रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

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  • बीज में कीट, फफूंद एवं खरपतवार के प्रकोप से बचाने के लिए बीजों के भंडारण से पहले बीज में मिले हुये डंठल, मिट्टी, पत्तियां तथा खरपतवार के बीजों को भली-भांति साफ कर लें एवं तेज धूप में 2-3 दिन तक सुखा कर 8 से 10 प्रतिशत नमी होने पर भंडारण करें।
  • बीज भंडारण के पहले फफूंदनाशक दवा से बीजोपचार करना जरूरी होता है, जिससे बीज जनित रोग का सस्ता एवं कारगर नियंत्रण हो सकता है। बीजोपचार हेतु थायरम या केप्टान फफूंदनाशक को 3 ग्राम अथवा कार्बोक्सिन 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचरित करें।
  • मूंग एवं उड़द में रसचूसक कीट जैसे सफेद मक्खी, माहो, हरा मच्छर, जैसिड, थ्रिप्स आदि का प्रकोप हो सकता है, मंूग एवं उड़द फसल की पत्ती पीली पडऩे पर रोगग्रस्त पौधे को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यह रोग मुख्यत: सफ़ेद मक्खी कीट से फैलता है। दिखाई देने पर नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 5 मिली दवा /पम्प 15 लीटर पानी के हिसाब से छिड़कें।

उद्यानिकी 

  • ग्रीष्मकालीन कददूवर्गीय सब्जियों में 2 पत्ती एवं 4 पत्ती की अवस्था पर इथ्रेल 200 से 250 पीपीएम एक ग्राम दवा प्रति 4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें । 
  • भिंडी में रसचूसक सफेद-मक्खी, जैसिड आदि के नियंत्रण के लिए डायमिथिएट 30 ईसी की 1 से 1.5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।

पशुपालन 

  • पशु को प्रोटीन, एनर्जी, खनिज पदार्थ, और विटामिन की जरूरतों की पूर्ति के लिए 100 किलो संतुलित दाना मिश्रण में 50 किलो जौ या बाजरा, 20 किलो मूंगफली या सरसों  की खली, 17 किलो गेहूँ की भूसी, 2 किलो खनिज पदार्थ और 1 किलो नमक मिलाकर तैयार मिश्रण को रोजाना सुबह-शाम प्रति लीटर दूध उत्पादन पर 2 किलो खिलाना चाहिए । 

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  • गूगल प्ले स्टोर से जियो चैट एप का चयन करें और इंस्टॉल बटन दबाएं। 
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