रबी फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान पर वेबिनार

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25 नवंबर 2021, इंदौर । रबी फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान पर वेबिनार – रबी फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण एवं निदान विषय पर कृषक जगत किसान सत्र के अंतर्गत गत दिनों वेबिनार आयोजित किया गया, जिसके प्रमुख वक्ता मल्टीप्लेक्स ग्रुप के श्री नागेंद्र शुक्ला, चीफ मार्केटिंग मैनेजर एवं डॉ. निरंजन एच जी, टेक्निकल हेड थे। इस वेबिनार में अंतरप्रांतीय किसान भी शामिल हुए। वक्ताओं ने किसानों के सवालों के संतोषजनक जवाब दिए। कृषि ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं को मल्टीप्लेक्स ग्रुप द्वारा अपने उत्पाद देने की घोषणा की गई। वेबिनार का संचालन कृषक जगत के संचालक श्री सचिन बोन्द्रिया ने किया।

मिट्टी की जांच कराएं

Nagendra-Shukla1वेबिनार के आरम्भ में श्री नागेंद्र शुक्ला ने किसानों से स्पष्ट कहा कि खादों का उपयोग बढऩे के बाद भी वांछित उत्पादन नहीं मिल रहा है। इसके कारणों पर विचार करने की जरूरत है। फसलों पर जैविक और अजैविक कारणों से आ रही परेशानी पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि जैविक में जमीन के जीव मित्र जहाँ उत्पादकता को बढ़ाते हैं, वहीं अजैविक कारकों में वातावरण, मौसम, तापमान और संतुलित पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं करना भी प्रभावित करता है। जमीन कडक़ होती जा रही है। किसान जोखिम लेकर खेती करते हैं। मिर्च, टमाटर में वायरस की समस्या आ रही है। हमारा उद्देश्य यह है कि फसल में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण नहीं दिखे। मल्टीप्लेक्स कम्पनी का परिचय देते हुए आपने कहा कि 1974 में इसकी स्थापना संस्थापक श्री जीपी शेट्टी द्वारा की गई थी। डॉ. महेश शेट्टी इसके प्रबंध निदेशक हैं। देश में 11 निर्माण इकाइयां हैं जो बैंगलुरु, भुवनेश्वर और गाजियाबाद में हैं। 25 शाखाओं और 5 हजार वितरकों की मदद से कृषकों की सेवा जारी है। आपने आवश्यक तत्वों की कमी से फसलों पर पडऩे वाले प्रभाव का जिक्र कर मिट्टी की जाँच कराने का आग्रह किया, ताकि मिट्टी की जरूरत के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति कर सकें।

6.5 से 7.5 का पीएच आदर्श

Dr Niranjan1

डॉ. निरंजन ने फसल के लिए जरूरी 16-20 आवश्यक तत्वों का जिक्र कर कहा कि इनमें से किसी एक भी तत्व की कमी हो गई तो उसका असर पैदावार पर पड़ता है। आपने देश की मिट्टी के विभिन्न प्रकारों एवं उसकी संरचना की विस्तार से जानकारी दी। आपने कहा कि मिट्टी के लिए 6.5 से 7.5 का पीएच पैदावार के लिए आदर्श रहता है। इस स्थिति में सभी पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध रहते हैं। ह्यूमस की उपस्थिति से सूक्ष्म तत्व की पकडऩे की क्षमता ज्यादा रहती है। यह मिट्टी को नरम बनाकर पानी को सोखता है। फसल पर पीएच के घटने-बढऩे से अम्लीयता और क्षारीयता के प्रभावों एवं मिट्टी में तापमान के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री निरंजन ने बताया कि पौधे के लिए 16 से 25 डिग्री तक का तापमान ठीक रहता है। इसके ऊपर या नीचे तापमान रहने से पत्ते या तो सूख जाते हैं या सड़ जाते हैं। इसलिए किसानों को खेत की मिट्टी के बारे में ज्ञान होना जरूरी है। एक ग्राम मिट्टी में 10 करोड़ से अधिक सूक्ष्मजीव होते हैं। जैविक क्षमता बढ़ाने के लिए आपने कम्पनी उत्पाद अन्नपूर्णा का जिक्र कर कहा कि यह मिट्टी संरचना को ठीक करता है। यह उत्पाद जापान को एक्सपोर्ट हो रहा है। जबकि विविध सूक्ष्मजीवी से बना खाद आर्गेनिक मैजिक उत्पाद डिकम्पोजिंग करता है। श्री शुक्ला ने बीच में हस्तक्षेप कर एक जरूरी बात कही कि लागत कम करने के लिए बीमारी से पहले ही उसका इलाज कर देना चाहिए। मिट्टी के अनुसार फसल का चुनाव करें। मिट्टी को बचाने का आग्रह करते हुए आपने कहा कि रसायनिक का खेत में अनावश्यक प्रयोग न करें। रसायनिक का अधिक इस्तेमाल करके किसान भाई , मित्र जीवों का बहुत नुकसान कर चुके हैं। जमीन कडक़ हो गई है। मिट्टी जीवित रही तो आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ कर पाएंगे।

