कुसुम बनी सशक्तिकरण की नई मिसाल

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सफलता की कहानी बयां करती हुई कुसुम रानी राधा तेजस्विनी स्वसहायता समूह की सदस्य जो छतरपुर जिले के लोकेशन सेंटर गुलगंज अंतर्गत कलस्टर ग्राम बम्होरी द्वारा तेजस्विनी ने उन अयामों को छूना शुरू कर दिया गया है। जिन आयामों की हम कहानी किताबों में पढा़ करते थे। कुसुम रानी बताती है कि शुरू में समूह बनाया तो लग रहा था कि क्या हम लोग कुछ ऐसा काम या धंधा कर पायेगे। मेरे पास थोडी सी जमीन तो थी परन्तु मैं उस जमीन का सही तरह से उपयोग नहीं कर पा रही थीं। समूह की बैठकों में स्वास्थ्य एवं उन्नत खेती के तरीको को बताया गया। एक दिन मैंने अपनी थोड़ी सी जमीन में क्या काम करूं के बारे में सोचा। अगले ही दिन समूह की मीटिंग में अपनी बात रख दी।
मोबेलाइजर द्वारा बताया गया कि आप सब्जी उत्पादन का काम क्यों नहीं करती। मैंने मन में ठान लिया कि अब मैं सब्जी उत्पादन ही करूंगी लेकिन बीज की समस्या थी। उन्होंने मोबेलाइजर के सामने अपनी बात रखी। मोबेलाइजर द्वारा बताया गया कि यह सबसे अच्छा मौका है अभी हाल में तेजस्विनी को उद्यानिकी विभाग द्वारा बीज प्रदाय किये गये है। कुछ बीज वहां से और कुछ बीज बाजार से खरीद कर सब्जी उत्पादन का काम शुरू करने की सलाह दी।
उन्होंने दो पैकेट बीज उद्यानिकी एवं दो अन्य बीज को बाजार से खरीद कर अपने खेत में लगा दिये और अब सब्जी का उत्पादन होने लगा तो उन्होंने खुद अपनी दुकान लगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे अच्छी खासी आमदनी होने लगी। आज हम लोग लगभग 3000 रू. मासिक बचत कर लेते है तथा हमारे परिवार को खाने के लिये हमेशा ताजी सब्जी प्राप्त होती रहती है।
कार्यक्रम से जुड़कर श्रीमती कुसुम रानी की आर्थिक स्थिति में बहुत बदलाव आया है। आज उनके हाथ में स्वयं की कमाई पूंजी है। इस पूंजी से उसको अपने पति के सामने हाथ नही फैलाने पड़ते। साथ ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में अहम योगदान है एवं उनकी खेती की जमीन भी अब पहले से अधिक उपजाऊ हो गयी है। श्रीमती कुसुम रानी बताती है कि तेजस्विनी कार्यक्रम से जुडऩे के बाद सामाजिक बदलाव आया जिसमें आज उनकी समाज में पहले से अधिक मान सम्मान प्राप्त होने लगा।

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