राज्य कृषि समाचार (State News)

किसान भाई इस सप्ताह क्या करें

1 दिसम्बर 2022, भोपाल । किसान भाई इस सप्ताह क्या करें –

धान: आगामी सप्ताह में बारिश नहीं होने का पूर्वानुमान है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे परिपक्व धान की फसल की कटाई करें। फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सुखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सुखा लें। भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 12 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।

गेहूं :  मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहंू की बुवाई हेतु खाली खेतों को तैयार करें तथा उन्नत बीज व खाद की व्यवस्था करें। बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर। जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो तो क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी ञ्च 5 लीटर प्रति हेक्टर की दर से पलेवा के साथ दें। नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 120, 60 व 40 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर होनी चाहिये।

सरसों:  लगातार  तापमान में गिरावट को ध्यान में रखते हुए किसान भाई सरसों की बुवाई में और अधिक देरी न करें। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से अंतिम जुताई पर डालें। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें।  बीज दर-1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़।  बुवाई से पहले बीजों को केप्टान ञ्च 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सेमी और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सेमी दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सेमी कर लें।

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मटर: लगातार तापमान में गिरावट को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई में और अधिक देरी न करें अन्यथा फसल की उपज में कमी होगी तथा कीड़ों का प्रकोप अधिक हो सकता है। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें।  बीजों को कवकनाशी केप्टान या थायरम ञ्च 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें।

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चना: लगातार  तापमान में गिरावट को ध्यान में रखते हुए किसान चने की बुवाई कर सकते हैं। बुवाई से पूर्व मृदा में उचित नमी का ध्यान अवश्य रखें। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60-80 कि.ग्रा. तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80-100 कि.ग्रा. प्रति हे. बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई 30-35 सेमी दूर कतारों में करें। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम और पीएसबी के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।

अरहर : स्टेरिलिटी मोज़ेक रोग नियंत्रण के उपाय

  • 45 और 60 डीएएस पर फेनजाक्विन 10 ईसी (मैगीस्टर) ञ्च 1 मिली/लीटर पानी का छिडक़ाव करें।
  • विकास के शुरुआती चरण में संक्रमित पौधों को बाहर निकाल दें।
अल्टरनेरिया ब्लाइट नियंत्रण के उपाय
  • मेन्कोजेब 75 डब्ल्यूपी ञ्च 2 ग्राम/लीटर या कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी ञ्च 1 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें।
फल/फूल/सब्जी
  • भटा, टमाटर एवं भिंडी: किसान भाई 20 फेरोमेन ट्रेप प्रति हेक्टेयर प्रयोग कर भटा, टमाटर एवं भिंडी फसल में भेदक कीट का नियंत्रण करें।
  • जिन कृषकों के पास केला एवं पपीता का पौध तैयार है, उसे मुख्य खेत में लगायें।
  • किसान भाई वृक्षों के तने पर बोर्डो पेस्ट लगायें, फल उद्यान में साफ सफाई करें एवं वृक्षों के चारों तरफ थाला बनाकर खाद एवं उर्वरक की निर्धारित मात्रा मिलायें।
  • प्याज के पौधरोपण का कार्य प्रारंभ करें।

गुलदाउदी और ग्लेडियोलस- गुलदाउदी और ग्लेडियोलस के फूलों के पौधों के रोपण का सही समय है, रजनीगंधा में खरपतवार नियंत्रण प्रबंधन प्रचालन किया जाना चाहिए। यह गेंदा में फूल का समय है, इसलिए फूल को बाजार में भेजा जाना चाहिए।

गुलाब: कटाई और छटाई के साथ-साथ वर्तमान मौसम की स्थिति में गुलाब में गुड़ाई  भी किया जाना चाहिए। फसल में फफूंद जनित रोगों से बचाव के लिए कटे हुए भाग में बाविस्टीन का पेस्ट लगायें।

पशुपालन
  • कृमिरोग से बचाव हेतु पशुओं को अल्बेन्डाजोल/फेनबेन्डाजोल इत्यादि दवाइयां पशु चिकित्सक की सलाह से खिलायें।
  • यदि खुरपका मुंहपका, लंगड़ी, गलघोटू आदि रोगों का टीकाकरण नहीं करवाया हो, तो इस माह अवश्य अपने मवेशियों को टीका लगवा लें।
  • अभी पशुओं के लिए हरी घास बहुतायत मात्रा में उपलब्ध है। अत: पशुपालक ध्यान दें कि हरे चारे के साथ-साथ पशुओं को सूखा चारा भी अधिक मात्रा खिलायें एवं दस्त जैसी बीमारियों से बचायें।
  • पोल्ट्री हाउस के फर्श पर ओवन की राख स्प्रे करें।
  • 6-7 सप्ताह के पोल्ट्री पक्षियों को रानीखेत और चेचक की बीमारियों से बचाने के लिए उचित टीकाकरण करें।

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