मुख्य पोषक तत्व

डॉ. निरंजन ने फसल के मुख्य पोषक तत्वों एनपीके पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एनपीके फसल के प्रमुख तत्व हैं, जिनमें से नाइट्रोजन का अधिक इस्तेमाल होता है। हालाँकि यह हवा में 80 प्रतिशत उपलब्ध रहता है, लेकिन पौधे इसे आसानी से नहीं ले पाते हैं, क्योंकि मिट्टी में इसकी मात्रा 0.22 से 0.8 तक रहती है। नाइट्रोजन में अमोनियम और नाइट्रेट रहता है। यूरिया में 40 प्रतिशत, डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन रहता है। अमोनियम 25 प्रतिशत रहता है। अमोनियम कम चलनशील रहता है। जबकि सूक्ष्म जीवी स्थिर नाइट्रोजन को पौधों के लिए परिवर्तित कर देते हैं। लेकिन इसके लिए जमीन का पीएच 6-8 तक रहना जरूरी है। यह नए पत्तों को ऊपर तक आहार की पूर्ति करते हैं। नाइट्रोजन की कमी के लक्षण पुराने पत्तों में दिखाई देते हैं। नाइट्रोजन की कमी से पौधों का विकास नहीं होता और वह पत्ते पीले पडक़र सड़ जाते हैं। फूल कम आने से फल भी कम लगते हैं। नाइट्रोजन , प्रकाश संश्लेषण क्रिया में पौधों को क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है। राइजोबियम जीवाणु दाल फसलों की जड़ों के पास आकर छेद करके उसमे घुस जाते हैं और रसायनिक क्रिया करके पौधों को मदद करते हैं।

डॉ. निरंजन ने बताया कि फॉस्फोरस मिट्टी में अचलित रहता है, यही कारण है कि खेतों में 100 वर्ष तक का फॉस्फोरस जमा है। फॉस्फोरस का मुख्य काम आहार उत्पत्ति करना है। जड़ के पास इसे डालने से यह पौधों के सेल डिवीजन में भी मदद करता है। अंकुरण जल्दी होता है, जड़ों का विकास ज्यादा होता है और फूलों के आने की क्षमता बढ़ जाती है। जबकि इसकी कमी होने पर मक्का, टमाटर, आलू, गेहूं आदि फसल में पुराने पत्ते पर्पल रंग के हो जाते हैं। जैविक खाद ही इसका एकमात्र उपाय है। पोटेशियम मिट्टी में उपलब्ध रहता है, लेकिन चलनशील कम रहता है। एमओपी में पोटेशियम 60 प्रतिशत और एसओपी में 50 प्रतिशत रहता है। पुराने पत्तों में इसकी कमी के लक्षण दिखते हैं। यदि जमीन का पीएच 7-8 रहे तो रसायनिक क्रिया आसानी से होगी। यह पौधे में हवा को अंदर-बाहर करने में मदद करेगा। पोटेशियम में फल का स्वाद बढ़ाने, मीठापन और रोगों से लडऩे की क्षमता रहती है। पोटेशियम की कमी से प्याज के पत्ते का पूरा सूखना या गेहूं के पत्तों में पीलापन आना पोटेशियम की कमी के संकेत हैं। इसके लिए मल्टीप्लेक्स उत्पाद अन्नपूर्णा की अनुशंसा की गई।

