सांसद आदर्श ग्राम योजना के प्रति उदासीनता क्यों ?

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 71वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की रिकॉर्ड फसल पैदावार के लिए भूरि – भूरि प्रशंसा की। उन्होंने किसानों को चिन्ता मुक्त करने तथा उनकी आमदनी अगले पांच साल में दुगनी करने का आश्वासन दिया। लाल किले से ही 15 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री ने सांसद आदर्श ग्राम योजना प्रारम्भ करने की योजना की घोषणा की थी, और इस योजना को 11 अक्टूबर 2014 को श्री जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर प्रारंभ भी कर दिया था। सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह योजना सांसद के मार्गदर्शन में, सांसद के नेतृत्व में, सांसद के प्रयत्नों में आगे बढ़ाई जायेगी। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 2016 तक एक गांव मॉडल के तौर पर विकसित करना था। और उसके अनुभव के आधार पर वर्ष 2019 तक प्रत्येक सांसद को दो और गांवों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है वर्ष 2019 के बाद हर वर्ष प्रत्येक सांसद द्वारा एक नये गांव को विकसित करने की इस योजना का भी लक्ष्य है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2019 तक ढाई हजार गांवों तक पहुंचने की कल्पना की गयी थी।
अभी तक ज्ञात जानकारी के अनुसार देश के 543 लोकसभा सांसदों में से 500 सांसदों ने अपने क्षेत्र में एक गांव का चयन आदर्श ग्राम योजना के लिये किया है। अभी भी 43 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक अपने क्षेत्र के गांव को आदर्श बनाने के लिये उसका चयन तक नहीं किया है। राज्यसभा के 253 सांसदों में से 203 ने ही गांवों के चयन के प्रयास किये हैं। राज्यसभा के 50 सांसद तो अभी ग्राम का चयन तक नहीं कर पाये। यह सांसदों की इस योजना तथा ग्राम व किसानों के विकास के प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है। आदर्श ग्राम विकसित करने की इस योजना में पूरा दायित्व सांसदों को दिया गया है, यदि वह चयनित गांव की समस्याओं को पहचान कर उनके निराकरण के लिये अपने दायित्वों का निर्वाह करते तो लगभग 1600 गांव वर्ष 2017 तक आदर्श गांवों के रूप में विकसित हो जाते। यदि कुछ सांसदों ने इस दिशा में कार्य कर अपने चयनित गांवों को आदर्श बनाने का कार्य किया भी है तो उसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए। उनके प्रयासों की सूचना देशवासियों तक नहीं पहुंच पा रही है। यह सरकारी तंत्र की इस योजना के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। इस योजना की असफलता का असर प्रधानमंत्री की देश के किसानों की आमदनी पांच वर्ष में दुगनी करने के प्रयासों पर भी पड़ेगा।

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