मूंग व उड़द में रोग प्रबंधन

पत्ती धब्बा रोग  मूंग व उड़द का यह रोग कभी-कभी भारी क्षति महामारी के रूप में देखा जाता है। इस रोग से पौधों की वृद्धि विकास रूक जाती है। जिसके कारण से उपज पर भारी नुकसान होता है। रोगजनक पौधों

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कम लागत में फलेगी मूंग

खेत की तैयारी रबी की कटाई के बाद दो-तीन बार हल चलाकर मिट्टी को भुरभुरा व नींदा रहित करें।  पाटा लगाकर खेत को समतल करें। उन्नत बीज का चुनाव, मात्रा व उपचार शुद्ध, प्रमाणित, रोग मुक्त  बीज का चलन करें।

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मूंग की खेती के लिए उपयुक्त सुझाव

जलवायु एवं मिट्टी – मूंग जायद एवं खरीफ ऋतु में उगाई जाती है। इसके लिए उपयुक्त तापमान 27 से 33 डिग्री है। यह सामान्यतया अधिक तापमान एवं सूखे हेतु सहनशील फसल है एवं दिन की लंबाई हेतु संवेदनशील फसल है।

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मूंग की खेती महाराष्ट्र में भी

म.प्र. में ग्रीष्मकालीन मूंग लगाई जाती है। बेहतर दाम मिलने के कारण यह प्रदेश में तीसरी फसल के रूप में उगाई जाने लगी है। गत वर्ष मूंग के बेहतर दाम मिलने के कारण यह फसल अब सीमावर्ती महाराष्ट्र में भी

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जायद में लगाएं मूंग

भूमि की तैयारी: दो या तीन बार हल या बखर से जुताई कर खेत अच्छी तरह तैयार करना चाहिए तथा पाटा चलाकर खेत को समतल बना लेना चाहिये। दीमक से बचाव हेतु क्लोरोपायरीफॉस चूर्ण 20 किग्रा प्रति हेक्टर की दर

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मूँग में कीट व रोग नियंत्रण

मुख्य कीट : कातरा : कातरा का प्रकोप विशेष रूप से दलहनी फसलों में बहुत होता है। इस कीट की लट पौधों को आरम्भिक अवस्था में काटकर बहुत नुकसान पहुंचाती है। इसके नियंत्रण हेतु खेत के आसपास कचरा नहीं होना

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उड़द एवं मूंग की खरीदी 10 जुलाई से पुन: की जायेगी : कलेक्टर

बलपुर। उड़द एवं मूंग की खरीदी 10 जुलाई से पुन: प्रारंभ की जायेगी। इस बीच खरीदी केन्द्रों पर तुअर का समर्थन मूल्य पर उपार्जन होगा। यह जानकारी कलेक्टर महेश चन्द्र चौधरी ने कृषि उपज मंडी समिति पाटन का निरीक्षण करते हुए किसानों से कही।

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अब आ गया है समय जायद में मूंग लेने का

जलवायु मूंग की खेती खरीफ एवं जायद दोनों मौसम में की जा सकती है। फसल पकते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। खेती हेतु समुचित जल निकास वाली दोमट तथा बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन

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