अधिक उत्पादन के लिए मिट्टी परीक्षण आवश्यक

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संजय कुमार , डॉ. पी.एस. नरुका
डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत
डॉ. शिल्पी वर्मा डॉ. सीपी पचौरी

मिट्टी परीक्षण का महत्व
अत्यधिक एवं असंतुलित उर्वरकों तथा कृषि रसायनों के प्रयोग से खेत की मिट्टी मृत हो रही है या उत्पादन क्षमता घट रही है। जिन क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाली उन्नत या संकर किस्में उगाई जाती हैं वहां मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी बहुत तेजी से होती है अत: भरपूर उत्पादन लेने के लिए खेत की मिट्टी में उपलब्ध तत्वों की मात्रा एवं मिट्टी का स्वास्थ्य जानने के लिए मिट्टी परीक्षण करना आवश्यक हो जाता है।
मिट्टी परीक्षण की आवश्यकता क्यों?
भूमि में पौधे का भोजन पोषक तत्वों के रुप में उपस्थित रहता है जिन्हें पौधा लगातार लेता रहता है। यदि यह पौध पौषक तत्व काफी समय तक भूमि को नहीं दिये जाएं तो भूमि में प्राकृतिक रुप से उपस्थित पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। जब ये आवश्यक पोषक तत्व पौधों का उपलब्ध नहीं होते हैं तो फसल की उपज में कमी आती है और भूमि की उर्वराशक्ति का संतुलन भी बिगड़ जाता है।
उदाहरण के लिए फसल में नत्रजन की आवश्यकता से अधिक मात्रा तथा स्फुर एवं पोटाश की कम मात्रा प्रयोग करने से फसल की वानस्पतिक बढ़वार तो बहुत अधिक होती है, पत्तियां गहरी हरी आकार में बड़ी तथा फसल देर से पकती है, लेकिन स्फुर एवं पोटाश की कम मात्रा के कारण फूल व फलों का विकास नहीं हो पाता है, दाना चमकदार नहीं होता है तथा कभी-कभी तो फसल में बिल्कुल फूल एवं फल नहीं बनते हैं फसल की कीट-व्याधियों से लडऩे की प्रतिरोधी शक्ति विकसित नहीं होती है तथा तना मजबूत न होने के कारण फसल तेज हवा या वर्षा से शीघ्र गिर जाती है।
इसके विपरीत यदि फसल में नत्रजन की मात्रा कम तथा स्फुर एवं पोटाश की अधिक मात्रा प्रयोग की जाती है तो फसल की वानस्पतिक बढ़वार अच्छी तरह नहीं हो पाती है, पत्तियों का रंग हल्का हरा या पीला होता है लेकिन स्फुर तथा पोटाश की अधिकता के कारण फसल में फूल एवं फल शीघ्र आते हैं तथा फसल जल्दी पक जाती है लेकिन अच्छी पैदावार प्राप्त नहीं होती है।
अत: इन पोषक तत्वों का एक निश्चित अनुपात में संतुलित उपयोग होना चाहिए अन्यथा उपज में तो कमी आएगी ही साथ ही भूमि की उर्वराशक्ति का हृास भी होगा। फसलों की औसत उपज में स्थिरता व भूमि की उर्वराशक्ति में कमी के लिए उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को भी एक कारण माना जा रहा है। किसी भी एक तत्व की कमी या अधिकता से फसल की पैदावार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। यदि इन तत्वों को सही अनुपात में प्रयोग नहीं किया जाता है तो जो खर्च इन तत्वों की पूर्ति हेतु उर्वरक के रुप में किया जाता है वह सब व्यर्थ होने की पूरी-पूरी सम्भावना रहती है।
इन समस्याओं के निराकरण हेतु यह आवश्यक है कि मिट्टी में उपलब्ध तत्वों की पूर्ण जानकारी मिट्टी परीक्षण द्वारा प्राप्त कर विभिन्न फसलों की आवश्यकतानुसार निश्चित मात्रा में उर्वरक फसल में दिए जायें। साथ ही लक्षित उत्पादन प्राप्त करने, उर्वरकों की उपयोगिता क्षमता में वृद्धि के लिए, समस्याग्रस्त अम्लीय व क्षारीय मिट्टी के सुधार हेतु एवं विभिन्न क्षेत्रों के लिए मिट्टी उर्वरता मानचित्र तैयार करने के लिए मिट्टी की जांच कराई जाना बहुत आवश्यकता होती है।
मिट्टी परीक्षण क्या है?
मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के वैज्ञानिक विश्लेषण को मिट्टी परीक्षण कहते हैं। मिट्टी परीक्षण के अंतर्गत मुख्य रुप से नत्रजन, स्फुर, पोटाश, पीएच एवं घुलनशील लवणों का निर्धारण किया जाता है। इन विश्लेषणों के आधार पर उर्वरकों का सही एवं संतुलित प्रयोग कर अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। मिट्टी परीक्षण एक ऐसी युक्ति है जिसके द्वारा संतुलित उर्वरकों के उपयोग से उर्वरकों पर बढ़ते खर्च को कम कर अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। साथ ही मिट्टी परीक्षण से पता चलता है कि खेत में किसी भूमि सुधारक रसायन जैेसे जिप्सम अथवा चूने की आवश्यकता है कि नहीं। यदि है तो भूमि सुधारक रसायन की कितनी मात्रा डालनी चाहिए।
मिट्टी परीक्षण हेतु प्रतिनिधि नमूना तैयार करना
मिट्टी परीक्षण एक तकनीकी विषय है। मिट्टी परीक्षण हेतु लगभग एक हैक्टेयर क्षेत्र से आधा किलो मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना तैयार किया जाता है जो पूरे क्षेत्र की पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रकट कर सके। अत: मिट्टी का प्रतिनिधि नमूना बहुत की सावधानी से तैयार करना चाहिए। अन्यथा पूरी मेहनत व्यर्थ हो जाती है तथा मिट्टी परीक्षण की कोई उपयोगिता नहीं रह जाती है।
मिट्टी नमूना लेने के लिए आवश्यक साम्रगी
1. मिट्टी खोदने के औजार जैसे गैंती, फाबड़ा, खुरपी।
2. नमूना एकत्र करने के लिए तगारी या पॉलीथिन।
3. नमूना सुखाने के लिए साफ कपड़ा या पुराने अखबार।
4. नमूना रखने के लिए 500 ग्राम क्षमता वाली साफ पॉलीथिन या कपड़े की थैली।
5. नमूने के बारे में सूचना-पत्र।।
प्रतिनिधि मिट्टी नमूना तैयार करने की विधि
सर्वप्रथम खेत को उसकी स्थिति (समतल, ऊंची, नीची, ढ़लान) एवं मिट्टी की किस्म के अनुसार बांट लें। फिर नमूना लेने के स्थान की ऊपरी सतह को साफ कर खुरपी की सहायता से लगभग 15 सेंमी (6 इंच) की गहराई तक अंग्रेजी के (ङ्क) के आकार का गढ्डा खोदकर मिट्टी निकालकर फेंक दें फिर दोनों किनारों से 6 इंच गहराई तक 2 इंच मोटाई की मिट्टी लेकर तगारी या पॉलीथिन में एकत्र कर लें।
उपरोक्त विधि से एक हेक्टेयर खेत में से लगभग 8 से 10 जगह से यादृच्छिक रेन्डम विधि से मिट्टी लेकर एक साफ पॉलीथिन पर एकत्र कर लें। फिर मिट्टी को अच्छी तरह मिलाएं तथा उसको पॉलीथिन पर गोलाई में समान रुप से फैलाएं। उंगली से इसे चार भागों में विभाजित करें तथा चार भागों में से किन्हीं दो आमने-सामने वाले भाग की मिट्टी को अलग निकाल दें। शेष बचे दो भागों की मिट्टी को लेकर फिर से गोलाई में समान रुप से फैलाए तथा पुन: चार भागों में विभाजित कर आमने-सामने के किन्हीं दो भागों की मिट्टी एकत्र करें। पुन: इसी क्रिया को तब तक दोहराएं जब तक कि लगभग 500 ग्राम मिट्टी शेष रह जाए। इस नमूने को प्रतिनिधि नमूना कहते हैं। इस नमूने की मिट्टी को साफ कपड़े या पुराने अखबार पर रखकर छाया में सुखाकर साफ पॉलीथिन या कपड़े की थैली में भर लें। अब मिट्टी परीक्षण के लिए सूचना-पत्र में जानकारी दो प्रतियों में भरकर सूचना-पत्र की एक प्रति मिट्टी नमूने की थैली के भीतर तथा दूसरा प्रति थैली के मुंह पर धागे की सहायता से संलग्र कर दें। इस प्रकार से तैयार मृदा नमूने को मिट्टी नमूने को मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भिजवाएं।

