मध्यप्रदेश में गन्ना – कण्डवा ने बजाई खतरे की घंटी

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                                                          (विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र नरसिंहपुर और इसके आस-पास के इलाकों में गन्ना फसल पर बढ़ती बीमारियों से खतरे की घण्टी बज उठी है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह चौंकाने वाली बात सामने आयी है कि पूरे नरसिंहपुर क्षेत्र में गन्ना फसल की सभी प्रजातियों में कण्डवा रोग का प्रकोप पाया गया है। यदि इस रोग पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह गन्ना जैसी नगदी फसल का कबाड़ा कर देगा।

जानकारी के मुताबिक विगत दिनों बसन्त दादा शुगर इंस्टीट्यूट पूना द्वारा नरसिंहपुर जिले के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया। वरिष्ठ पैथालाजिस्ट डॉ. वी.एच. पवार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिर्फ एक प्रजाति को-9011 को छोड़कर अन्य सभी प्रजातियों में कण्डवा रोग का प्रकोप पाया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के लिए अनुसंशित नहीं की गई किस्मों को किसान बहुतायत में लगा रहे हैं इसलिए यह प्रकोप आया है। यहां गन्ने की लोकप्रिय किस्म को-एम 261 में कण्डवा रोग 50 फीसदी से भी अधिक पाया गया है। पूरे क्षेत्र में इस रोग का प्रकोप 5 से 25 प्रतिशत तक है जो चिन्ता का विषय है।

क्या है कण्डवा रोग ?
कण्डवा रोग (स्पोरिसोरियम स्कीटेमीनिया) जिसका सर्वाधिक प्रकोप पाया गया है, एक फफूंदीजनक, हवा से फैलने वाली बीमारी है। इसका प्रकोप अप्रैल, मई में अधिक तापमान, शुष्क मौसम एवं सिंचाई की कमी से अधिक फैलता है। यह रोग उत्पादन एवं शक्कर उत्पादन पर विपरीत असर डालता है।

डॉ. पवार के मुताबिक क्षेत्र में कण्डवा रोग का प्रकोप जड़ी फसल में अधिक है साथ ही सिंचाई के अभाव वाले खेतों में अधिक प्रकोप दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि कृषकों द्वारा उगाई जाने वाली जातियों को देखें तो को-238 एवं को-9011 को छोड़कर अन्य प्रजातियों का बीज महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से लाया गया है। ये प्रजातियां हैं वीएसआई 08005, को-वीएसआई 03102, को-एम 0265, एमएस 10001, को-8011, को-92005 और को-8014। यह सारी प्रजातियों का बीज अनुसंधान केन्द्रों से नहीं वरन् मुख्यत: साथी कृषकों से लिया गया है। दो-चार प्लाटों को छोड़कर अधिकतर खेतों में दो या अधिक जातियों का मिक्चर देखने को मिला है।
नरसिंहपुर एवं प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र होने से प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी यहां से गन्ना बीज ले जाया जाता है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो पूरे प्रदेश में संक्रामण फैल सकता है।

नरसिंहपुर जिला मध्यप्रदेश का प्रमुख गन्ना उत्पादक जिला है। इस क्षेत्र में गन्ना व पेडी फसल में बढ़ते हुए रोग चिन्ता का विषय है अगर इसकी रोकथाम के प्रयास नहीं किये गये तो परिणाम भयावह हो सकते हैं। सघन बीजोत्पादन कार्यक्रम ही इसका निदान है। मैं आशा करता हूं कि कृषि विभाग तुरन्त शक्कर कारखानों, अनुसंधान केन्द्र एवं उन्नत कृषकों से मंथन कर आगामी बुआई सत्र से ही इसकी ब्यूह रचना करेगा।
– डॉ. साधुराम शर्मा
                            पूर्व गन्ना आयुक्त एवं गन्ना विशेषज्ञ

 

बिना प्रमाणिक बीजोत्पादन के बाहर से नया बीज लाकर लगाना व्यर्थ है, कृषकों के लिए चिन्तनीय है। मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री से निवेदन है कि गन्ने की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए गन्ना विकास पर अधिक ध्यान दिया जावे। गन्ने की उन्नत जातियों के रोगरहित बीज उत्पादन हेतु एक बड़ा प्रक्षेत्र स्थापित किया जाना चाहिए। यह कृषक हितकारी पहल आगामी बुआई सत्र से की जाती है तो उचित होगा।
  – सी.एस. तिवारी
                          प्रगतिशील गन्ना उत्पादक, नरसिंहपुर

 

 

 

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