प्रदेश के मैदानी कृषि अमले को ट्रेंड करेंगे मास्टर ट्रेनर

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कृषि विश्वविद्यालय में त्रिदिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण का शुभारंभ

जबलपुर। वर्तमान में कृषि के बदलते परिवेश में कृषि के साथ वानिकी का भी महत्व बढ़ता जा रहा है। कृषि वानिकी के विकास से ही किसान भाईयों को आशातीत सफलता प्राप्त होगी। आवश्यकता इस बात की है किसानों का गांवों से पलायन रोका जाये एवं खेती को लाभ का धंधा बनाया जाये। उक्ताशय के विचार अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉं. पी.के. मिश्रा ने त्रिदिवसीय प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किये। संचालक विस्तार सेवाएं डॉं. पी.के. बिसेन ने बताया कि प्रदेश के मैदानी कृषि अमले को प्रशिक्षित करने हेतु समस्त जिलों के सहायक संचालक कृषि एवं प्राचार्य कृषि प्रशिक्षण केंद्र हेतु तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. एस.के. राव, संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. पी.के. बिसेन, संचालक शिक्षण डॉ. धीरेन्द्र खरे, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. (श्रीमती) ओम गुप्ता एवं अधिष्ठाता कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय डॉ. आर.के. नेमा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश बाजपेयी, डॉ. डोंगरे, डॉ. अर्चना पाण्डे एवं डॉ. अन्य रावत वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।
कोर्स प्रभारी डॉ. एल.डी. कोष्टा एवं डॉं. के.के. जैन एवं डॉ. अनय रावत का तीन दिवसीय प्रशिक्षण में योगदान रहेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश बाजपेयी एवं आभार प्रदर्शन डॉ. एल.डी. कोष्टा ने किया।

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