मृदा नमूना तैयार करते समय ध्यान में रखने योग्य बिन्दु
1. मिट्टी नमूने को खाद की खाली थैली में एकत्र नहीं करना चाहिए।
2. प्रत्येक खेत का अलग-अलग नमूना लेना चाहिए।
3. यदि एक ही खेत में फसल की पैदावार एक समान न हो तो खेत को उर्वराशक्ति के अनुसार विभाजित कर अलग-अलग नमूना लेना चाहिए।
4. एक मिट्टी नमूना अधिक से अधिक 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल से तैयार करना चाहिए।
5. विश्लेषण हेतु तैयार किया मिट्टी नमूना खेत से लगभग 8-10 जगह से मिट्टी लेकर बनाना चाहिए।
6. मेड़ों के किनारे, वृक्षों के नीचे की जगह, खलिहान बनाई गई जगह, खाद के गड्डे की जगह, सिंचाई की नाली की जगह, दलदल की जगह आदि से मिट्टी नमूना एकत्र नहीं करना चाहिए।
7. सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच के लिए मिट्टी नमूना लेने में पीतल, कांसा या गेल्वनाइज्ड औजार उपयोग में नहीं लाने चाहिए क्योंकि उनका तांबा या जस्ता नमूने को दूषित कर देगा।
8. बागवानी के लिए मिट्टी के 2 मीटर तक गहराई की जांच करानी चाहिए।
9. ऊसर भूमि में क्षार व नमक की मात्रा मौसम के अनुसार भूमि की सतह पर घटती-बढ़ती रहती है। इसलिए ऐसे समस्याग्रस्त खेतों की मिट्टी का नमूना 100 सेमी गहराई तक लेना चाहिए।
मिट्टी नमूना लेने का समय
10. गर्मियों में रबी फसल की कटाई के बाद से लेकर खरीफ फसल की बुवाई के पहले तक कभी भी मिट्टी नमूना लिया जा सकता है।
मिट्टी परीक्षण कहां कराएं?
उपरोक्त विधि से लिए गए प्रतिनिधि मिट्टी नमूने का परीक्षण निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र या कृषि विभाग की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में कराया जा सकता है।

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