एक सफल किसान से मिला उन्नत खेती का मूलमंत्र जैविक खेती से बढ़ी आमदनी

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कहते हैं खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है। उसी प्रकार अच्छी संगति भी इंसान को अच्छा बनती है। यानी देख कर व्यक्ति भी बहुत कुछ सीख सकता है। बस उसमें कुछ कर गुजऱने का जज़्बा होना चाहिए।
जी हां – सफलता की ऐसी ही एक कहानी है, भोपाल जिले के फंदा ब्लॉक में रहने वाले ग्राम वीनापुर के एकमात्र पाँच एकड़ के किसान राजेश मीणा की। दरअसल यह बात एक साल पुरानी है। जब भोपाल जिले के ग्राम गोलखेड़ी में रिलायंस फाउंडेशन के जागरूकता कार्यक्रम में राजेश मीणा शामिल हुये थे। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों द्वारा दी गई जैविक खेती व कृषि व उद्यानिकी फसलों की जानकारियां राजेश मीणा को बहुत पसन्द आई। उन्होंने भी अब जैविक खेती करने का मन बना लिया था। साथ ही इसी जागरूकता कार्यक्रम में उनकी मुलाकात गोलखेड़ी के ही एक सफल युवा कृषक श्यामसिंह कुशवाह से भी उसकी मुलाकात हुई। जिसने राजेश मीणा के खेती करने के नजरिये को ही बदलकर रख दिया।
जानकारी हासिल की
जब श्याम सिंह कुशवाह से राजेश मीणा की मुलाकात हुई और उन्होंने जब उनके फार्महाऊस का भ्रमण किया, तभी राजेश मीणा ने यह तय कर लिया था, कि वे भी जैविक खेती करेंगे। इसके बाद तो राजेश मीणा का उत्साह सातवें आसमान पर था। उन्होंने रिलायंस फाउंडेशन के सभी जागरूकता कार्यक्रमों में आना शुरू कर दिया। जहां उन्हें कृषि वैज्ञानिकों से नई नई कृषि जानकारियाँ तो मिलती ही थी, अपनी कृषि समस्याओं का समाधान भी प्राप्त होता था। इसके अलावा उन्होंने एफ.एम, विविध भारती भोपाल से प्रसारित रिलांयस फाउंडेशन द्वारा किसान संदेश कार्यक्रम भी नियमित सुनना शुरू किया। जिससे उन्हें खेती की समसामयिक जानकारियाँ मिलती रही। इस प्रकार उन्होंने जैविक खेती करने के लिये मटका खाद, पाँच पत्ती काढ़ा, गौमूत्र, केंचुआं खाद, कण्डा खाद, और कल्चर का उपयोग करने का तरीका सीखा।
जैविक मक्का, मूंगफली, सब्जी
एक एकड़ भूमि में मक्का लगाई, दो एकड़ भूमि में सब्जी की खेती शुरू की जिसमें लौकी, गिलकी, बरबटी, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, गोभी लगाई।
वैज्ञानिकों की सलाह मानी
राजेश मीणा बताते है कि जब रिलायंस फाउंडेशन का जागरूकता कार्यक्रम जब मेरे गांव में आयोजित किया गया। तब कृषि वैज्ञानिकों ने मुझे जैविक विधि से गेंदा व मूंगफली की खेती करने की सलाह दी। फिर क्या था एक एकड़ भूमि पर मैंने मूंगफली की खेती की और आधा एकड़ में गेंदा लगाया । जिससे मुझे अच्छा मुनाफा मिला। बीमारियां भी फसल में कम आई और पत्तियां भी पीली नहीं पड़ी । क्योंकि उस वर्ष अधिक वर्षा होने के कारण गांव के सभी किसानों की फसल पीली पड़ चुकी थी। और 70 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी थी। लेकिन हमारी फसल अच्छी थी। क्योंकि हमने जैविक खेती कर जैविक कीटनाशक एवं जैविक पदार्थों का प्रयोग किया था। जिसके परिणामस्वरूप मूंगफली की फसल से मुझे पिछली वर्ष की तुलना में 25, 000 रूपये अधिक की आमदानी प्राप्त हुई व गेंदे से 8,000 रूपये की आय प्राप्त हुई। बड़े ही प्रसन्न भाव से राजेश मीणा कहते हैं कि रिलायंस फाउंडेशन के मार्गदर्शन में व श्याम सिंह कुशवाह के परामर्श के आधार पर मैंने इन्टर क्रॉपिंग से मक्का लगाई । जिससे मैंने 10,000 हजार रूपये के भुट्टे बेचें साथ ही मैंने जैविक कीटनाशकों का प्रयोग कर कुल एक वर्ष में 63,000 रूपये की बचत की। जो मैं सभी किसानों से यहीं कहना चाहूंगा कि वे भी जैविक खेती अपनायें और अपने जीवन को सम्पन्न बनायें।

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