द्वितीय पोषक तत्व भी जरूरी

डॉ. निरंजन ने द्वितीयक पोषक तत्वों कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, जि़ंक, बोरान, आइरन, कॉपर, मैग्नीज और मोलिब्डेनम की फसल में उपयोगिता और उसके प्रभावों पर भी पर्याप्त रोशनी डाली। कैल्शियम अचलनशील होने से जड़ से ऊपर तक नहीं जा सकता है, लेकिन यह सेलवाल बनाने में बहुत मदद करता है, जिससे पौधा मजबूत होता है। यह पौधे की इम्युनिटी पॉवर बढ़ाता है। इसकी कमी से पौधे का ऊपर का पत्ता सड़ जाता है। टमाटर के फल में नीचे कालापन आ जाता है। मैग्नेशियम की पौधों में हरापन लाने में प्रमुख भूमिका रहती है। 6 से 8.5 पीएच में यह उपलब्ध रहता है। डोलोमाइट में मैग्नेशियम 11 प्रतिशत और मैग्नेशियम सल्फेट 9.5 प्रतिशत रहता है। इसकी मौजूदगी से पौधों का विकास अच्छा होता है, जबकि इसकी कमी से पत्ते लाल हो जाते हैं। सल्फर,पौधों के रोगों से लडऩे में बहुत मदद करता है। यह रस चूसक कीटों से भी निपटता है। चलनशील कम होने पर भी यह प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए काम करता है। यह तिलहनी फसलों सरसों /मूंगफली में तेल का अंश बढ़ाने में बहुत मदद करता है। प्याज, लहसुन की फसल के लिए भी यह एक आवश्यक तत्व है। जिंक भी मिट्टी में अचलनशील रूप में होता है। इसके लिए मिट्टी का पीएच 5 से 7 के बीच होना जरूरी है। जिंक की कमी होने से पत्तों का आकार छोटा हो जाता है और वह सूखने लगते हैं। बोरान भी एक जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है जो जड़ के विकास और पत्तों की संरचना के अलावा परागण में मदद करता है। यह फल का स्वाद बढ़ाता है। यह पौधे की नमी के संतुलन को बनाए रखता है। इसकी कमी से पत्ते सूख जाते हैं और फल फटने लगते हैं। आइरन भी अचलनशील तत्व है जो मिट्टी में 6-7 पीएच में उपलब्ध रहता है। यह एंजाइम/प्रोटीन निर्माण में मदद करता है। मूंगफली फसल में नाड्यूल बनाने मदद करता है। मैगनीज और आइरन के गुण समान है। पौधे की इम्युनिटी बढ़ाता है। वायरस का कोई इलाज नहीं है। मैग्नीज सल्फेट के स्प्रे से पौधे को लाभ मिलता है। मोलिब्डेनम भी आवश्यक पोषक तत्व है, जो नाइट्रोजन बनाने में मदद कर उत्पादकता बढ़ाता है। इसकी कमी नए पत्तों में देखी जा सकती है। जबकि कॉपर, मिट्टी में चल और अचलनशील रूप में 5.5 से 7 पीएच के रूप में मौजूद रहता है। यह फॉलोन की फर्टिलिटी बढ़ाता है। यह पौधे की क्षमता के साथ ही उसका स्वाद बढ़ाता है। इसकी कमी से आलू/टमाटर का ऊपर का पत्ता सूखता है, वहीं केले का पत्ता मुड़ जाता है। इसकी पूर्ति कॉपर सल्फेट से की जा सकती है।

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