जीरो टिलेज से बढ़ी आमदनी, किसानों ने छोड़ी पराली जलाने की परंपरा
डॉ. बी.एम. प्रसन्ना के मार्गदर्शन में छिंदवाड़ा में खेती की नई राह
04 अप्रैल 2026, छिंदवाड़ा: जीरो टिलेज से बढ़ी आमदनी, किसानों ने छोड़ी पराली जलाने की परंपरा – छिंदवाड़ा,जिले के परासिया विकासखंड के ग्राम जमानिया जेठू में खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कुछ समय पहले तक जहां फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने का धुआं आम दृश्य था, वहीं अब किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर रहे हैं।
यह सकारात्मक बदलाव बोरलॉग इंस्टिट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) एवं मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त प्रयासों से संचालित जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के माध्यम से संभव हो सका है। यह कार्यक्रम प्रदेश के नौ जिलों में संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों को बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए प्रेरित करना है। इस कार्यक्रम का समग्र नेतृत्व BISA के प्रबंध निदेशक एवं प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक डॉ. बी.एम. प्रसन्ना द्वारा किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में वैज्ञानिकों की टीम गांवों में पहुंचकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दे रही है।
इसी क्रम में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी सहायक श्री दीपेंद्र सिंह ने किसानों को जीरो टिलेज मशीन के माध्यम से बुवाई की उन्नत तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में बिना खेत की जुताई किए सीधे बुवाई की जाती है, जिससे समय, श्रम और लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नरवाई (पराली) प्रबंधन के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, जबकि जीरो टिलेज तकनीक अपनाने पर नरवाई खेत में ही संरक्षित रहती है, जो धीरे-धीरे सड़कर जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है और मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है।
किसानों के अनुसार, इस तकनीक को अपनाने से जुताई एवं डीजल पर होने वाला खर्च लगभग 2 से 3 हजार रुपये प्रति एकड़ तक कम हो रहा है। साथ ही, मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलने से फसल उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव देखा जा रहा है। प्रशिक्षण में ग्राम जमानिया जेठू के प्रगतिशील किसान अर्जुन विश्वकर्मा, ख्यालीराम विश्वकर्मा एवं बब्लेश कुमारे के साथ क्षेत्र के अन्य किसान भी उपस्थित रहे। कृषि विभाग से कृषि विस्तार अधिकारी श्री रमेश पवार तथा जनमंगल संस्थान से सुश्री भावना चिंचलवार ने भी प्रशिक्षण में सहभागिता की।
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