्स (रोग निरोधक) को अवशोषण कर उनके रक्त धारा तक पहुँचाने में सक्षम होती है। इस प्रकार से माँ के द्वारा बछड़ा/ बछिया तक पहुँचायी गयी रोग निरोधक क्षमता को ‘‘निष्क्रिय’’ रोग निरोधक (एन्टिबॉडी) क्षमता कहते हैं। बछड़े/बछियों में जन्म से एक घंटे के अंदर इस प्रकार से खीस में उपलब्ध रोग निरोधक (एंटीबॉडी) को अवशोषण करने की क्षमता सबसे अधिक होती है और छह घंटे तक काफी अच्छी अवस्था में रहती है। इसके पश्चात, बछड़े/बछियों में इसको अवशोषण करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है। वैज्ञानिक आधार पर, जीवन के पहले 24 घंटों में बछड़े/बछियों को खीस के 3-4 आहार प्राप्त होने चाहिए।

खीस (कोलोस्ट्रम) पिलाने का महत्व
  • नवजात बछड़े/बछियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। भैंस के बच्चे (कटड़ा/कटड़ी) में माँ के द्वारा रोग निरोधक स्थानान्तरित करने की क्षमता और भी कम होती है।
  • खीस नवजात बछड़े/बछियों के लिए प्रकृति का अमूल्य उपहार है। सम्पूर्ण दूध की तुलना में इसमें 4-5 गुना अधिक प्रोटीन, 10 गुना विटामिन ए और पर्याप्त मात्रा में खनिज तत्व होते हैं।
  • खीस हल्के मृदु-सारक (हल्के जुलाब) का कार्य करता है, जो नवजात बछड़े/बछियों की आंतों से पाचक अवशेषों, गंदा मल (मैकोनियम) को साफ करने में मदद करता है।
दुग्ध प्रतिस्थापक/विकल्प

छोटे बछड़े/बछियों को कम से कम दो महीनों तक रोज दो लीटर दूध पिलाया जाना चाहिए, जिसको धीरे-धीरे अच्छी गुणवत्ता वाले शिशु-आहार (काल्फ स्टार्टर) से बदलना चाहिए। दुग्ध उत्पादक इस दूध को बछड़े/बछियों को पिलाने की बजाय अपनी रोज मर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेच देते हैं। इसके परिणामस्वरूप बछड़े/बछियों को दूध की कमी हो जाती है जिसका उनके विकास और परिपक्व होने की उम्र पर गम्भीर प्रभाव पड़ता है। यह दुधारू पशुओं के उत्पादक जीवन को कम कर देता है।

छोटे बछड़े/बछियों के आहार के लिए दुग्ध प्रतिस्थापक एक किफायती वैकल्पिक आहार हो सकता है जिसमें स्किम मिल्क पाउडर, सोयाबीन की खली, मूंगफली की खली, खाने का तेल, अनाज, विटामिन्स, खनिज मिश्रण, संरक्षक पदार्थ आदि सम्मिलित होते हैं। दुग्ध प्रतिस्थापक से बनाये गये पुनर्गठित दूध की कीमत सम्पूर्ण दूध की कीमत की एक तिहाई होती है। पुनर्गठित दुग्ध प्रतिस्थापक में दूध के समान लगभग सभी आवश्यक पौष्टिक तत्व होते हैं। यदि एक बछड़े/बछिया को सम्पूर्ण दूध के स्थान पर दो लीटर पुनर्गठित दूध पिलाया जाये तो एक किसान प्रति बछड़े/बछिया प्रति दिन पर्याप्त राशि बचा सकता है। बछड़े/बछियों को आरम्भ की उम्र में ही दुग्ध प्रतिस्थापक, उसके बाद शिशु-आहार (काल्फ स्टार्टर) खिलाना शुरू कर देने से परिपक्व होने की उम्र 12 महीने तक कम हो सकती है।

दुग्ध प्रस्थिापक को आहार में देने की विधि

दुग्ध उत्पादकों की सामान्य आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव दिया जाता है कि खीस पिलाने के बाद एक लीटर पुनर्गठित दूध को एक लीटर सम्पूर्ण दूध के साथ पिलाना चाहिए। धीरे-धीरे सम्पूर्ण दूध को हटा देना चाहिए और एक महीने की उम्र तक पुनर्गठित दूध को बढ़ा कर दिन में दो लीटर कर देना चाहिए, जिसे दो महीने की आयु तक जारी रखना चाहिए।

दूसरे सप्ताह से अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी घास एवं काल्फ स्टार्टर को भी खिलाना चाहिए, जोकि रूमेन (जुगाली करने वाले पशुओं का पहला पेट) के शीघ्र विकास और वांछित विकास दर को प्राप्त करने में मदद करेगा।

दुग्ध प्रतिस्थापक के संघटक संयोजन
संघटक  मात्रा (कि.ग्रा.)
राइस पॉलिश फाईन 14
दला हुआ मक्का का दाना 20
मक्का ग्लुटन 16
मूंगफली की खली 15
सोयाबीन की खली 12
रिकम्ड मिल्क पाउडर 10
बायपास फैट 4
शीरा 6
खनिज मिश्रण 2
आयोडीन युक्त नमक 0.8
प्रतिजैविक 0.1
विटामिन्स 0.02
संरक्षक 0.08

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